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Hathras News: बचपन से साथ, अब समाज सेवा में भी हमसफर बनीं दो सहेलियां
Mon, 03 Aug 2026 02:56 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:56 AM IST
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डिंपल वार्ष्णेय और श्वेता वार्ष्णेय। संवाद
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शहर की डिंपल वार्ष्णेय और श्वेता वार्ष्णेय की दोस्ती केवल साथ हंसने का नाम नहीं, बल्कि दूसरों के आंसू पोंछने का माध्यम भी है। उनकी बचपन की निश्छल मित्रता अब समाज सेवा का जरिया बन गई है।
डिंपल बताती हैं कि श्वेता से उनकी अटूट दोस्ती की शुरुआत शहर के आरसी इंटर कॉलेज से हुई थी। स्कूल के दिनों में दोनों सहेलियां साथ-साथ पढ़ाई करती थीं। उच्च शिक्षा के लिए वे अलग-अलग रास्तों पर चली गईं, पर उनके दिलों की दूरी कभी नहीं बढ़ी।
विवाह के बाद किस्मत उन्हें वापस हाथरस ले आई। दोनों का ससुराल एक ही शहर में होने से उनकी वर्षों पुरानी दोस्ती को नई मजबूती मिली। इसके बाद उन्होंने केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मिलकर समाज के लिए कुछ बेहतर करने का संकल्प लिया।
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सात वर्षों से निरंतर जारी है जनसेवा
पिछले सात वर्षों से डिंपल और श्वेता असहाय बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए नियमित रूप से कॉपी, किताबें, बैग व अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराती हैं। निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह में हर संभव आर्थिक व सहयोग देकर वे माता-पिता का बोझ हल्का करती हैं।
एक के बिना अधूरी मान ली जाती हैं दूसरी
डिंपल बताती हैं कि दोनों की दोस्ती इतनी गहरी है कि शहर के सामाजिक आयोजनों और कार्यक्रमों में यह चर्चा का विषय बनी रहती है। आलम यह है कि यदि किसी कार्यक्रम में इनमें से कोई एक अकेली पहुंच जाए, तो उपस्थित लोग तुरंत पूछ बैठते हैं आपकी सहेली कहां हैं।
समाज के लिए एक सशक्त संदेश
फ्रेंडशिप डे के अवसर पर श्वेता और डिंपल की यह खूबसूरत जोड़ी समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची मित्रता वक्त, हालात और शादी के बाद की जिम्मेदारियों से कमजोर नहीं होती। अगर नीयत में विश्वास, सहयोग और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो दोस्ती केवल दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की बहुत बड़ी ताकत बन सकती है।
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डिंपल बताती हैं कि श्वेता से उनकी अटूट दोस्ती की शुरुआत शहर के आरसी इंटर कॉलेज से हुई थी। स्कूल के दिनों में दोनों सहेलियां साथ-साथ पढ़ाई करती थीं। उच्च शिक्षा के लिए वे अलग-अलग रास्तों पर चली गईं, पर उनके दिलों की दूरी कभी नहीं बढ़ी।
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विवाह के बाद किस्मत उन्हें वापस हाथरस ले आई। दोनों का ससुराल एक ही शहर में होने से उनकी वर्षों पुरानी दोस्ती को नई मजबूती मिली। इसके बाद उन्होंने केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मिलकर समाज के लिए कुछ बेहतर करने का संकल्प लिया।
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सात वर्षों से निरंतर जारी है जनसेवा
पिछले सात वर्षों से डिंपल और श्वेता असहाय बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए नियमित रूप से कॉपी, किताबें, बैग व अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराती हैं। निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह में हर संभव आर्थिक व सहयोग देकर वे माता-पिता का बोझ हल्का करती हैं।
एक के बिना अधूरी मान ली जाती हैं दूसरी
डिंपल बताती हैं कि दोनों की दोस्ती इतनी गहरी है कि शहर के सामाजिक आयोजनों और कार्यक्रमों में यह चर्चा का विषय बनी रहती है। आलम यह है कि यदि किसी कार्यक्रम में इनमें से कोई एक अकेली पहुंच जाए, तो उपस्थित लोग तुरंत पूछ बैठते हैं आपकी सहेली कहां हैं।
समाज के लिए एक सशक्त संदेश
फ्रेंडशिप डे के अवसर पर श्वेता और डिंपल की यह खूबसूरत जोड़ी समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची मित्रता वक्त, हालात और शादी के बाद की जिम्मेदारियों से कमजोर नहीं होती। अगर नीयत में विश्वास, सहयोग और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो दोस्ती केवल दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की बहुत बड़ी ताकत बन सकती है।