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Hardoi News: गोसवाडोंगा पंचायत भवन की न कराई मरम्मत और न लगवाया खड़ंजा
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हरदोई। विकास कार्यों और भुगतान में गड़बड़ी, अभिलेख न दिखाए जाने को डीएम अनुनय झा ने गंभीरता से लिया है। जांच समिति की रिपोर्ट पर ब्लॉक संडीला की ग्राम पंचायत गोसवाडोंगा के तत्कालीन प्रधान, पंचायत सचिव और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता को नोटिस दिया। सात दिन के अंदर साक्ष्य सहित जवाब मांगा।
जिलाधिकारी ने यह नोटिस प्रधान अंकित कुमार की तरफ से दिए गए शिकायती पत्र पर जारी किया है। बताया कि साल 2015-2020 तक पंचायत की तरफ से कराए गए काम और खर्च की जांच बीएसए और नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता से कराई गई। तत्कालीन प्रधान अशोक कुमार त्रिपाठी, पंचायत सचिव रामकिशोर और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता से जवाब तलब किया गया है।
जांच समिति ने रिपोर्ट दी है कि तत्कालीन प्रधान व पंचायत सचिव हैंडपंप रिबोर, गांव में बनवाए गए मार्ग और नाली के न तो अभिलेख दिखा सके और न ही काम दिखा पाए। नंद किशोर के मकान से नदीम के मकान और सुखदेव के मकान से बेचे लाल के मकान तक खड़ंजा ही नहीं लगवाया गया। काम और भुगतान के अभिलेख के साथ ही मेजरमेंट बुक भी जांच के समय नहीं दिखाई गई। इससे काम की लागत, भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
बताया कि जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर गांव में चबूतरा बनवाए जाने पर 1,92,503 रुपये खर्च में प्रदर्शित हो रहे हैं लेकिन एमबी आदि नहीं दी जा सकी हैं। साल 2026-17 से 2019-20 तक राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में 1,50,000 रुपये पंचायत घर की मरम्मत पर ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रदर्शित हो रहे हैं लेकिन पंचायत भवन की मरम्मत नहीं कराई गई है।
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जिलाधिकारी ने यह नोटिस प्रधान अंकित कुमार की तरफ से दिए गए शिकायती पत्र पर जारी किया है। बताया कि साल 2015-2020 तक पंचायत की तरफ से कराए गए काम और खर्च की जांच बीएसए और नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता से कराई गई। तत्कालीन प्रधान अशोक कुमार त्रिपाठी, पंचायत सचिव रामकिशोर और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता से जवाब तलब किया गया है।
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जांच समिति ने रिपोर्ट दी है कि तत्कालीन प्रधान व पंचायत सचिव हैंडपंप रिबोर, गांव में बनवाए गए मार्ग और नाली के न तो अभिलेख दिखा सके और न ही काम दिखा पाए। नंद किशोर के मकान से नदीम के मकान और सुखदेव के मकान से बेचे लाल के मकान तक खड़ंजा ही नहीं लगवाया गया। काम और भुगतान के अभिलेख के साथ ही मेजरमेंट बुक भी जांच के समय नहीं दिखाई गई। इससे काम की लागत, भुगतान की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
बताया कि जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर गांव में चबूतरा बनवाए जाने पर 1,92,503 रुपये खर्च में प्रदर्शित हो रहे हैं लेकिन एमबी आदि नहीं दी जा सकी हैं। साल 2026-17 से 2019-20 तक राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग की मद में 1,50,000 रुपये पंचायत घर की मरम्मत पर ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर प्रदर्शित हो रहे हैं लेकिन पंचायत भवन की मरम्मत नहीं कराई गई है।