पाली। नगर प्राचीनतम और पौराणिक-आध्यात्मिक मां पंतवारी देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नवरात्रि में तो यहां पर विशेष आयोजन होते हैं, वैसे वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और धार्मिक आयोजन होते हैं।
मां पंतवारी देवी के दर्शन कर श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करते हैं, मान्यता है कि मनोकामना पूरी भी होती है। वैसे तो हर दिन माता के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन नवरात्र पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाती है। मान्यता है कि यह मंदिर 10वीं सदी से जुड़ा है। बताया जाता है कि उस समय कन्नौज के राजा अजयपाल हुआ करते थे। उनकी शादी पाली नगर से सटे सांडीखेड़ा गांव निवासी मंगला देवी से हुई थी।
शादी के बाद उनके एक पुत्र अभय पाल हुआ। पुत्र अभयपाल ने पिता अजयपाल से बगावत कर दी थी। इसके बाद वह अपनी मां मंगला देवी के साथ ननिहाल सांडीखेड़ा में रहने लगे थे। मां मंगला देवी का लोगों के प्रति अपार स्नेह था। जनहित के कार्यों के कारण लोग उन्हें देवी का स्थान देकर पूजने लगे थे। मंगला देवी के स्वर्गवास के बाद उनका स्मारक स्थल बनाया गया, जो अभी भी है। वहीं आस्था और विश्वास के साथ मां पंतवारी देवी मंदिर की स्थापना हुई। मंदिर की कमेटी है, लेकिन नगर निवासी अनुज माली, माता-पिता व परिवार के सदस्यों के साथ मंदिर की साफ-सफाई से लेकर रखरखाव, व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पूजन-अर्चन की जिम्मेदारी दीपू मिश्रा निभा रहे हैं।

फोटो 41: मंदिर में स्थापित मां पंतवारी देवी की मूर्ति। संवाद

फोटो 41: मंदिर में स्थापित मां पंतवारी देवी की मूर्ति। संवाद