{"_id":"69b86f594285087e7407c9f7","slug":"the-garland-of-devotion-is-made-in-hathras-and-is-recognized-in-vrindavan-hathras-news-c-56-1-sali1016-145896-2026-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: हाथरस में बनती है भक्ति की माला, वृंदावन में मिलती है पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: हाथरस में बनती है भक्ति की माला, वृंदावन में मिलती है पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 17 Mar 2026 02:30 AM IST
विज्ञापन
तुलसी की माला बनाती महिलाएं। संवाद
विज्ञापन
मथुरा और वृंदावन के मंदिरों व घाटों पर श्रद्धालु जिस तुलसी की माला को भक्ति भाव से गले में धारण करते हैं, उसकी खुशबू अब हाथरस की गलियों से भी उठ रही है। जिले के गांव मड़नई की रहने वाली सीमा देवी तुलसी की लकड़ी से भजन माला और कंठी माला तैयार कर न केवल अपनी अलग पहचान बना रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का रास्ता खोल रही हैं।
सीमा देवी ने इस काम की शुरुआत मां खेरे वाली स्वयं सहायता समूह के माध्यम से की। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने गांव की महिलाओं को भी इस काम का प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज उनके साथ कई महिलाएं इस काम से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
सीमा देवी बताती हैं कि उनके द्वारा तैयार की गई तुलसी की मालाओं की मांग मथुरा और वृंदावन के बाजारों में काफी अधिक है। उनका मायका वृंदावन में होने के कारण तुलसी की लकड़ी यानी कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो जाता है। वह वहां से लकड़ी लाकर गांव में मालाएं तैयार करती हैं और फिर उन्हें वृंदावन के बाजारों में बेचती हैं।
हर महीने 15 से 20 हजार की कमाई
इस काम से सीमा देवी हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं। उनका कहना है कि यह काम घर के कामकाज के साथ भी आसानी से किया जा सकता है, इसलिए महिलाएं इससे जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। सीमा देवी की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका लक्ष्य है कि गांव की अधिक से अधिक महिलाएं इस काम से जुड़ें, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से किसी और पर निर्भर न रहना पड़े।
-- -- -- -
यह उत्पाद करती हैं तैयार
. भजन माला (जाप के लिए)
. कंठी माला (धारण करने के लिए)
. तुलसी से बने अन्य सजावटी उत्पाद
-- -- -- -
Trending Videos
सीमा देवी ने इस काम की शुरुआत मां खेरे वाली स्वयं सहायता समूह के माध्यम से की। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने गांव की महिलाओं को भी इस काम का प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज उनके साथ कई महिलाएं इस काम से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीमा देवी बताती हैं कि उनके द्वारा तैयार की गई तुलसी की मालाओं की मांग मथुरा और वृंदावन के बाजारों में काफी अधिक है। उनका मायका वृंदावन में होने के कारण तुलसी की लकड़ी यानी कच्चा माल आसानी से उपलब्ध हो जाता है। वह वहां से लकड़ी लाकर गांव में मालाएं तैयार करती हैं और फिर उन्हें वृंदावन के बाजारों में बेचती हैं।
हर महीने 15 से 20 हजार की कमाई
इस काम से सीमा देवी हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं। उनका कहना है कि यह काम घर के कामकाज के साथ भी आसानी से किया जा सकता है, इसलिए महिलाएं इससे जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। सीमा देवी की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका लक्ष्य है कि गांव की अधिक से अधिक महिलाएं इस काम से जुड़ें, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से किसी और पर निर्भर न रहना पड़े।
यह उत्पाद करती हैं तैयार
. भजन माला (जाप के लिए)
. कंठी माला (धारण करने के लिए)
. तुलसी से बने अन्य सजावटी उत्पाद

तुलसी की माला बनाती महिलाएं। संवाद