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Hardoi News: सांडी पक्षी विहार की बदलेगी सूरत-सीरत
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खास खबर का लोगो
फोटो 23: सांडी पक्षी विहार में कलरव करते पक्षी। स्रोत : आर्काइव
फोटो 24: सांडी पक्षी विहार में जलक्रीड़ा करते पक्षी। स्रोत : आर्काइव
नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में 11.46 करोड़ रुपये की स्वीकृति
पानी से लेकर सुरक्षा के इंतजाम, मशीनों का रखरखाव और वेटलैंड को विकसित किए जाने के कराए जाएंगे काम
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। वसंत शुरू होते ही सांडी विहार में बड़ी संख्या में सात समंदर पार कर आने वाले पक्षियों का कलरव सुनाई देने लगता है। पक्षियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग भी पहुंचते हैं। रामसर समझौता में शामिल सांडी पक्षी विहार विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए बदला-बदला नजर आएगा। वेटलैंड को सुरक्षित और संरक्षित किए जाने के साथ ही पक्षी विहार में पानी, सुरक्षा के इंतजाम सहित मशीनों के रखरखाव के भी काम कराए जाएंगे।
शासन ने काम कराने के लिए नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में सरकार ने 11.46 करोड़ से अधिक रुपये की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। वहीं काम कराने के लिए 44 लाख 80 हजार रुपये भी वन विभाग को दे दिए हैं। सांडी पक्षी विहार का कुल क्षेत्रफल 308 हेक्टेयर है, इसमें करीब 215 हेक्टेयर क्षेत्रफल में झील का फैलाव है।
रामसर समझौता वेटलैंड को संरक्षित किए जाने के लिए चयनित देश के 37 स्थानों में सांडी पक्षी विहार भी शामिल हैं। विश्वपटल पर सांडी पक्षी विहार को पहचान दिलाने के प्रयासों को साकार रूप देने के साथ ही सरकार ने जिले के लोगों के लिए खुशखबरी दी है। प्रदेश शासन की विशेष सचिव नीरजा सक्सेना ने भारत सरकार की नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में सांडी पक्षी विहार में काम कराने के लिए 11 करोड़ 46 लाख रुपये की स्वीकृति दिए जाने की पत्र के माध्यम से जानकारी दी है। इन रुपयों से इकोसिस्टम को दुरुस्त कराने के साथ ही मशीनों का अनुरक्षण प्रारंभिक चरण में कराया जाएगा।
सांडी पक्षी विहार इसलिए है खास :
सांडी सड़क पर शहर मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर पक्षी विहार की साल 1990 में स्थापना हुई थी। खास बात यह है कि गुलाबी सर्दियों के शुरू होते ही सांडी पक्षी विहार में देसी समेत विदेशी प्रजातियों के पक्षियों का कलरव शुरू हो जाता है। इसमें सात समंदर पार से आने वाली करीब 700 अधिक प्रजातियों के पक्षी शामिल रहते हैं। वैसे तो विश्व में करीब 10,000 से अधिक और भारत में करीब 1,300 प्रजातियां पाई जाती हैं। सात समंदर पार कर सांडी पक्षी विहार में स्वैम्पहेन व सनबर्ड भी शामिल हैं। विशेष प्रजातियों के पक्षियों के साथ ही साइबेरियन, पर्पल, स्लेटी अंजन, रेड बिटर्न, रंगीन जंगिल, नकटा, छोटी सिलही, सींकपर, तिदारी बत्तख, छोटा लाल, सिर पोचर्ड, अबलक पोचर्ड, दबक, गिर्री, पिहो, गाजपांव व सुरमाबाटन प्रमुख रूप पक्षी विहार में आमद दर्ज कराती हैं। वहीं गुजराती बत्तख, छोटी सिलही, कबूतर, तीतर, मैना, लेखर ब्लैक, ईगल, कोयल, डव, सारस, बया और मोर भी सर्दियों में यहां आने वाले पर्यटकों को लुभाते हैं।
फोटो 25: अनुनय झा। स्रोत : आर्काइव
अभी तक लिफ्ट कैनाल से पानी की कराई जाती है व्यवस्था :
करीब तीन किलोमीटर के दायरे फैली सांडी पक्षी विहार की झील में साल भर पानी उपलब्ध कराने के लिए गर्रा से लिफ्ट कैनाल बनवाई गई है। गर्रा से पानी को लिफ्ट कर झील तक लाया जाता है। ताकि जलीय जीवों के लिए पानी उपलब्ध हो सके और भूमि दलदली बनी रहे। वहीं शासन ने सांडी पक्षी विहार को वन डिस्ट्रिक्ट-वन डेस्टिनेशन (ओडीओडी) में भी चयनित किया है।
वेटलैंड को संरक्षित किए जाने के साथ ही पक्षी विहार का बदलेगा लुक
सांडी पक्षी विहार रामसर समझौता में शामिल है, भारत सरकार ने नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में काम कराए जाने की स्वीकृति दी है। जो जिले के लोगों और वेटलैंड को संरक्षित किए जाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इससे सांडी पक्षी विहार को नया लुक दिए जाने के साथ ही वहां पर झील में पानी उपलब्ध हो सकेगा। पक्षियों के साथ ही जलजीवों को प्राकृतवास बनाने के लिए बेहतर माहौल मिल सकेगा। इससे पक्षी विहार में विदेशी पक्षियों के आने की संख्या और प्रजातियों में भी बढ़ोतरी होगी। जल्द ही वन विभाग के अधिकारियों से कार्ययोजना मुताबिक, काम कराने की प्रक्रिया भी शुरू कराई जाएगी।
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फोटो 23: सांडी पक्षी विहार में कलरव करते पक्षी। स्रोत : आर्काइव
फोटो 24: सांडी पक्षी विहार में जलक्रीड़ा करते पक्षी। स्रोत : आर्काइव
नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में 11.46 करोड़ रुपये की स्वीकृति
पानी से लेकर सुरक्षा के इंतजाम, मशीनों का रखरखाव और वेटलैंड को विकसित किए जाने के कराए जाएंगे काम
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। वसंत शुरू होते ही सांडी विहार में बड़ी संख्या में सात समंदर पार कर आने वाले पक्षियों का कलरव सुनाई देने लगता है। पक्षियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग भी पहुंचते हैं। रामसर समझौता में शामिल सांडी पक्षी विहार विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए बदला-बदला नजर आएगा। वेटलैंड को सुरक्षित और संरक्षित किए जाने के साथ ही पक्षी विहार में पानी, सुरक्षा के इंतजाम सहित मशीनों के रखरखाव के भी काम कराए जाएंगे।
शासन ने काम कराने के लिए नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में सरकार ने 11.46 करोड़ से अधिक रुपये की वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। वहीं काम कराने के लिए 44 लाख 80 हजार रुपये भी वन विभाग को दे दिए हैं। सांडी पक्षी विहार का कुल क्षेत्रफल 308 हेक्टेयर है, इसमें करीब 215 हेक्टेयर क्षेत्रफल में झील का फैलाव है।
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रामसर समझौता वेटलैंड को संरक्षित किए जाने के लिए चयनित देश के 37 स्थानों में सांडी पक्षी विहार भी शामिल हैं। विश्वपटल पर सांडी पक्षी विहार को पहचान दिलाने के प्रयासों को साकार रूप देने के साथ ही सरकार ने जिले के लोगों के लिए खुशखबरी दी है। प्रदेश शासन की विशेष सचिव नीरजा सक्सेना ने भारत सरकार की नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में सांडी पक्षी विहार में काम कराने के लिए 11 करोड़ 46 लाख रुपये की स्वीकृति दिए जाने की पत्र के माध्यम से जानकारी दी है। इन रुपयों से इकोसिस्टम को दुरुस्त कराने के साथ ही मशीनों का अनुरक्षण प्रारंभिक चरण में कराया जाएगा।
सांडी पक्षी विहार इसलिए है खास :
सांडी सड़क पर शहर मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर पक्षी विहार की साल 1990 में स्थापना हुई थी। खास बात यह है कि गुलाबी सर्दियों के शुरू होते ही सांडी पक्षी विहार में देसी समेत विदेशी प्रजातियों के पक्षियों का कलरव शुरू हो जाता है। इसमें सात समंदर पार से आने वाली करीब 700 अधिक प्रजातियों के पक्षी शामिल रहते हैं। वैसे तो विश्व में करीब 10,000 से अधिक और भारत में करीब 1,300 प्रजातियां पाई जाती हैं। सात समंदर पार कर सांडी पक्षी विहार में स्वैम्पहेन व सनबर्ड भी शामिल हैं। विशेष प्रजातियों के पक्षियों के साथ ही साइबेरियन, पर्पल, स्लेटी अंजन, रेड बिटर्न, रंगीन जंगिल, नकटा, छोटी सिलही, सींकपर, तिदारी बत्तख, छोटा लाल, सिर पोचर्ड, अबलक पोचर्ड, दबक, गिर्री, पिहो, गाजपांव व सुरमाबाटन प्रमुख रूप पक्षी विहार में आमद दर्ज कराती हैं। वहीं गुजराती बत्तख, छोटी सिलही, कबूतर, तीतर, मैना, लेखर ब्लैक, ईगल, कोयल, डव, सारस, बया और मोर भी सर्दियों में यहां आने वाले पर्यटकों को लुभाते हैं।
फोटो 25: अनुनय झा। स्रोत : आर्काइव
अभी तक लिफ्ट कैनाल से पानी की कराई जाती है व्यवस्था :
करीब तीन किलोमीटर के दायरे फैली सांडी पक्षी विहार की झील में साल भर पानी उपलब्ध कराने के लिए गर्रा से लिफ्ट कैनाल बनवाई गई है। गर्रा से पानी को लिफ्ट कर झील तक लाया जाता है। ताकि जलीय जीवों के लिए पानी उपलब्ध हो सके और भूमि दलदली बनी रहे। वहीं शासन ने सांडी पक्षी विहार को वन डिस्ट्रिक्ट-वन डेस्टिनेशन (ओडीओडी) में भी चयनित किया है।
वेटलैंड को संरक्षित किए जाने के साथ ही पक्षी विहार का बदलेगा लुक
सांडी पक्षी विहार रामसर समझौता में शामिल है, भारत सरकार ने नेशनल प्लान फॉर कंजर्वेशन ऑफ एक्वेटिक इकोसिस्टम योजना में काम कराए जाने की स्वीकृति दी है। जो जिले के लोगों और वेटलैंड को संरक्षित किए जाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इससे सांडी पक्षी विहार को नया लुक दिए जाने के साथ ही वहां पर झील में पानी उपलब्ध हो सकेगा। पक्षियों के साथ ही जलजीवों को प्राकृतवास बनाने के लिए बेहतर माहौल मिल सकेगा। इससे पक्षी विहार में विदेशी पक्षियों के आने की संख्या और प्रजातियों में भी बढ़ोतरी होगी। जल्द ही वन विभाग के अधिकारियों से कार्ययोजना मुताबिक, काम कराने की प्रक्रिया भी शुरू कराई जाएगी।
