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Hathras News: डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर रहेगा टीबी मरीजों का डाटा
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 29 Apr 2026 02:44 AM IST
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जिला क्षय रोग केंद्र। संवाद
- फोटो : Samvad
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देश को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार अब तकनीक का सहारा ले रही हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत अब टीबी मरीजों का पूरा डाटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल से निक्षय पोर्टल को मरीजों की आभा आईडी से जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में वर्तमान में लगभग 4500 सौ सक्रिय टीबी मरीज हैं, जिनका उपचार चल रहा है। पिछले वर्ष चले टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग को 6124 टीबी मरीज मिले थे, जिनमें आधे से अधिक ठीक हो चुके हैं। इस साल जनवरी से अब तक 13 सौ मरीज चिह्नित किए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य से 108 फीसदी हैं।
अभी भी अभियान चल रहा है। जिला क्षय रोग केंद्र द्वारा चलाए जा रहे विशेष 100 दिवसीय अभियान के तहत अप्रैल के पहले 15 दिनों में 11 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। इन सभी नए मरीजों का पंजीकरण भी सीधे डिजिटल पोर्टल पर किया जा रहा है। वर्तमान में सासनी, सादाबाद व सहपऊ में कैंप लगाए जा रहे हैं। रोजाना 100 से 150 लोगों की स्क्रीनिंग हो रही है और 45 से 50 जांचें हो रही हैं।
लिंक होने पर ही मिलेगी प्रोत्साहन राशि
सरकार द्वारा टीबी मरीजों को बेहतर खान-पान के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत 1000 प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। नई व्यवस्था के अनुसार अब जिन मरीजों का निक्षय डेटा उनकी आभा आईडी से लिंक होगा, उन्हें ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा। इस एकीकरण का मुख्य उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि मरीज का मेडिकल इतिहास किसी भी अस्पताल में एक क्लिक पर उपलब्ध हो।
डिजिटल एकीकरण के लाभ
निक्षय और आभा आईडी के जुड़ाव से मरीजों को अपनी पुरानी रिपोर्ट और पर्चे साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में चिकित्सक मरीज की यूनिक आईडी के जरिये उसका पिछला पूरा रिकॉर्ड देख सकेंगे।
जल्द से जल्द जिले को टीबी मुक्त करने का प्रयास है। इसके अंतर्गत वृहद स्तर पर अभियान चलाया रहा है। मरीजों का रिकॉर्ड एक प्लेटफाॅर्म पर लाने के लिए निक्षय एप पर दर्ज हो रहे मरीजों को आभा से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी स्क्रीनिंग आसान व सुलभ होगी। इससे भविष्य में इलाज की प्रक्रिया सुगम होगी।
-डाॅ. प्रवीन भारती, जिला क्षय रोग अधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में वर्तमान में लगभग 4500 सौ सक्रिय टीबी मरीज हैं, जिनका उपचार चल रहा है। पिछले वर्ष चले टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग को 6124 टीबी मरीज मिले थे, जिनमें आधे से अधिक ठीक हो चुके हैं। इस साल जनवरी से अब तक 13 सौ मरीज चिह्नित किए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य से 108 फीसदी हैं।
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अभी भी अभियान चल रहा है। जिला क्षय रोग केंद्र द्वारा चलाए जा रहे विशेष 100 दिवसीय अभियान के तहत अप्रैल के पहले 15 दिनों में 11 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। इन सभी नए मरीजों का पंजीकरण भी सीधे डिजिटल पोर्टल पर किया जा रहा है। वर्तमान में सासनी, सादाबाद व सहपऊ में कैंप लगाए जा रहे हैं। रोजाना 100 से 150 लोगों की स्क्रीनिंग हो रही है और 45 से 50 जांचें हो रही हैं।
लिंक होने पर ही मिलेगी प्रोत्साहन राशि
सरकार द्वारा टीबी मरीजों को बेहतर खान-पान के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत 1000 प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। नई व्यवस्था के अनुसार अब जिन मरीजों का निक्षय डेटा उनकी आभा आईडी से लिंक होगा, उन्हें ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा। इस एकीकरण का मुख्य उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि मरीज का मेडिकल इतिहास किसी भी अस्पताल में एक क्लिक पर उपलब्ध हो।
डिजिटल एकीकरण के लाभ
निक्षय और आभा आईडी के जुड़ाव से मरीजों को अपनी पुरानी रिपोर्ट और पर्चे साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में चिकित्सक मरीज की यूनिक आईडी के जरिये उसका पिछला पूरा रिकॉर्ड देख सकेंगे।
जल्द से जल्द जिले को टीबी मुक्त करने का प्रयास है। इसके अंतर्गत वृहद स्तर पर अभियान चलाया रहा है। मरीजों का रिकॉर्ड एक प्लेटफाॅर्म पर लाने के लिए निक्षय एप पर दर्ज हो रहे मरीजों को आभा से जोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी स्क्रीनिंग आसान व सुलभ होगी। इससे भविष्य में इलाज की प्रक्रिया सुगम होगी।
-डाॅ. प्रवीन भारती, जिला क्षय रोग अधिकारी
