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Hathras News: लाड़पुर में धुलेंड़ी पर नहीं खेलते होली, अगले दिन बरसते हैं रंग
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 04 Mar 2026 12:36 AM IST
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कस्बा लाड़पुर का बाजार। संवाद
- फोटो : Samvad
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एक तरफ देश भर में धुलेंड़ी के दिन होली खेलने की तैयारी की जा रही है, लेकिन जिले में लाड़पुर ऐसा गांव है, जहां धुलेंड़ी के दिन होली नहीं खेली जाती। यहां धुलेंड़ी के अगले दिन लोग रंगों में सराबोर होते हैं। गांव की एक महिला के सती होने के कारण पिछले 111 साल से यह परंपरा अनवरत रूप से चल रही है।
बुजुर्ग बताते हैं कि यहां के राजा अचल सिंह के तीसरे पुत्र विजयपाल को सांप ने काट लिया था। बताया जाता है कि उस समय सती होने की प्रथा थी। विजयपाल की पत्नी लाड़ो एक साल बाद जिस स्थान पर पति को सांप ने काटा था, उसी स्थान पर धुलेंड़ी के दिन सती हो गईं। तब से धुलेंड़ी के दिन यहां होली नहीं खेली जाती। इस दिन यहां भगवान केशवराय जी महाराज की शोभायात्रा निकाली जाती है। अगले दिन होली खेलने के बाद सती के समाधि स्थल पर पूजा पाठ के साथ प्रसाद वितरित किया जाता है।
हमारे गांव में सती के मेले का आयोजन किया जाता है। जिस दिन होली का पूजन होता है, उसके अगले दिन होली नहीं खेली जाती। सती की याद में यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है।
-हुकुम सिंह निवासी गांव लाड़पुर।
हमारे गांव में एक महिला सती हुई थी। तब से यह परंपरा चली आ रही है। धुलेंड़ी के दिन कस्बे में भगवान केशवराय जी की शोभायात्रा निकाली जाती है। अगले दिन यहां होली खेली जाती है तो शाम को सती की समाधि पर मेला लगता है।
-भगवान सिंह माहौर निवासी गांव लाड़पुर।
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बुजुर्ग बताते हैं कि यहां के राजा अचल सिंह के तीसरे पुत्र विजयपाल को सांप ने काट लिया था। बताया जाता है कि उस समय सती होने की प्रथा थी। विजयपाल की पत्नी लाड़ो एक साल बाद जिस स्थान पर पति को सांप ने काटा था, उसी स्थान पर धुलेंड़ी के दिन सती हो गईं। तब से धुलेंड़ी के दिन यहां होली नहीं खेली जाती। इस दिन यहां भगवान केशवराय जी महाराज की शोभायात्रा निकाली जाती है। अगले दिन होली खेलने के बाद सती के समाधि स्थल पर पूजा पाठ के साथ प्रसाद वितरित किया जाता है।
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हमारे गांव में सती के मेले का आयोजन किया जाता है। जिस दिन होली का पूजन होता है, उसके अगले दिन होली नहीं खेली जाती। सती की याद में यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है।
-हुकुम सिंह निवासी गांव लाड़पुर।
हमारे गांव में एक महिला सती हुई थी। तब से यह परंपरा चली आ रही है। धुलेंड़ी के दिन कस्बे में भगवान केशवराय जी की शोभायात्रा निकाली जाती है। अगले दिन यहां होली खेली जाती है तो शाम को सती की समाधि पर मेला लगता है।
-भगवान सिंह माहौर निवासी गांव लाड़पुर।
