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Hardoi News: 258 ट्रांजेक्शन रिजेक्ट होने से श्रमिकों की अटकी मजदूरी
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हरदोई। मनरेगा अब अंतिम दिनों में है। मनरेगा के स्थान पर वीबीजी रामजी को इसी वित्तीय वर्ष से संचालित किया जाना है। ऐसे में मनरेगा मद से कराए गए कामों के भुगतान पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जिले में 258 ट्रांजेक्शन रिजेक्ट श्रेणी में चले गए हैं। इससे करीब 6,70,047 रुपये की श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान अटक गया है।
मनरेगा मद के कामों पर जॉब कार्डधारकों को रोजगार दिए जाने की अनिवार्यता है। जॉब कार्डधारकों को काम दिए जाने के लिए ई-मस्टर रोल जारी किए जाते हैं और काम पर आने वाले श्रमिकों की हाजिरी दर्ज की जाती है। एक ई-मस्टर रोल के पूरा होते ही ब्लॉक स्तर से भुगतान की प्रक्रिया शुरू होती है। ई-मस्टर रोल के पूरा होने के 15 दिन के अंदर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करा ली जाती है। इस प्रक्रिया में त्रुटि होने और श्रमिक का वितरण आदि गड़बड़ होने पर फंड ट्रांसफर ऑर्डर को मुख्यालय स्तर से रिजेक्ट श्रेणी में डाल दिया जाता है।
इससे भुगतान फंस जाता है और भुगतान में देरी होती है। जिले में पिछले वित्तीय वर्ष के करीब 258 ट्रांजेक्शन रिजेक्ट श्रेणी में चले गए हैं। इन पर करीब 6,70,047 रुपये की मजदूरी का भुगतान होना है। रिजेक्ट श्रेणी में जाने से संबंधित श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है। रिजेक्ट श्रेणी के ट्रांजेक्शन को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी कार्यक्रम अधिकारियों को सौंपी गई है।
ई-मस्टर रोल पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया के दौरान मामूली सी भी गड़बड़ी या त्रुटि होने पर ऑनलाइन प्रक्रिया में ट्रांजेक्शन को रिजेक्ट कर दिया जाता है। ऐसे ट्रांजेक्शन को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी कार्यक्रम अधिकारियों को सौंपी गई है। कहा गया कि रिजेक्ट ट्रांजेक्शन को तत्काल प्रभाव से दुरुस्त करा लिया जाए ताकि राज्य मुख्यालय से भुगतान होने पर संबंधित श्रमिकों को मजदूरी को प्राप्त हो सके। -रवि प्रकाश सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार
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मनरेगा मद के कामों पर जॉब कार्डधारकों को रोजगार दिए जाने की अनिवार्यता है। जॉब कार्डधारकों को काम दिए जाने के लिए ई-मस्टर रोल जारी किए जाते हैं और काम पर आने वाले श्रमिकों की हाजिरी दर्ज की जाती है। एक ई-मस्टर रोल के पूरा होते ही ब्लॉक स्तर से भुगतान की प्रक्रिया शुरू होती है। ई-मस्टर रोल के पूरा होने के 15 दिन के अंदर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करा ली जाती है। इस प्रक्रिया में त्रुटि होने और श्रमिक का वितरण आदि गड़बड़ होने पर फंड ट्रांसफर ऑर्डर को मुख्यालय स्तर से रिजेक्ट श्रेणी में डाल दिया जाता है।
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इससे भुगतान फंस जाता है और भुगतान में देरी होती है। जिले में पिछले वित्तीय वर्ष के करीब 258 ट्रांजेक्शन रिजेक्ट श्रेणी में चले गए हैं। इन पर करीब 6,70,047 रुपये की मजदूरी का भुगतान होना है। रिजेक्ट श्रेणी में जाने से संबंधित श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है। रिजेक्ट श्रेणी के ट्रांजेक्शन को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी कार्यक्रम अधिकारियों को सौंपी गई है।
ई-मस्टर रोल पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया के दौरान मामूली सी भी गड़बड़ी या त्रुटि होने पर ऑनलाइन प्रक्रिया में ट्रांजेक्शन को रिजेक्ट कर दिया जाता है। ऐसे ट्रांजेक्शन को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी कार्यक्रम अधिकारियों को सौंपी गई है। कहा गया कि रिजेक्ट ट्रांजेक्शन को तत्काल प्रभाव से दुरुस्त करा लिया जाए ताकि राज्य मुख्यालय से भुगतान होने पर संबंधित श्रमिकों को मजदूरी को प्राप्त हो सके। -रवि प्रकाश सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार

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