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Hathras News: तेज बारिश की आशंका ने उड़ाए आलू किसानों के होश, बूंदाबांदी से बढ़ी चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Mon, 16 Mar 2026 02:48 AM IST
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बारिश के बाद खेत में बिछी फसलें। संवाद
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आलू खोदाई के बीच रविवार तड़के अचानक मौसम का मिजाज बदलने से किसानों की धड़कनें तेज हो गईं। सुबह के समय तेज हवाओं के साथ आसमान में घने बादल छा गए और तेज गड़गड़ाहट के साथ हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई।
बारिश की आशंका को देखते हुए खेतों में काम कर रहे आलू किसानों में चिंता बढ़ गई और उन्होंने खोदे हुए आलू को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल तिरपाल से ढंकने का काम शुरू कर दिया। कहीं आलू को तिरपाल से ढंक दिया गया तो कहीं मजदूरों की संख्या बढ़ाकर आलू को जल्द से जल्द बोरों में भरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
सादाबाद क्षेत्र में इन दिनों बड़े पैमाने पर आलू की खोदाई चल रही है। मौसम में आए इस बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि यदि तेज बारिश हो गई तो खेतों में पड़ा आलू खराब हो सकता है और अभी जमीन में मौजूद आलू भी सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा और आलू की खोदाई का कार्य भी रोकना पड़ सकता है। ऐसे में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसान सुबह तड़के ही खेतों में पहुंच गए और मजदूरों के साथ मिलकर तेजी से आलू निकलवाने में जुट गए। खेतों में खोदे हुए आलू को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल और प्लास्टिक शीट का सहारा लिया जा रहा है और खुले आलू को बोरों में भरकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है, ताकि संभावित बारिश से फसल को बचाया जा सके। गांव मढ़नई में खेतों पर आलू को तिरपाल से ढंक रहे किसान हंवीर सिंह और हाकिम सिंह ने बताया कि आलू की फसल उनके लिए वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसल होती है। यदि खुदाई के दौरान बारिश हो जाती है तो आलू की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और मंडी में सही दाम मिलना भी मुश्किल हो जाता है। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। किसानों की मानें तो सादाबाद क्षेत्र में अब तक लगभग 60 से 70 प्रतिशत आलू की खोदाई पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी खेतों में खोदाई का काम जारी है। ऐसे में मौसम की थोड़ी सी भी खराबी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
बातचीत-
-यदि तेज बारिश हो गई तो खेत में बिना खोदा आलू जमीन में ही सड़ सकता है, जबकि खोदे हुए आलू भी भीगने से खराब हो जाएंगे। इससे उपज का पूरा दाम निकाल पाना भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने कहा कि आलू की फसल पर पहले ही लागत बढ़ चुकी है और यदि मौसम ने साथ नहीं दिया तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सत्यप्रकाश गौतम, किसान, मढ़नई।
- इस समय आलू की खोदाई का सबसे महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। सुबह मौसम खराब होने और बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनकर किसानों की चिंता बढ़ गई। यदि इस समय तेज बारिश हो जाती है तो खेतों में खुदा पड़ा आलू भीगकर खराब हो जाएगा और जमीन में पड़ा आलू निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। इससे फसल की गुणवत्ता घट जाएगी और मंडी में उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। विजय सिंह, किसान, मढ़नई।
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फिलहाल आलू की खोदाई चल रही है। आसमान में बादल छाने से थोड़ी घबराहट तो हो रही है। किसान जल्दी जल्दी कोल्ड स्टोरेज में आलू को पहुंचा रहे हैं।
- सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
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बारिश की आशंका को देखते हुए खेतों में काम कर रहे आलू किसानों में चिंता बढ़ गई और उन्होंने खोदे हुए आलू को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल तिरपाल से ढंकने का काम शुरू कर दिया। कहीं आलू को तिरपाल से ढंक दिया गया तो कहीं मजदूरों की संख्या बढ़ाकर आलू को जल्द से जल्द बोरों में भरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
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सादाबाद क्षेत्र में इन दिनों बड़े पैमाने पर आलू की खोदाई चल रही है। मौसम में आए इस बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि यदि तेज बारिश हो गई तो खेतों में पड़ा आलू खराब हो सकता है और अभी जमीन में मौजूद आलू भी सड़ने का खतरा बढ़ जाएगा और आलू की खोदाई का कार्य भी रोकना पड़ सकता है। ऐसे में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसान सुबह तड़के ही खेतों में पहुंच गए और मजदूरों के साथ मिलकर तेजी से आलू निकलवाने में जुट गए। खेतों में खोदे हुए आलू को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल और प्लास्टिक शीट का सहारा लिया जा रहा है और खुले आलू को बोरों में भरकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है, ताकि संभावित बारिश से फसल को बचाया जा सके। गांव मढ़नई में खेतों पर आलू को तिरपाल से ढंक रहे किसान हंवीर सिंह और हाकिम सिंह ने बताया कि आलू की फसल उनके लिए वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसल होती है। यदि खुदाई के दौरान बारिश हो जाती है तो आलू की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और मंडी में सही दाम मिलना भी मुश्किल हो जाता है। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। किसानों की मानें तो सादाबाद क्षेत्र में अब तक लगभग 60 से 70 प्रतिशत आलू की खोदाई पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी खेतों में खोदाई का काम जारी है। ऐसे में मौसम की थोड़ी सी भी खराबी किसानों की चिंता बढ़ा रही है।
बातचीत-
-यदि तेज बारिश हो गई तो खेत में बिना खोदा आलू जमीन में ही सड़ सकता है, जबकि खोदे हुए आलू भी भीगने से खराब हो जाएंगे। इससे उपज का पूरा दाम निकाल पाना भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने कहा कि आलू की फसल पर पहले ही लागत बढ़ चुकी है और यदि मौसम ने साथ नहीं दिया तो आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सत्यप्रकाश गौतम, किसान, मढ़नई।
- इस समय आलू की खोदाई का सबसे महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। सुबह मौसम खराब होने और बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनकर किसानों की चिंता बढ़ गई। यदि इस समय तेज बारिश हो जाती है तो खेतों में खुदा पड़ा आलू भीगकर खराब हो जाएगा और जमीन में पड़ा आलू निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। इससे फसल की गुणवत्ता घट जाएगी और मंडी में उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। विजय सिंह, किसान, मढ़नई।
फिलहाल आलू की खोदाई चल रही है। आसमान में बादल छाने से थोड़ी घबराहट तो हो रही है। किसान जल्दी जल्दी कोल्ड स्टोरेज में आलू को पहुंचा रहे हैं।
- सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।

बारिश के बाद खेत में बिछी फसलें। संवाद

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