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Hathras News: लेबर कॉलोनी में मामूली किराये पर आवंटित मकानों में बना दिया बाजार
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करीब 70 साल पहले बनी लेबर कॉलोनी आज शहर में अलीगढ़ रोड के महत्वपूर्ण स्थल में शामिल हो गई है। आसपास जमीन के रेट काफी ऊंचे हैं। 30 रुपये मासिक किराये पर मकान लेने वालों ने उनमें दुकानें बना दी हैं, आज यहां पूरा एक बाजार बन गया है। एक दुकान का किराया ही करीब 25 हजार रुपये आ रहा हैं।
लेबर कॉलोनी का स्वामित्व अभी भी श्रम विभाग के पास है। 15 व 30 रुपये का मामूली किराया भी जमा नहीं हो रहा है। कुछ लोगों ने मकान किराये पर उठा दिए तो कुछ ने मुख्य सड़क की ओर दुकानें बना दी हैं।
श्रम विभाग व प्रशासन ने कभी कार्रवाई करनी भी चाही तो राजनीतिक हस्तक्षेप और रसूख आड़े आ गया। आज यहां प्रतिष्ठानों पर चमकते साइन बोर्ड बाजार की भव्यता को दर्शा रहे हैं। कुछ लोगों ने बताया कि एक-एक दुकान से 20 से 25 हजार रुपये किराया लिया जा रहा है। कुछ ने खुद ही अपने मकान को प्रतिष्ठान में तब्दील कर व्यापार शुरू कर दिया है, लेकिन सरकार को इनसे राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी सतेंद्र कुमार मिश्रा व नगर पालिका ईओ रोहित सिंह ने बताया कि इन्हीं सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। उत्तर प्रदेश औद्योगिक गृह व्यवस्था अधिनियमित 1955 में साफ है कि क्वार्टर या मकान को व्यावसायिक प्रयोजन में नहीं लाया जा सकता है।
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लेबर कॉलोनी का स्वामित्व अभी भी श्रम विभाग के पास है। 15 व 30 रुपये का मामूली किराया भी जमा नहीं हो रहा है। कुछ लोगों ने मकान किराये पर उठा दिए तो कुछ ने मुख्य सड़क की ओर दुकानें बना दी हैं।
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श्रम विभाग व प्रशासन ने कभी कार्रवाई करनी भी चाही तो राजनीतिक हस्तक्षेप और रसूख आड़े आ गया। आज यहां प्रतिष्ठानों पर चमकते साइन बोर्ड बाजार की भव्यता को दर्शा रहे हैं। कुछ लोगों ने बताया कि एक-एक दुकान से 20 से 25 हजार रुपये किराया लिया जा रहा है। कुछ ने खुद ही अपने मकान को प्रतिष्ठान में तब्दील कर व्यापार शुरू कर दिया है, लेकिन सरकार को इनसे राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी सतेंद्र कुमार मिश्रा व नगर पालिका ईओ रोहित सिंह ने बताया कि इन्हीं सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। उत्तर प्रदेश औद्योगिक गृह व्यवस्था अधिनियमित 1955 में साफ है कि क्वार्टर या मकान को व्यावसायिक प्रयोजन में नहीं लाया जा सकता है।