AMU: मोबाइल फोन की नीली रोशनी से धुंधली पड़ रही जिंदगी, स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा नकारात्मक असर
खराब नींद और अत्यधिक स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करते हैं, जिससे व्यक्ति की कार्यक्षमता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन भी कमजोर पड़ने लगता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रात में सोने से पहले सोशल मीडिया स्क्रॉल करना नींद और सेहत दोनों पर भारी पड़ रहा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के प्राणी विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा 119 पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों पर किए गए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मोबाइल की नीली रोशनी न सिर्फ नींद छीन रही है बल्कि स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल रही है।
अध्ययन में 24-29 वर्ष आयु वर्ग के यूनिवर्सिटी के 119 पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को शामिल किया गया। अध्ययन के दौरान मानसिक स्वास्थ्य का मूल्यांकन डीएएसएस-21 के माध्यम से किया गया, जबकि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हृदय गति, रक्त में ऑक्सीजन का स्तर, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप की जांच की गई।
इनसे मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण आईबीएम एसपीएसएस स्टेटिक्स-25 और जुपिटर नोटबुक जैसे आधुनिक सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर की मदद से किया गया। वैज्ञानिक डॉ. काशिफ अब्बास, डॉ. नजूरा उस्मानी, डॉ. खुशहाल अहमद, डॉ. सफिया हबीब, डॉ. मोहम्मद मुस्तफा, डॉ. मुदस्सिर आलम, डॉ. शहाब कौसर की अध्ययन रिपोर्ट जर्नल स्प्रिंग नेचर में छपी है।
डिजिटल वेलनेस, संतुलित सोशल मीडिया उपयोग, स्क्रीन टाइम नियंत्रण और स्लीप हाइजीन (स्वस्थ नींद की आदतों) को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम शुरू किए जाएं। समय पर जागरूकता और उचित हस्तक्षेप से मानसिक व शारीरिक समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। - प्रो. शाह आलम, अध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग एएमयू
नींद बिगड़ने से बढ़ी मानसिक परेशानियां
अध्ययन में यह बात सामने आई कि जो पीएचडी विद्यार्थी सोने से पहले लंबे समय तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, उनकी नींद का प्राकृतिक चक्र बाधित हो जाता है। परिणामस्वरूप उनमें अवसाद, चिंता और तनाव के स्तर में वृद्धि देखी गई। खराब नींद और अत्यधिक स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करते हैं, जिससे व्यक्ति की कार्यक्षमता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन भी कमजोर पड़ने लगता है।
मानसिक तनाव बढ़ने के साथ शरीर में भी कई बदलाव देखे गए। अवसाद और चिंता से ग्रस्त प्रतिभागियों के रक्त में ऑक्सीजन का स्तर अपेक्षाकृत कम था, जबकि हृदय गति और रक्तचाप अधिक दर्ज किए गए। लगातार खराब नींद और बढ़ता तनाव भविष्य में हृदय रोगों सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिखा असर
मानसिक तनाव बढ़ने के साथ शरीर में भी कई बदलाव देखे गए। अवसाद और चिंता से ग्रस्त प्रतिभागियों के रक्त में ऑक्सीजन का स्तर अपेक्षाकृत कम था, जबकि हृदय गति और रक्तचाप अधिक दर्ज किए गए। लगातार खराब नींद और बढ़ता तनाव भविष्य में हृदय रोगों सहित अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।