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Hathras: सिक्कों-डाक टिकटों के संग्रह में छिपीं गौरवशाली गाथाएं, कारोबारी ने संजो रखी हैं दुर्लभ वस्तुएं
Sun, 16 Aug 2026 04:42 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sun, 16 Aug 2026 04:42 PM IST
सार
संग्रह में स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकटयुक्त विशेष लिफाफा सुरक्षित है। डेढ़ आने के इस लिफाफे पर अशोक की लाट, जय हिंद और 15 अगस्त 1947 अंकित है। संग्रह में आजाद हिंद सरकार के टिकट आदि शामिल हैं।
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सहेजकर रखे गए सिक्के व नोट, डाक टिकट संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय
- फोटो : संग्रहकर्ता
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विस्तार
हाथरस शहर के डाक टिकट व सिक्का संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय सराफ और जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मनमोहन शर्मा ने वर्षों की मेहनत से दुर्लभ सिक्के, मुद्राएं और डाक टिकटें संजोई हैं। ये संग्रह युवा पीढ़ी को देशप्रेम और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों से परिचित करा रहे हैं।
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वरिष्ठ अधिवक्ता मनमोहन शर्मा के भारतीय स्वतंत्रता संग्रह में 15 अगस्त 1947 की आजाद हिंद स्मारक मुद्रा विशेष आकर्षण है। इसमें 1972 में स्वतंत्रता की 25वीं वर्षगांठ पर जारी 50 पैसे और 10 रुपये के स्मारक सिक्कों के साथ 1997 में स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ पर जारी विशेष सिक्के भी हैं। 15-08-47 के विशेष सीरियल नंबर वाले 10 से 500 रुपये तक के दुर्लभ नोट संग्रह की खासियत हैं। प्राचीन हुंडियां, आना, दमड़ी और राजा-रजवाड़ों के दौर के सिक्के भी इसमें शामिल हैं।
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वहीं शैलेंद्र वार्ष्णेय के संग्रह में स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकटयुक्त विशेष लिफाफा सुरक्षित है। डेढ़ आने के इस लिफाफे पर अशोक की लाट, जय हिंद और 15 अगस्त 1947 अंकित है। संग्रह में आजाद हिंद सरकार के टिकट, 1857 के क्रांतिकारियों, जलियांवाला बाग के शहीदों, तिरंगे, राजा महेंद्र प्रताप सिंह, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद सहित अनेक राष्ट्रनायकों पर जारी टिकट शामिल हैं।
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दोनों संग्रहकर्ता मानते हैं कि ये धरोहरें नई पीढ़ी को देश के स्वर्णिम इतिहास से जोड़ने का माध्यम हैं। हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप सिंह और राजा दयाराम के शौर्य को याद करते हुए उन्होंने कहा कि किला दाऊजी मंदिर पर आज भी तोप के गोलों के निशान हाथरस के संघर्ष और साहस की गवाही देते हैं।