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Hardoi News: जिले में कॉर्टेज की कमी से थमी टीबी की जांच, विकल्प सुझा रहे जिम्मेदार
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हरदोई। जिले में क्षय रोग उन्मूलन अभियान को जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा उठाना पड़ रहा है। क्षय रोग की सटीक जांच के लिए महत्वपूर्ण सीबी नॉट जांच दो माह से कॉर्टेज न होने के कारण ठप है। सीएमओ स्तर से कॉर्टेज खरीदने के लिए निर्देशित कर दिया गया है तो भी खरीद नहीं हो पाई है। जिम्मेदार क्षय रोगियों की जांच के वैकल्पिक रास्ते सुझा रहे हैं जबकि मरीजों को दर बदर भटकना पड़ रहा है।
टीबी रोग की सटीकता का आकलन करने के लिए सीबी नॉट जांच सबसे अहम होती है। माइक्रोस्कोपी जांच सिर्फ बलगम की एक साधारण जांच है वहीं ट्रूनॉट जांच भी सीबी नॉट जितनी सटीक नहीं होती है। बता दें कि जिले में सीबी नॉट जांच बीते दो माह से बंद है। हर रोज 50 से 60 मरीजों को सीबी नॉट जांच की आवश्यकता पड़ती है।
निदेशालय ने बजट का हवाला देकर कॉर्टेज रोक दी है। इसके बाद से मरीजों को जांच कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। काफी दिनों से परेशान भटक रहे मरीजों को सहूलियत देने के लिए शासन ने अब 15वें वित्त आयोग की धनराशि से सीएमओ को कॉर्टेज खरीदने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अभी कॉर्टेज की खरीद नहीं हो पाई है। अधिकारियों की सुस्ती का खामियाजा उन गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी का खतरा है।
वैकल्पिक रास्तों पर दिया जा रहा जोर
सीबी नॉट जांच बंद होने के बाद अब जिम्मेदार वैकल्पिक रास्तों का सुझाव दे रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों को केवल माइक्रोस्कोपी (बलगम की साधारण जांच), एक्सरे और ट्रूनॉट जांच कराने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार सीबी नॉट जांच जितनी सटीक होती है उतनी अन्य साधारण जांचें नहीं होतीं। ऐसे में कई बार शुरुआती टीबी पकड़ में नहीं आती जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
44 यूनिट पर माइक्राेस्कोपी व 15 पर हो रहे एक्सरे
विकल्पों में जिले की 44 टीबी यूनिट में और माइक्रोस्कोपी से जांच व 15 स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे से टीबी की जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा सीएचसी हरपालपुर, पिहानी, बिलग्राम, माधौगंज, अहिरोरी, टड़ियावां, सुरसा, कछौना, शाहाबाद, भरावन, बावन में ट्रूनॉट जांच कराई जा रही है।
शासन से कॉर्टेज खरीदने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। कॉर्टेज खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कॉर्टेज खरीद की दरें मंगवाई गई हैं, एक बार दरें निर्धारित हो जाएंगी तो कॉर्टेज खरीद ली जाएंगी। कॉर्टेज आते ही सीबी नाॅट जांच भी शुरू हो जाएगी। -डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमओ, हरदाेई
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टीबी रोग की सटीकता का आकलन करने के लिए सीबी नॉट जांच सबसे अहम होती है। माइक्रोस्कोपी जांच सिर्फ बलगम की एक साधारण जांच है वहीं ट्रूनॉट जांच भी सीबी नॉट जितनी सटीक नहीं होती है। बता दें कि जिले में सीबी नॉट जांच बीते दो माह से बंद है। हर रोज 50 से 60 मरीजों को सीबी नॉट जांच की आवश्यकता पड़ती है।
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निदेशालय ने बजट का हवाला देकर कॉर्टेज रोक दी है। इसके बाद से मरीजों को जांच कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। काफी दिनों से परेशान भटक रहे मरीजों को सहूलियत देने के लिए शासन ने अब 15वें वित्त आयोग की धनराशि से सीएमओ को कॉर्टेज खरीदने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अभी कॉर्टेज की खरीद नहीं हो पाई है। अधिकारियों की सुस्ती का खामियाजा उन गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी का खतरा है।
वैकल्पिक रास्तों पर दिया जा रहा जोर
सीबी नॉट जांच बंद होने के बाद अब जिम्मेदार वैकल्पिक रास्तों का सुझाव दे रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों को केवल माइक्रोस्कोपी (बलगम की साधारण जांच), एक्सरे और ट्रूनॉट जांच कराने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार सीबी नॉट जांच जितनी सटीक होती है उतनी अन्य साधारण जांचें नहीं होतीं। ऐसे में कई बार शुरुआती टीबी पकड़ में नहीं आती जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
44 यूनिट पर माइक्राेस्कोपी व 15 पर हो रहे एक्सरे
विकल्पों में जिले की 44 टीबी यूनिट में और माइक्रोस्कोपी से जांच व 15 स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे से टीबी की जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा सीएचसी हरपालपुर, पिहानी, बिलग्राम, माधौगंज, अहिरोरी, टड़ियावां, सुरसा, कछौना, शाहाबाद, भरावन, बावन में ट्रूनॉट जांच कराई जा रही है।
शासन से कॉर्टेज खरीदने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। कॉर्टेज खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कॉर्टेज खरीद की दरें मंगवाई गई हैं, एक बार दरें निर्धारित हो जाएंगी तो कॉर्टेज खरीद ली जाएंगी। कॉर्टेज आते ही सीबी नाॅट जांच भी शुरू हो जाएगी। -डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमओ, हरदाेई
