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Hardoi News: छेड़छाड़ की प्राथमिकी दर्ज कराने वाली सुपरवाइजर रेलवे ट्रैक पर पड़ी मिली
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हरदोई। बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन तैनात मुख्य सेविका संदिग्ध हालात में रेलवे ट्रैक पर पड़ी मिली। वह बृहस्पतिवार सुबह लखनऊ बरेली एक्सप्रेस ट्रेन से हरदोई आने के लिए लखनऊ से निकली थी। उक्त मुख्य सेविका ने बीती 19 दिसंबर को विभाग के ताकतवर लिपिक के खिलाफ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप है कि उक्त लिपिक ने ही मुख्य सेविका को ट्रेन से नीचे फेंकवा दिया।
लखनऊ निवासी एक युवती को बीते दिनों सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति मिली थी। 14 दिसंबर को उसने विभाग के लिपिक कमल कुमार पर अश्लील हरकतें करने और छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए शिकायत डीएम से की थी। डीएम ने मामले की जांच गंभीरता से कराई थी। लिपिक को दोषी पाया गया था और उसके खिलाफ सुपरवाइजर की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान शहर और भरखनी के बाल विकास परियोजना अधिकारियों पर भी लिपिक ने कुछ आरोप लगाए थे। साक्ष्य के तौर पर रिकॉर्डिंग भी दी थी। विवेचना में पुलिस ने दोनों सीडीपीओ के नाम भी बढ़ा दिए थे। डीएम की संस्तुति पर दोनों सीडीपीओ अनुराग कुमार और राजेंद्र कुमार के साथ ही लिपिक कमल कुमार को 29 दिसंबर को निलंबित कर दिया था।
सुपरवाइजर के चाचा ने बताया कि आम तौर पर वह त्रिवेणी एक्सप्रेस से हरदोई जाती थी। बृहस्पतिवार को ट्रेन लेट थी तो वह लखनऊ बरेली एक्सप्रेस से निकल गई। पूर्व में हुई घटना के कारण परिजन लगातार उसके संपर्क में रहते थे। दस बजे के आस पास कई बार मिलाने पर भी सुपरवाइजर का फोन रिसीव नहीं हुआ तो परिजनों ने उसे तलाशना शुरू किया।
कंप्यूटर और मोबाइल के एक जानकार के जरिए मिले सुझाव के आधार पर वह लोग काकोरी थाना क्षेत्र में रहीमाबाद के जंगलों के पास रेलवे लाइन के किनारे पहुंचे। इसी दौरान कुछ चरवाहों ने युवती के ट्रेन से गिरने की जानकारी दी। परिजन उसे पहले काकोरी थाने और अस्पताल ले गए। जहां से उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। वहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। चाचा का आरोप है कि उक्ल लिपिक ने ही या तो सुपरवाइजर को खुद ट्रेन से फेंका है या फिर किसी से फेंकवाया है।
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लखनऊ निवासी एक युवती को बीते दिनों सुपरवाइजर के पद पर नियुक्ति मिली थी। 14 दिसंबर को उसने विभाग के लिपिक कमल कुमार पर अश्लील हरकतें करने और छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए शिकायत डीएम से की थी। डीएम ने मामले की जांच गंभीरता से कराई थी। लिपिक को दोषी पाया गया था और उसके खिलाफ सुपरवाइजर की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान शहर और भरखनी के बाल विकास परियोजना अधिकारियों पर भी लिपिक ने कुछ आरोप लगाए थे। साक्ष्य के तौर पर रिकॉर्डिंग भी दी थी। विवेचना में पुलिस ने दोनों सीडीपीओ के नाम भी बढ़ा दिए थे। डीएम की संस्तुति पर दोनों सीडीपीओ अनुराग कुमार और राजेंद्र कुमार के साथ ही लिपिक कमल कुमार को 29 दिसंबर को निलंबित कर दिया था।
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सुपरवाइजर के चाचा ने बताया कि आम तौर पर वह त्रिवेणी एक्सप्रेस से हरदोई जाती थी। बृहस्पतिवार को ट्रेन लेट थी तो वह लखनऊ बरेली एक्सप्रेस से निकल गई। पूर्व में हुई घटना के कारण परिजन लगातार उसके संपर्क में रहते थे। दस बजे के आस पास कई बार मिलाने पर भी सुपरवाइजर का फोन रिसीव नहीं हुआ तो परिजनों ने उसे तलाशना शुरू किया।
कंप्यूटर और मोबाइल के एक जानकार के जरिए मिले सुझाव के आधार पर वह लोग काकोरी थाना क्षेत्र में रहीमाबाद के जंगलों के पास रेलवे लाइन के किनारे पहुंचे। इसी दौरान कुछ चरवाहों ने युवती के ट्रेन से गिरने की जानकारी दी। परिजन उसे पहले काकोरी थाने और अस्पताल ले गए। जहां से उसे लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। वहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। चाचा का आरोप है कि उक्ल लिपिक ने ही या तो सुपरवाइजर को खुद ट्रेन से फेंका है या फिर किसी से फेंकवाया है।
