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चिंताजनक: हाथरस की मिट्टी हो चुकी बीमार, नाइट्रोजन और पोटाश की भारी कमी, फॉस्फोरस का स्तर सामान्य

Thu, 16 Jul 2026 10:37 AM IST
Chaman Kumar Sharma प्रशांत भारती, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
प्रशांत भारती, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 16 Jul 2026 10:37 AM IST
सार

खेतों में केवल यूरिया और डीएपी का अनियंत्रित और असंतुलित इस्तेमाल करने के कारण मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। इसे ठीक करने के लिए पारंपरिक गोबर की खाद या हरी खाद का प्रयोग करना चाहिए, ताकि मिट्टी में जीवांश और प्राकृतिक तत्व बचाए जा सकें।

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Soil nutrient status in Hathras soil
प्रयोगशाला में मृदा परीक्षण करते वैज्ञानिक - फोटो : संवाद

विस्तार

एक के बाद एक फसल और पैदावार बढ़ाने के लिए बेतहाशा रासायनिक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है। कृषि विभाग की वर्ष 2025-26 की न्यूट्रिएंट इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार हाथरस जिले की मिट्टी बीमार हो चुकी है। सभी सात ब्लॉकों की मिट्टी में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन और पोटाश की भारी कमी पाई गई है। फॉस्फोरस का स्तर मध्यम है।

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कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में केवल यूरिया और डीएपी का अनियंत्रित और असंतुलित इस्तेमाल करने के कारण मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। इसे ठीक करने के लिए पारंपरिक गोबर की खाद या हरी खाद का प्रयोग करना चाहिए, ताकि मिट्टी में जीवांश और प्राकृतिक तत्व बचाए जा सकें।

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किसान एक अतिरिक्त फसल करने के कारण दूसरी फसलों के लिए जरूरी तत्वों को खो देता है। इससे दूसरी फसलों की पैदावार पर प्रभाव पड़ता है। मिट्टी से नाइट्रोजन व पोटाश कम होता जा रहा है।-कैलाश सिंह, अध्यक्ष मृदा परीक्षण प्रयोगशाला।

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  • नाइट्रोजन : नाइट्रोजन का कुल औसत सूचकांक 1.39 दर्ज किया गया है, जो बेहद कम है। ब्लॉक स्तर पर देखें तो सहपऊ में यह सबसे कम 1.31 और सिकंदराराऊ में 1.45 है। हसायन में 1.41, हाथरस में 1.40, मुरसान में 1.32, सादाबाद में 1.43 और सासनी में 1.42 दर्ज हुआ है। सभी ब्लॉक लाल निशान यानी न्यून स्तर पर हैं।
  • पोटाश : पोटाश की स्थिति भी चिंताजनक है। जिले का कुल औसत 1.99 है, जो न्यून स्तर है। सभी ब्लॉकों की मिट्टी में इसकी उपलब्धता सामान्य से काफी कम है।
  • फॉस्फोरस : फॉस्फोरस के मामले में हाथरस की मिट्टी की स्थिति थोड़ी संतोषजनक है। जिले का कुल औसत 2.56 है, जो मध्यम श्रेणी में आता है।
  • अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व: राहत की बात यह है कि मिट्टी में जिंक, आयरन, सल्फर और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व अधिकांश ब्लॉकों में पर्याप्त पाए गए हैं।

जैविक खाद से बचाएं उर्वरा शक्ति
कृषि वैज्ञानिक डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं और हेल्थ कार्ड में दी गई संस्तुतियों के आधार पर ही संतुलित मात्रा में खाद डालें। नाइट्रोजन और पोटाश की कमी को दूर करने के लिए रासायनिक खादों के साथ-साथ गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद (जैसे ढैंचा या सनई) का प्रयोग जरूर करें। लगातार एक ही फसल उगाने के बजाय दलहनी फसलों (दालों) को फसल चक्र में शामिल करें, ताकि मिट्टी में नाइट्रोजन को बचाया जा सके।

इन कमियों से फसलों पर प्रभाव
मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी से पौधे का विकास रुक जाता है। नई पत्तियां छोटी और पीली रह जाती हैं क्योंकि क्लोरोफिल (पत्तियों का हरा रंग जो भोजन बनाता है) कम बनता है। पौधे पतले और कमजोर हो जाते हैं। इसके कारण पैदावार बहुत कम हो जाती है। पौधे सबसे पहले पुरानी पत्तियों का नाइट्रोजन नई पत्तियों को भेजते हैं। इससे पुरानी पत्तियां पीली होकर झड़ने लगती हैं। पौधे की लंबाई और शाखाएं रुक जाती हैं।

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