{"_id":"69c9617633e99b074408d493","slug":"green-fodder-will-be-sown-in-381-hectares-with-rs-8393-lakh-hardoi-news-c-213-1-hra1001-147185-2026-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: 83.93 लाख से बोया जाएगा 381 हेक्टेयर में हरा चारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: 83.93 लाख से बोया जाएगा 381 हेक्टेयर में हरा चारा
विज्ञापन
फोटो 19: नसीरपुर आश्रयस्थल में बरसीम की कटिंग करते श्रमिक। स्रोत : विभाग
विज्ञापन
हरदोई। पशु आश्रयस्थलों में संरक्षित निराश्रित मवेशियों के भरण-पोषण में अब चारे की दिक्कत नहीं आएगी। पशुपालन विभाग ने 381.50 हेक्टेयर भूमि पर चारा बुआई के लिए 83,93,000 रुपये का आवंटन ब्लॉकों को किया है। शासन ने चारा बुआई के लिए प्रदेश में सबसे अधिक रुपये दिए हैं।
मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में से एक निराश्रित मवेशियों के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए पशुपालन विभाग ने गंभीरता से काम शुरू किया है। संचालित पशु आश्रयस्थल और वृहद गो-संरक्षण केंद्र से जुड़ी पशुचर की भूमि को कब्जामुक्त कराने के साथ ही चारा तैयार कराया जा रहा है। अब शासन ने साल में तीन बार चारा बुआई के लिए रुपये भी दिए जाने की रणनीति को अमली जामा पहना दिया है। चालू वित्तीय वर्ष से ही पशु आश्रयस्थल और वृहद गो-संरक्षण केंद्रों पर पशुचर की भूमि पर चारा बुआई कराई जाएगी। इसके लिए पशुपालन विभाग की तरफ से रुपये भी दिए गए हैं।
बताया कि जिले के 234 पशु आश्रयस्थलों में 381.50 हेक्टेयर भूमि पर चारा बुआई पर 83,93,000 रुपये खर्च किए जाएंगे। पशु आश्रयस्थल और पशुचर की भूमि की मात्रा के अनुसार ब्लॉकों को रुपये आवंटित किए गए हैं।
-- -
मवेशियों को संरक्षित, भरण-पोषण और निगरानी में प्रशासन के सहयोग से जनपद प्रदेश में पहले पायदान पर है। शासन ने इसी के दृष्टिगत साल में तीन बार चारा बुआई के लिए रुपये दिए जाने का प्रावधान किया है। चालू वित्तीय वर्ष में जायद फसल में चारा बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 22,000 रुपये के हिसाब से रुपये ब्लॉकों को दिए जा चुके हैं। वहीं, खरीफ फसल में चारा बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 12,600 रुपये और रबी फसल में 21,700 रुपये के हिसाब से रुपये दिए जाने का प्रावधान किया है। -डॉ. एके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
Trending Videos
मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में से एक निराश्रित मवेशियों के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए पशुपालन विभाग ने गंभीरता से काम शुरू किया है। संचालित पशु आश्रयस्थल और वृहद गो-संरक्षण केंद्र से जुड़ी पशुचर की भूमि को कब्जामुक्त कराने के साथ ही चारा तैयार कराया जा रहा है। अब शासन ने साल में तीन बार चारा बुआई के लिए रुपये भी दिए जाने की रणनीति को अमली जामा पहना दिया है। चालू वित्तीय वर्ष से ही पशु आश्रयस्थल और वृहद गो-संरक्षण केंद्रों पर पशुचर की भूमि पर चारा बुआई कराई जाएगी। इसके लिए पशुपालन विभाग की तरफ से रुपये भी दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बताया कि जिले के 234 पशु आश्रयस्थलों में 381.50 हेक्टेयर भूमि पर चारा बुआई पर 83,93,000 रुपये खर्च किए जाएंगे। पशु आश्रयस्थल और पशुचर की भूमि की मात्रा के अनुसार ब्लॉकों को रुपये आवंटित किए गए हैं।
मवेशियों को संरक्षित, भरण-पोषण और निगरानी में प्रशासन के सहयोग से जनपद प्रदेश में पहले पायदान पर है। शासन ने इसी के दृष्टिगत साल में तीन बार चारा बुआई के लिए रुपये दिए जाने का प्रावधान किया है। चालू वित्तीय वर्ष में जायद फसल में चारा बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 22,000 रुपये के हिसाब से रुपये ब्लॉकों को दिए जा चुके हैं। वहीं, खरीफ फसल में चारा बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 12,600 रुपये और रबी फसल में 21,700 रुपये के हिसाब से रुपये दिए जाने का प्रावधान किया है। -डॉ. एके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी