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Hathras News: अनदेखी...नियमों को कुचलते वाहन, खतरे में यात्रियों की जान
Tue, 07 Jul 2026 02:44 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 07 Jul 2026 02:44 AM IST
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लोडर वाहन में खतरनाक सफर करते यात्री। संवाद
- फोटो : Samvad
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जिले में लगातार हादसों के बावजूद पुलिस और परिवहन विभाग की नाक के नीचे डग्गामार और ओवरलोडेड वाहन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सहपऊ क्षेत्र में बस की छत पर बैठे युवक की मौत की घटना के बाद जब पड़ताल की गई तो कई वाहनों में यात्री छतों पर बैठकर यात्रा करते नजर आए, जबकि लोडिंग वाहनों में भी यात्री बेतरतीब ढंग से सफर करते दिखे।
हाथरस जंक्शन में मथुरा-बरेली हाईवे पर दोपहर करीब 12.30 बजे राजस्थान के एक लोडर वाहन में 20 से 25 सवारियां बैठी नजर आईं। ये यात्री कछला घाट से राजस्थान लौट रहे थे। रस्सी से डाले को बांधा गया था, जिस पर लोग बाहर पैर लटका कर बैठे थे।
हाथरस जंक्शन से लाड़पुर रोड पर दोपहर करीब एक बजे दो लोडर वाहनों में सवारियां भरी हुई थीं। प्रत्येक में 30 से 35 लोग बैठे हुए थे। जगह न होने पर लोडर के ऊपर पट्टा डालकर सवारियां बैठी हुई थीं।
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इसी तरह दोपहर करीब दो बजे सादाबाद में आगरा हाईवे पर एक लोडर वाहन में बैठे पांच से छह युवक ताश खेल रहे थे और ऊपर सामान लदा हुआ था। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई जारी है। शिकायतों पर भी जांच की जाती है।
जहां रोडवेज बसें नहीं, वहांं हालात सबसे खराब
सबसे बदतर हालात उन मार्गाें पर देखने को मिले, जिन पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होता। इन मार्गों पर चलने वाली प्राइवेट बस, टेंपो व लोडर वाहनों क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठा दिया जाता है। मथुरा-बरेली मार्ग जिले का प्रमुख मार्ग है, लेकिन इस पर पर्याप्त रोडवेज बसों का संचालन नहीं है, जिससे लोग मजबूरी में डग्गामार वाहनों में सफर करते हैं। जगह न होने पर अक्सर यात्रियों को या तो लटका दिया जाता है या फिर कुछ यात्री छत पर बैठ जाते हैं। तेज रफ्तार में दौड़ते इन वाहनों में बैठे यात्रियों के सिर के पास से हाईवोल्टेज बिजली के तार और पेड़ों की टहनियां गुजरती हैं, जिससे अनहोनी की आशंका रहती है।
व्यावसायिक वाहनों में सवारियों का सौदा
नियमों के मुताबिक माल ढोने वाले व्यावसायिक वाहनों (जैसे छोटा हाथी, डीसीएम, ट्रैक्टर-ट्रॉली) में सवारियां बैठाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद हाथरस के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में इन कॉमर्शियल वाहनों का इस्तेमाल खुलेआम सवारी ढोने के लिए किया जा रहा है। हाट-बाजारों और शादियों के सीजन में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जहां एक-एक गाड़ी में 30 से 40 लोग लदे होते हैं।
नहीं होती वाहनों की रोकटोक
जिन रास्तों से ये ओवरलोड और छतों पर सवारियां लादे वाहन गुजरते हैं, वहीं पर पुलिस की चौकियां और चेकिंग प्वाइंट्स भी हैं। इसके बावजूद इन वाहनों को न तो रोका जाता है और न ही इन पर कोई सख्त कार्रवाई होती है।
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हाथरस जंक्शन में मथुरा-बरेली हाईवे पर दोपहर करीब 12.30 बजे राजस्थान के एक लोडर वाहन में 20 से 25 सवारियां बैठी नजर आईं। ये यात्री कछला घाट से राजस्थान लौट रहे थे। रस्सी से डाले को बांधा गया था, जिस पर लोग बाहर पैर लटका कर बैठे थे।
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हाथरस जंक्शन से लाड़पुर रोड पर दोपहर करीब एक बजे दो लोडर वाहनों में सवारियां भरी हुई थीं। प्रत्येक में 30 से 35 लोग बैठे हुए थे। जगह न होने पर लोडर के ऊपर पट्टा डालकर सवारियां बैठी हुई थीं।
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इसी तरह दोपहर करीब दो बजे सादाबाद में आगरा हाईवे पर एक लोडर वाहन में बैठे पांच से छह युवक ताश खेल रहे थे और ऊपर सामान लदा हुआ था। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई जारी है। शिकायतों पर भी जांच की जाती है।
जहां रोडवेज बसें नहीं, वहांं हालात सबसे खराब
सबसे बदतर हालात उन मार्गाें पर देखने को मिले, जिन पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होता। इन मार्गों पर चलने वाली प्राइवेट बस, टेंपो व लोडर वाहनों क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठा दिया जाता है। मथुरा-बरेली मार्ग जिले का प्रमुख मार्ग है, लेकिन इस पर पर्याप्त रोडवेज बसों का संचालन नहीं है, जिससे लोग मजबूरी में डग्गामार वाहनों में सफर करते हैं। जगह न होने पर अक्सर यात्रियों को या तो लटका दिया जाता है या फिर कुछ यात्री छत पर बैठ जाते हैं। तेज रफ्तार में दौड़ते इन वाहनों में बैठे यात्रियों के सिर के पास से हाईवोल्टेज बिजली के तार और पेड़ों की टहनियां गुजरती हैं, जिससे अनहोनी की आशंका रहती है।
व्यावसायिक वाहनों में सवारियों का सौदा
नियमों के मुताबिक माल ढोने वाले व्यावसायिक वाहनों (जैसे छोटा हाथी, डीसीएम, ट्रैक्टर-ट्रॉली) में सवारियां बैठाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद हाथरस के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में इन कॉमर्शियल वाहनों का इस्तेमाल खुलेआम सवारी ढोने के लिए किया जा रहा है। हाट-बाजारों और शादियों के सीजन में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जहां एक-एक गाड़ी में 30 से 40 लोग लदे होते हैं।
नहीं होती वाहनों की रोकटोक
जिन रास्तों से ये ओवरलोड और छतों पर सवारियां लादे वाहन गुजरते हैं, वहीं पर पुलिस की चौकियां और चेकिंग प्वाइंट्स भी हैं। इसके बावजूद इन वाहनों को न तो रोका जाता है और न ही इन पर कोई सख्त कार्रवाई होती है।