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Hardoi News: स्कंदमाता का पूजन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की
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फोटो-05- सिद्धबली हनुमान मंदिर में दुर्गा जी का पूजन करते आचार्य। संवाद
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हरदोई। चैत्र माह में होने वाले नवरात्र के पांचवें दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
नवरात्र पर श्रद्धालुओं ने सुबह से ही घरों और मंदिरों में पूजन-अर्चन किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिरों में रही। श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता को फल-फूल, नारियल, नैवेद्य आदि अर्पित कर भोग-प्रसाद लगाया। श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती पाठ किया और आरती कर माता से सुख-शांति का आशीर्वाद लिया। घरों में महिलाओं ने श्रद्धा, आस्था और विश्वास के साथ स्कंदमाता की पूजा की।
आचार्य सनत्कुमार मिश्र और शास्त्री उमाकांत अवस्थी के मुताबिक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंदमाता देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय की माता हैं। स्कंदमाता की उपासना से श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बताया कि भगवान कार्तिकेय बालरूप में माता की गोद में बैठे हैं। इसीलिए माता को स्कंदमाता और कमल पुष्प पर विराजित होने के कारण पद्मासना भी कहा जाता है। वहीं, श्रद्धालुओं ने शहर सहित कस्बा और गांवों के मंदिरों में माता का विधि-विधान से पूजन किया।
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नवरात्र पर श्रद्धालुओं ने सुबह से ही घरों और मंदिरों में पूजन-अर्चन किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिरों में रही। श्रद्धालुओं ने स्कंदमाता को फल-फूल, नारियल, नैवेद्य आदि अर्पित कर भोग-प्रसाद लगाया। श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती पाठ किया और आरती कर माता से सुख-शांति का आशीर्वाद लिया। घरों में महिलाओं ने श्रद्धा, आस्था और विश्वास के साथ स्कंदमाता की पूजा की।
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आचार्य सनत्कुमार मिश्र और शास्त्री उमाकांत अवस्थी के मुताबिक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्कंदमाता देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय की माता हैं। स्कंदमाता की उपासना से श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बताया कि भगवान कार्तिकेय बालरूप में माता की गोद में बैठे हैं। इसीलिए माता को स्कंदमाता और कमल पुष्प पर विराजित होने के कारण पद्मासना भी कहा जाता है। वहीं, श्रद्धालुओं ने शहर सहित कस्बा और गांवों के मंदिरों में माता का विधि-विधान से पूजन किया।