Hathras: दुष्कर्म पीड़िता ने मेडिकल कॉलेज में बेटे को दिया जन्म, कोर्ट के निर्देश पर तय होगा बच्चे का भविष्य
किशोरी की मां ने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बुआ के बेटे ने जुलाई 2025 के बाद से लेकर कई बार उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया। जनवरी में पेट में दर्द होने पर घर वालों को जानकारी हुई। तब बेटी ने पूरी बात बताई।
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हाथरस जिले के मुरसान क्षेत्र की दुष्कर्म पीड़िता 15 वर्षीय किशोरी ने 29 अप्रैल को जेएन मेडिकल कॉलेज में बेटे को जन्म दिया। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं। दोनों चिकित्सीय स्टाफ निगरानी में अलग-अलग उपचार पा रहे हैं। बच्चे को एनआईसीयू में रखा गया है। बच्चे के पिता के रूप में भविष्य में किसका नाम रहेगा, इस पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं । पीड़िता के परिजन और चिकित्सीय स्टाफ से तमाम लोग संपर्क कर रहे हैं।
हाथरस जिले के मुरसान कोतवाली में 23 जनवरी को किशोरी की मां ने दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बुआ के बेटे ने जुलाई 2025 के बाद से लेकर कई बार उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया। जनवरी में पेट में दर्द होने पर घर वालों को जानकारी हुई। तब बेटी ने पूरी बात बताई।
चिकित्सकों की जांच में जानकारी होने पर उनकी बेटी पांच माह की गर्भवती हो चुकी थी। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली किशोरी से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने जांच और आरोपी की गिरफ्तारी आदि की कार्रवाई की। वहीं बेटी के भविष्य की चिंता जताते हुए मां ने गर्भपात कराने के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार ही मामले में कदम उठाया जाएगा। जो निर्देश मिलेगा, उसी अनुसार बच्चे का भविष्य तय किया जाएगा। मामले में आरोपी जेल में है। डीएनए रिपोर्ट का इंतजार है। उसके आते ही न्यायालय में रिपोर्ट प्रेषित कर ट्रायल पूरा कराया जाएगा।-अमित पाठक, क्षेत्राधिकारी सादाबाद, हाथरस
हाईकोर्ट के निर्देश पर यहां नाबालिग को भर्ती किया गया था। सुरक्षित प्रसव कराया गया है। जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं। जिला विधिक प्राधिकरण सचिव को भी सूचना भेज दी गई है। वहां से निर्देश मिलने तक दोनों यहीं रहेंगे।-प्रो.अंजुम परवेज, प्राचार्य, जेएन मेडिकल कॉलेज
हाईकोर्ट के निर्देश पर जेएन मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ उपचार
हाईकोर्ट ने फरवरी माह में सीएमओ हाथरस को मेडिकल बोर्ड गठित कर गर्भपात कराने के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। सीएमओ स्तर पर मामले में अनदेखी हुई जिससे गर्भपात का समय निकल गया। इस पर हाईकोर्ट के निर्देश पर मार्च माह में नाबालिग गर्भवती को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, तब से यहां उसका उपचार चल रहा है। हाईकोर्ट के निर्देश पर नाबालिग के उपचार, प्रसव व पैदा होने वाले बच्चे की देखरेख आदि अगले आदेश तक मेडिकल कॉलेज में होगी और उसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।बुधवार की सुबह करीब 11 बजे प्रसव हुआ।
मेडिकल कॉलेज स्टाफ के अनुसार बच्चे का वजन 2 किलो 700 ग्राम है। पूरी जानकारी हाईकोर्ट को दी जाएगी। हाईकोर्ट का आदेश मिलने तक बच्चा मेडिकल कॉलेज में रहेगा। मेडिकल कॉलेज में मौजूद नाबालिग की मां से बातचीत का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने इतना ही कहा कि परिवार पहले से बच्चे को अपनाने को तैयार नहीं है। दुष्कर्म पीड़िता के अधिवक्ता मनमोहन शर्मा ने कहा कि वह पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयासरत हैं।
