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America Iran war: धातुओं की कीमतों में उछाल से गिरा कारोबार, संकट में छोटी इकाइयां

अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 14 May 2026 03:47 PM IST
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सार

हींग की तरह हाथरस की पहचान मेटल कारोबार से भी है। यहां हैंडीक्राफ्ट का प्राचीन काम है। शहर में धातु के आइटम बनाने वाली सैकड़ों छोटी-बड़ी इकाइयां है, जिन पर तीन से चार हजार लोग निर्भर करते हैं। लगभग 25 बड़ी इकाइयां हैं, जो माल तैयार कर गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली व अन्य प्रदेशों तक भेजती हैं।

Rising metal prices led to a drop in business
एक दुकान में रखे मेटल के बर्तन - फोटो : संवाद
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विस्तार

अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे युद्ध से धातु बाजार में तेजी का रुख थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटे में ही एल्युमिनियम की कीमतों में 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे हाथरस के व्यापारियों और निर्माताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।

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कच्चे माल की कमी और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला में बाधाओं के कारण कच्चे माल की डिलीवरी का समय भी बढ़कर दो से ढाई महीने तक पहुंच गया है। नतीजा यह है कि कारोबार पूरी तरह चरमरा गया है। व्यापारियों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 70 फीसद कार्य प्रभावित है।
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हींग की तरह हाथरस की पहचान मेटल कारोबार से भी है। यहां हैंडीक्राफ्ट का प्राचीन काम है। शहर में धातु के आइटम बनाने वाली सैकड़ों छोटी-बड़ी इकाइयां है, जिन पर तीन से चार हजार लोग निर्भर करते हैं। लगभग 25 बड़ी इकाइयां हैं, जो माल तैयार कर गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली व अन्य प्रदेशों तक भेजती हैं। यह कारोबार लघु उद्योग के रूप में घर-घर तक फैला है। छोटी-बड़ी लगभग 130 इकाइयां हैं, जो ऑर्डर पर हाथ से माल बनाती हैं और बड़े सप्लायर्स को देती हैं। साल भर में लगभग 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर है।

वर्तमान में धातु की आपूर्ति के लिए भारतीय बाजार विदेशी स्रोतों पर निर्भर है। कॉपर यूरोप और अमेरिका तथा एल्युमिनियम व जिंक ऑस्ट्रेलिया से आयात होता है, लेकिन वर्तमान में आपूर्ति शृंखला गड़बड़ा गई है। जो माल पहले जल्दी मिल जाता था, अब एक ऑर्डर पूरा होने में दो से ढाई महीने लग रहे हैं। कच्चा माल न आने से पुराने ऑर्डर पूरे नहीं हो पा रहे। माल महंगा होने के कारण ऑर्डर मिलना भी बंद हो गए हैं।-विजय वार्ष्णेय, मेटल कारोबारी

पहले टैरिफ के कारण ऑर्डर रुक गए थे और अब युद्ध के कारण आई तेजी के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। जहां कभी एक साल में एल्युमिनियम पर 10 रुपये बढ़ते थे, वहीं आज एक ही दिन में इतनी बढ़ोतरी हो रही है। छोटे माल के ऑर्डर बल्क में मिलते हैं, जैसे चार से पांच हजार पीस, जबकि फाइन क्वालिटी के ऑर्डर की संख्या कम रहती है। छोटे माल के ऑर्डर लगभग बंद ही हैं। कारोबार 20 फीसदी ही रह गया है।-सौरव वर्मा, मेटल कारोबारी

इन धातुओं के दामों में आया भारी उछाल

  • कॉपर (तांबा) : ढाई महीने पहले जो कॉपर 900 रुपये प्रति किलो था, वह आज 1,285 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है।
  • निकल : निकल की कीमतों में 400 से 500 रुपये की तेजी आई है और वर्तमान में यह 2,400 रुपये प्रति किलो पर मिल रहा है।
  • एल्युमिनियम : इसकी कीमतें 180 रुपये से बढ़कर 350 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। मंगलवार से बुधवार में 10 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं और अभी भी स्थिर नहीं है।


चरमराया कारोबार
यहां फैक्टरी व घरों में एल्युमिनियम के छोटे-बड़े आइटम बनाती हैं। इन प्रोडक्ट्स में निकल व कॉपर का भी प्रयोग होता है। ये धातु विदेशों से आती हैं। इनका प्रयोग हथियार बनाने में भी होता है। यही वजह है कि इनकी कीमतों में भारी उछाल आया है। रास्ते बंद होने के कारण आवक भी नहीं हो पा रही है। पिछले साल मार्च तक मेटल कारोबार करीब 30 करोड़ के करीब था, जो कि अभी तक छह से सात करोड़ तक सिमटकर रह गया है।

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