आत्मनिर्भरता: शहद के कारोबार से जिंदगी में मिठास घोल रहीं महिलाएं, दूर-दूर तक बना रहीं पहचान
महिलाएं गांव में ही मधुमक्खी पालन के जरिये शुद्ध शहद का उत्पादन कर रहीं हैं। शहद की प्रोसेसिंग और पैकिंग का कार्य भी गांव स्तर पर ही किया जा रहा है।
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हाथरस शहर से सटे गांव वाद नगला अठवरिया की महिलाएं स्वयं सहायता समूह के जरिये शहद का कारोबार कर अपनी जिंदगी में तरक्की की मिठास घोल रही हैं। हाथरस ही नहीं, बल्कि आगरा, अलीगढ़ सहित पड़ोसी जनपदों में भी वह इस कारोबार के जरिये अपनी पहचान बना रहीं हैं।
महिलाएं गांव में ही मधुमक्खी पालन के जरिये शुद्ध शहद का उत्पादन कर रहीं हैं। खास बात यह है कि शहद की प्रोसेसिंग और पैकिंग का कार्य भी गांव स्तर पर ही किया जा रहा है, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार के साथ-साथ आर्थिक मजबूती भी मिल रही है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण से उन्हें इस कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
बाजार में शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण शहद की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उनके उत्पाद की आपूर्ति अब आसपास के जिलों तक पहुंच चुकी है। ग्रामीण महिलाओं की यह पहल न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि जिले की पहचान को भी नए स्तर पर ले जा रही है। उपायुक्त स्वत: रोजगार प्रेमनाथ यादव ने बताया कि शहद के काम में महिलाएं काफी मेहनत कर रही हैं, वह मोमबत्ती का भी काम कर रहीं हैं।
काफी समय से मैं इस समूह को चला रही हूं। मैंने पूरे समूह को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी हैं, ताकि संयमित तरीके से माल तैयार किया जा सके और बाजार में इसकी आपूर्ति भी समय पर हो सके।-प्रेमवती यादव, समूह अध्यक्ष।
समूह से जुड़कर हमने अपनी आमदनी तो बढ़ाई ही है, साथ ही यह भी सीखा है कि कारोबार होता कैसे है। सभी लोग मिलकर कैसे काम करते हैं और कैसे मुनाफा कमाते हैं।-रेखा रानी यादव, समूह सदस्य।
शहद के काम से हम लोग काफी खुश हैं। शहद के साथ ही अब हम लोग मोमबत्ती बनाने का भी काम कर रहे हैं। पहले घरेलू काम के बाद समय बर्बाद होता था, अब समय का सदुपयोग हो जाता है।-राजेश्वरी देवी, समूह सदस्य।
