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Hathras News: किसी को बेटी की शादी की चिंता तो कोई कर्ज के बोझ से दबा
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:51 AM IST
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बारिश से खराब हुई गेहूं की फसल दिखाता किसान मनोज कुमार। संवाद
- फोटो : Samvad
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जिले में पिछले 10 दिनों से जारी बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने गेहूं की तैयार खड़ी फसल को चौपट कर दिया है। खेतों में बिछी फसल को देखकर किसानों की आंखों से आंसू निकल आए हैं। किसी को बेटी की शादी की फिक्र खाए जा रही है, तो किसी के सिर पर बैंक के कर्ज का बोझ बढ़ गया है।
लगातार हो रही बारिश के कारण गेहूं की फसल पूरी तरह भीग चुकी है। किसान बार-बार फसल सुखाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है। आंधी के कारण फसल जमीन पर गिर गई है, जिससे हार्वेस्टर से कटाई संभव नहीं है। अब मजदूर भी मनमाने दाम मांग रहे हैं, जिससे किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।
किसानों का दर्द
25 बीघा फसल बर्बाद, कैसे चुकाऊंगा कर्ज
गांव गढ़ी चिंता निवासी पूरन सिंह का कहना है कि उनके पास 25 बीघा जमीन है, जिसमें पूरी तरह गेहूं की फसल थी। आंधी और बारिश ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। केसीसी का 2.75 लाख रुपये का कर्ज है। अब अगले साल बढ़े हुए ब्याज के साथ भुगतान करना पड़ेगा। समझ नहीं आ रहा कि यह कर्ज कैसे चुकेगा। अब सब भगवान भरोसे है।
बेटी के हाथ पीले हो जाएं, अब यही बहुत है
गांव झींगुरा निवासी मनोज कुमार ने बताया कि पिता के पास 30 बीघा जमीन है। मेरे हिस्से की 15 में से 10 बीघा भूमि में मैंने गेहूं बोया था, ताकि पशुओं के चारे और बेटी की शादी का इंतजाम हो सके। छह जुलाई को बेटी की शादी है। अरमान थे कि धूमधाम से करेंगे, लेकिन कुदरत ने सब बर्बाद कर दिया। अब तो बस यही दुआ है कि बेटी के हाथ कैसे भी पीले हो जाएं।
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लगातार हो रही बारिश के कारण गेहूं की फसल पूरी तरह भीग चुकी है। किसान बार-बार फसल सुखाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है। आंधी के कारण फसल जमीन पर गिर गई है, जिससे हार्वेस्टर से कटाई संभव नहीं है। अब मजदूर भी मनमाने दाम मांग रहे हैं, जिससे किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं।
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25 बीघा फसल बर्बाद, कैसे चुकाऊंगा कर्ज
गांव गढ़ी चिंता निवासी पूरन सिंह का कहना है कि उनके पास 25 बीघा जमीन है, जिसमें पूरी तरह गेहूं की फसल थी। आंधी और बारिश ने पूरी फसल बर्बाद कर दी। केसीसी का 2.75 लाख रुपये का कर्ज है। अब अगले साल बढ़े हुए ब्याज के साथ भुगतान करना पड़ेगा। समझ नहीं आ रहा कि यह कर्ज कैसे चुकेगा। अब सब भगवान भरोसे है।
बेटी के हाथ पीले हो जाएं, अब यही बहुत है
गांव झींगुरा निवासी मनोज कुमार ने बताया कि पिता के पास 30 बीघा जमीन है। मेरे हिस्से की 15 में से 10 बीघा भूमि में मैंने गेहूं बोया था, ताकि पशुओं के चारे और बेटी की शादी का इंतजाम हो सके। छह जुलाई को बेटी की शादी है। अरमान थे कि धूमधाम से करेंगे, लेकिन कुदरत ने सब बर्बाद कर दिया। अब तो बस यही दुआ है कि बेटी के हाथ कैसे भी पीले हो जाएं।