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Hathras News: गांवों के कुत्तों की होगी नसबंदी, श्वान गृह बनाए जाएंगे
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शहर से गांवों तक कुत्तों का खौफ तेजी से बढ़ रहा है। इन पर लगाम लगाने की कवायद तेज हो गई है। ग्रामीण इलाकों में ऐसे कुत्तों को चिह्नित कर उनकी नसबंदी कराई जाएगी। आवश्यकतानुसार उन्हें श्वान गृह पहुंचाया जाएगा। यह श्वान गृह आबादी से कुछ दूर बनाए जाएंगे। ब्लॉक स्तरीय अधिकारी इन कुत्तों को चिह्नित कर उन्हें नसबंदी केंद्र और श्वान गृह तक पहुंचाएंगे। इसके लिए कैटल केचर वाहन खरीदे जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी पंचायत राज विभाग को दी गई है। इसके लिए एक जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जारी शासनादेश के आधार पर संबंधित अधिकारियों को उक्त निर्देश दिए गए हैं।
समिति का हुआ गठन
ग्रामीण इलाकों में कुत्तों पर नियंत्रण के लिए एक समिति का गठन किया गया है। डीएम की अध्यक्षता में जिला ग्रामीण क्षेत्र श्वान प्रबंधन समिति बनाई गई है। इसमें सीडीओ उपाध्यक्ष व डीपीआरओ सदस्य सचिव हैं। इसमें पशुपालन, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। खंड विकास अधिकारी अपने ब्लॉक के नोडल अफसर होंगे, जो कि निर्धारित कार्यों का क्रियान्वयन कराएंगे।
इस तरह करेंगे कुत्तों पर नियंत्रण
क्षेत्र व ग्राम पंचायत स्तर पर कुत्तों को चिह्नित किया जाएगा। इनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराई जाएगी। इन्हें ग्रामीण रिहायशी इलाकों से हटाने के लिए क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत की निधि से श्वान गृह बनाए जाएंगे। इसके डिजाइन और बजट का निर्धारण गठित समिति द्वारा किया जाएगा। यह श्वान गृह, शिक्षण संस्थानों या सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से दूर बनाए जाएंगे। कुत्तों को श्वान गृह व नसबंदी के लिए पशु चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए कैटल कैचर वाहन खरीदे जाएंगे।
पंचायतों की जिम्मेदारी तय
क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर कुत्तों को चिह्नित किया जाएगा। इनको पकड़ने और नसबंदी केंद्रों तथा श्वान गृह तक ले जाने की जिम्मेदारी क्षेत्र पंचायतों की होगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी प्रक्रिया में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 का उल्लंघन न होने पाए।
एक साल में 44 हजार एआरवी लगाए
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बीते एक साल में जिला अस्पताल में कुल 44,684 एंटी रेबीज वैक्सीन लगाए गए। इनमें से 550 मामले इतने गंभीर थे कि मरीजों के घावों पर एंटी रेबीज सीरम लगाना पड़ा, क्योंकि कुत्ते इनका मांस नोचकर ले गए थे। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन औसतन 30 से 40 नए मामले पहुंच रहे हैं। यही स्थिति जिले के सभी सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की है। ग्रामीण इलाकों में रोजाना 40 से 50 मामले सामने आ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस पर नियंत्रण लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस संबंध में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। संबंधित विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर काम किया जा रहा है।
-राकेश बाबू, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी।
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समिति का हुआ गठन
ग्रामीण इलाकों में कुत्तों पर नियंत्रण के लिए एक समिति का गठन किया गया है। डीएम की अध्यक्षता में जिला ग्रामीण क्षेत्र श्वान प्रबंधन समिति बनाई गई है। इसमें सीडीओ उपाध्यक्ष व डीपीआरओ सदस्य सचिव हैं। इसमें पशुपालन, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। खंड विकास अधिकारी अपने ब्लॉक के नोडल अफसर होंगे, जो कि निर्धारित कार्यों का क्रियान्वयन कराएंगे।
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इस तरह करेंगे कुत्तों पर नियंत्रण
क्षेत्र व ग्राम पंचायत स्तर पर कुत्तों को चिह्नित किया जाएगा। इनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराई जाएगी। इन्हें ग्रामीण रिहायशी इलाकों से हटाने के लिए क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत की निधि से श्वान गृह बनाए जाएंगे। इसके डिजाइन और बजट का निर्धारण गठित समिति द्वारा किया जाएगा। यह श्वान गृह, शिक्षण संस्थानों या सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से दूर बनाए जाएंगे। कुत्तों को श्वान गृह व नसबंदी के लिए पशु चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए कैटल कैचर वाहन खरीदे जाएंगे।
पंचायतों की जिम्मेदारी तय
क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर कुत्तों को चिह्नित किया जाएगा। इनको पकड़ने और नसबंदी केंद्रों तथा श्वान गृह तक ले जाने की जिम्मेदारी क्षेत्र पंचायतों की होगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी प्रक्रिया में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 का उल्लंघन न होने पाए।
एक साल में 44 हजार एआरवी लगाए
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बीते एक साल में जिला अस्पताल में कुल 44,684 एंटी रेबीज वैक्सीन लगाए गए। इनमें से 550 मामले इतने गंभीर थे कि मरीजों के घावों पर एंटी रेबीज सीरम लगाना पड़ा, क्योंकि कुत्ते इनका मांस नोचकर ले गए थे। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन औसतन 30 से 40 नए मामले पहुंच रहे हैं। यही स्थिति जिले के सभी सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की है। ग्रामीण इलाकों में रोजाना 40 से 50 मामले सामने आ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस पर नियंत्रण लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस संबंध में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। संबंधित विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर काम किया जा रहा है।
-राकेश बाबू, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी।
