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Hardoi News: तीन बंदर पार्क अब जाना जाएगा पटेल चौक के नाम से
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फोटो-24-पिहानी में स्थित तीन बंदर पार्क। संवाद
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पिहानी। नगर का प्रसिद्ध तीन बंदर पार्क अब पटेल चौक के नाम से जाना जाएगा। इसी क्रम में पार्क का सुंदरीकरण शुरू हो गया है। इसमें लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पांच फिट की प्रतिमा भी लगाई जाएगी।
यह पार्क भूतपूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. प्रकाश चंद्र बाजपेई के संक्षिप्त कार्यकाल में बना था। तब से कई बार इसका जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। छोटी पिहानी स्थित पटेल पार्क को तीन बंदर पार्क नाम से जाना जाता है। पार्क का क्षेत्रफल भले ही कम हो लेकिन यह सबसे मशहूर पार्क है। पार्क के अंदर सरदार पटेल की प्रतिमा अखंडता व एकता का और मुख्य द्वार पर बने गांधी जी के तीन बंदर ‘बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो’ का संदेश दे रहे हैं।
महताब जबीन जैदी के कार्यकाल में सरदार पटेल की प्रतिमा के नीचे पत्थर पर तत्कालीन सभासदों के नाम दर्ज थे जो अब गायब हैं। अब तक कई बार इसकी मरम्मत कराई जा चुकी है। आखरी बार 2018 में भूतपूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी साजिद अंसारी ने 99 हजार रुपये से इसकी मरम्मत कराई थी। यहां फाउंटेन की छह रंगीन लाइटें लगाई गई थीं जो थोड़े ही दिन जल सकीं। अब फव्वारा सूखा पड़ा है।
बाउंड्री पर 12 सफेद लाइटें लगाई गईं वो भी गायब हैं। अंदर पड़ी बेंचें टूट रही हैं। दिन में आसपास अतिक्रमण रहने से आम आदमी पार्क को ढूंढ भी नहीं पाता। अधिशासी अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि राज्य वित्त आयोग से 26 लाख 53 हजार 342 रुपये की लागत से कराए जा रहे सुंदरीकरण व जीर्णोद्धार के अंतर्गत बाउंड्री, बेंच और मूर्ति लगाया जाना शामिल है।
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यह पार्क भूतपूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. प्रकाश चंद्र बाजपेई के संक्षिप्त कार्यकाल में बना था। तब से कई बार इसका जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। छोटी पिहानी स्थित पटेल पार्क को तीन बंदर पार्क नाम से जाना जाता है। पार्क का क्षेत्रफल भले ही कम हो लेकिन यह सबसे मशहूर पार्क है। पार्क के अंदर सरदार पटेल की प्रतिमा अखंडता व एकता का और मुख्य द्वार पर बने गांधी जी के तीन बंदर ‘बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो’ का संदेश दे रहे हैं।
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महताब जबीन जैदी के कार्यकाल में सरदार पटेल की प्रतिमा के नीचे पत्थर पर तत्कालीन सभासदों के नाम दर्ज थे जो अब गायब हैं। अब तक कई बार इसकी मरम्मत कराई जा चुकी है। आखरी बार 2018 में भूतपूर्व पालिकाध्यक्ष हाजी साजिद अंसारी ने 99 हजार रुपये से इसकी मरम्मत कराई थी। यहां फाउंटेन की छह रंगीन लाइटें लगाई गई थीं जो थोड़े ही दिन जल सकीं। अब फव्वारा सूखा पड़ा है।
बाउंड्री पर 12 सफेद लाइटें लगाई गईं वो भी गायब हैं। अंदर पड़ी बेंचें टूट रही हैं। दिन में आसपास अतिक्रमण रहने से आम आदमी पार्क को ढूंढ भी नहीं पाता। अधिशासी अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि राज्य वित्त आयोग से 26 लाख 53 हजार 342 रुपये की लागत से कराए जा रहे सुंदरीकरण व जीर्णोद्धार के अंतर्गत बाउंड्री, बेंच और मूर्ति लगाया जाना शामिल है।
