Hathras School: 1018 स्कूलों में नहीं बच्चों के लिए वाहन, हो रहा अवैध और बिना फिटनेस वाले वाहनों का उपयोग
कई विद्यालयों में बच्चों को ले जाने के लिए बिना फिटनेस वाले वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा बना रहता है। हादसों के बाद इन्हें लेकर अभियान चलाया जाता है, लेकिन अभिभावकों की मजबूरी है कि स्कूल की ओर से सुविधा न होने पर वह मजबूरी में इस तरह के वाहनों में बच्चों को स्कूल भेजते हैं।
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हाथरस जिले के लगभग 1018 अर्द्धसरकारी, मान्यता प्राप्त और निजी विद्यालयों में बच्चों के लिए कोई परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में हजारों अभिभावकों को अपने बच्चों के आवागमन की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ रही है, जबकि कई स्कूलों में मजबूरी में अवैध और असुरक्षित वाहनों का सहारा लिया जा रहा है।
जिले में केवल 113 निजी विद्यालयों के पास ही कुल 503 वैध स्कूली वाहन उपलब्ध हैं। बाकी करीब 1018 विद्यालयों के पास अपने वाहन नहीं हैं, जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। परिवहन सुविधा के अभाव में अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए निजी साधनों या साझा वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार बच्चों को ओवरलोडेड या बिना फिटनेस वाले वाहनों में सफर करना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
जिले में कुल कुल 2368 विद्यालय संचालित हैं। इनमें से बिना वाहन वाले 1235 प्राइमरी और जूनियर विद्यालय, एक केंद्रीय विद्यालय और एक नवोदय विद्यालय को अलग कर दे तो 1018 विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास अपने वाहन नहीं है। इसमें छोटे-छोटे निजी विद्यालयों के साथ मान्यता प्राप्त विद्यालय, अर्द्ध सरकारी विद्यालय शामिल हैं, जहां छात्र-छात्राओं की संख्या काफी अधिक है, लेकिन इनके परिवहन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी विद्यालयों के लिए परिवहन व्यवस्था के न्यूनतम मानक तय किए जाने चाहिए। साथ ही प्रशासन को अवैध वाहनों के संचालन पर सख्ती से रोक लगाकर नियमित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि छात्रों का आवागमन सुरक्षित और व्यवस्थित हो सके।-पवन कुमार, अभिभावक।
जनपद के स्कूलों की स्थिति खराब है, हम अपने बच्चों को खुद स्कूल छोड़कर आते हैं। उसकी वजह है कि स्कूली वाहन की स्कूल से सुविधा नहीं है। जिस तरह के वाहन स्कूलों में लगे हैं, वह खतरे से खाली नहीं है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस पर स्पष्ट नियमावली जारी होनी चाहिए।-विजय कुमार शर्मा, अभिभावक।
अभिभावकों पर बढ़ा बोझ
परिवहन सुविधा न होने के कारण अभिभावकों को बच्चों को स्कूल पहुंचाने और लाने की जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ रही है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जहां निजी साधनों या साझा वाहनों पर निर्भरता बढ़ जाती है।
अवैध वाहनों का चलन
कई विद्यालयों में बच्चों को ले जाने के लिए बिना फिटनेस वाले वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। इससे बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा बना रहता है। हादसों के बाद इन्हें लेकर अभियान चलाया जाता है, लेकिन अभिभावकों की मजबूरी है कि स्कूल की ओर से सुविधा न होने पर वह मजबूरी में इस तरह के वाहनों में बच्चों को स्कूल भेजते हैं।
नामी स्कूलों में भी परिवहन व्यवस्था संतोषजनक नहीं
- संत फ्रांसिस स्कूल (दोनों विंग) के पास एक भी वाहन नहीं
- विनायक इंटरनेशनल स्कूल के पास केवल एक 18 सीटर बस
- राजेंद्र लोहिया विद्या मंदिर में भी छात्र संख्या के अनुपात में बहुत कम वाहन
- सेंट जोंस स्कूल के पास भी सिर्फ एक स्कूली वाहन
- पीबीएएस इंटर कालेज के पास नहीं अपना कोई वाहन
- अक्रूर इंटर कालेज में भी परिवहन की सुविधा नहीं
प्रशासनिक निगरानी की जरूरत
शिक्षा और परिवहन विभाग के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। अभिभावकों की मानें तो सभी विद्यालयों के लिए न्यूनतम परिवहन मानक तय किए जाने चाहिए और अवैध वाहनों के संचालन पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हाथरस जिले में कुल 2368 विद्यालय
- 1235 प्राइमरी व जूनियर विद्यालय
- 44 सीबीएसई के निजी हाईस्कूल व इंटर कॉलेज
- 26 राजकीय विद्यालय
- एक केंद्रीय विद्यालय
- एक नवोदय विद्यालय
123 को नोटिस, 70 ने दिया जवाब : एआरटीओ
एआरटीओ लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि अवैध स्कूली वाहनों पर लगातार कार्रवाई जारी है। वैद्य स्कूली वाहनों की फिटनेस पर भी विशेष नजर है। हाल ही में फिटनेस प्रमाणपत्र लंबित होने के चलते 123 स्कूली वाहनों को नोटिस जारी किए थे। इनमें से 70 वाहन स्वामियों ने जवाब दिये हैं या वाहनों की फिटनेस कराई है। वाहन सुविधा की अनिवार्यता को लेकर एक्ट में किस प्रकार की स्थिति है, इसके बारे में अध्ययन के बाद ही बताया जा सकेगा।

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