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Hathras News: फिर बाढ़ की आहट..नहीं हुई नदियों की सफाई, मानसून में टूटेगी आफत

Fri, 03 Jul 2026 02:47 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Fri, 03 Jul 2026 02:47 AM IST
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Looming threat of floods again... rivers remain uncleared; monsoon set to unleash havoc.
झाड़ी व जलीय पौधों से अटी ईशन नदी। संवाद - फोटो : Samvad
मानसून की दस्तक के साथ ही सिकंदराराऊ और पुरदिलनगर क्षेत्र के ग्रामीणों को दो साल पुराना वो मंजर याद आ रहा है, जब ईशन नदी ने क्षेत्र के 28 गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए थे। इस बार फिर क्षेत्र से गुजरने वाली बरसाती नदियों, ड्रेनेज व बंबों की सफाई नहीं कराई गई है, जिससे लोगों को बाढ़ का डर सता रहा है।
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याद दिला दें कि सितंबर 2024 में जब ईशन नदी उफनी थी तो सिकंदराराऊ क्षेत्र के गोपालपुर, महाराजपुर, दौखेली, नगला बरी, सिहोरी, नगला मांधाती, बरसामई और गुजरपुर समेत 28 गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे। 3,957 किसानों की धान, बाजरा और गुलाब की खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। प्रशासन को मुआवजे के तौर पर 1.68 करोड़ रुपये बांटने पड़े थे।
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गाद और झाड़ियां फिर रोकेंगी पानी का प्रवाह
पिछले साल ईशन नदी, अरिंद नदी, इटावा, कानपुर स्टंप और नगरिया ड्रेन को मिलाकर 78 किलोमीटर के दायरे में सफाई का दावा किया गया था, जिसके बाद पानी का निकास सुचारू हो पाया था। इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है। नदियों और बंबों के तल में गाद जमा हो चुकी है, जिससे उनकी जल धारण क्षमता बेहद कम हो गई है। पुलियाें के नीचे और नदियों के रास्ते में उगी जलकुंभी व झाड़ियां पानी के प्रवाह को रोकने के लिए तैयार खड़ी हैं। तेज बारिश होते ही पानी किनारों से बाहर फैलकर खेतों और रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लेगा।
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जिले में नदियों की स्थिति


-ईशन नदी : यह नदी सिकंदराराऊ से दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है। बारिश के समय इसमें बाढ़ आ जाती है। जलकुंभी व झाड़ियां और तल की सफाई न होने से थोड़ी बारिश में ही पानी खेतों तक पहुंच जाता है। अन्य मौसमों में यह सूख जाती है, इसलिए सिंचाई की दृष्टि से इसका महत्व कम है। जिले में इसका मार्ग 12.61 किमी लंबा है।



-काली नदी : नदी में वर्षाकाल के अतिरिक्त साल के अन्य दिनों में पानी की मात्रा बहुत कम रहती है। बारिश के समय बाढ़ भी आ जाती है, जिससे इसके आसपास की जमीन पर मौजूद खेतों में खड़ी फसलों को क्षति पहुंचती है। इस नदी पर मुहारा झाल पर एक चेकडैम बनाया है। इससे निकलने वाली नहरों से सिंचाई कार्य होता है। यह नदी जनपद में 11.06 किमी की लंबाई तय करती हुई पूर्वी सीमा को छूती हुई निकल जाती है।



-अरिंद नदी : यह नदी अलीगढ़ जनपद के नानऊ गांव से कुछ दूर दक्षिण में स्थित सुहावली ताल से निकलकर जनपद हाथरस में प्रवेश करती है। इसका प्रवाह मार्ग स्पष्ट रूप से निर्मित है। बारिश के समय मार्ग अवरुद्ध होने के कारण इसमें भी बाढ़ आ जाती है, जिससे खड़ी फसलों को भारी नुकसान होता है। इस नदी का प्रवाह मार्ग 21.34 किमी है।



-सेंगर नदी : यह नदी जनपद अलीगढ़ के हरदुआगंज के पास झील से निकलकर जिले की सीमा में प्रवेश करती है। यह नदी जनपद में 43.65 किमी का सफर तय करती है और कानपुर देहात क्षेत्र में यमुना में मिल जाती है।



-करवन नदी : जनपद की सबसे लंबी नदी है। यह बुलंदशहर से निकलकर अलीगढ़ होते हुए हाथरस में प्रवेश करती है। यह नदी मुरसान व सादाबाद क्षेत्र में जनपद में 49.47 किमी का सफर तय करती है। यह आगरा जाकर यमुना में मिल जाती है।





प्रमुख नहरों की स्थिति



-मांट नहर : मांट नहर मथुरा जनपद से क्षेत्र में प्रवेश करती है, जो जनपद में 18.43 किमी तक विस्तृत है।


-हाथरस नहर : हाथरस नहर अलीगढ़ से क्षेत्र में प्रवेश करती है। इस नहर का प्रवाह क्षेत्र करीब 41.32 किमी का है।


-इटावा नहर : इटावा नहर अलीगढ़ जनपद से क्षेत्र में प्रवेश करती है, जिसका जिले में प्रवाह क्षेत्र 19.4 किमी है। यह नहर जिले से होती हुई एटा में प्रवेश करती है।


-कानपुर नहर : कानपुर नहर अलीगढ़ से हाथरस में प्रवेश करती है। इस नहर का प्रवाह क्षेत्र 18.82 किमी है।



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किसान पूछ रहे सवाल, आपदा का इंतजार क्यों

फोटो-

हर बार पानी सिर से ऊपर गुजर जाने के बाद ही प्रशासन की नींद टूटती है। जब फसलें डूब जाती हैं, रास्ते बंद हो जाते हैं, तब जाकर अधिकारी हाथ-पैर मारते हैं। ईशन नदी गंदगी के कारण फिर उफन रही है। समय से सफाई क्यों नहीं कराई गई, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।



-पुष्पेंद्र यादव, महाराजपुर





फोटो-

पुरानी घटनाओं से अधिकारियों को सबक लेना चाहिए। अधिकारियों को अब कागजी बैठकों से बाहर निकल कर जमीनी स्तर पर देखना चाहिए कि सफाई हुई है या नहीं। इस बार बारिश में फिर से खेतों के जलमग्न होने की आशंका है।


-राकेश कुमार, नगला बरी पट्टी देवरी





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रजबहों की सफाई साल में एक बार होती है। वह अक्तूबर-नवंबर में कराई जाएगी। रोटेशन के अनुसार डीएम की अनुमति के बाद बरसाती नालों की सफाई करा दी गई है। किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी।

-चंद्रमौली द्विवेदी, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड हाथरस
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