नहीं लगवाया चौथा इंजेक्शन: चार महीने पहले पागल कुत्ते ने काटा, अब गई जान, परिजन रो-रोकर बेहाल
चार भाइयों में दूसरे नंबर के सोनू कुमार ट्रक चलाते थे। वे हरियाणा के बहादुरगढ़ (झज्जर) में ट्रांसपोर्ट कंपनी के चालक थे। तीसरे नंबर का भाई रवि बतौर सहायक उनके साथ रहता था। चार महीने पहले मार्च में दोनों घर लौटे थे, तभी कुत्ते ने सोनू को काट लिया था।
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रेबीज ग्रसित पागल कुत्ते के काटने का असर दिमाग तक पहुंचने के बाद सहपऊ में गांव गुतहरा के ट्रक चालक सोनू कुमार (31) की शनिवार रात मौत हो गई। चार महीने पहले मार्च में कुत्ते ने सोनू पर हमला किया था, जिसके बाद उसे एंटी रेबीज के तीन इंजेक्शन भी लगाए थे, लेकिन दवा कोर्स पूरा नहीं होने से वह जानलेवा बीमारी रेबीज की चपेट में आ गया। इस घटना से पूरा परिवार और गांव सदमे में है। सोनू की पत्नी व बच्चे बदहवास हैं।
सीएचसी सहपऊ के डॉ. एके वार्ष्णेय ने बताया कि अगर रेबीज ग्रसित कुत्ता काट ले तो गंभीरता के साथ चार इंजेक्शन का कोर्स पूरा होना चाहिए। पहले दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन और 28वें दिन रेबीज की खुराक लेना जरूरी है। सोनू के परिजनों के अनुसार उसे तीन खुराक ही दी गईं, संभवत: इसी वजह से उसकी जान चली गई, क्योंकि दवा की पूरी खुराक नहीं दी गई।
चार भाइयों में दूसरे नंबर के सोनू कुमार ट्रक चलाते थे। वे हरियाणा के बहादुरगढ़ (झज्जर) में ट्रांसपोर्ट कंपनी के चालक थे। तीसरे नंबर का भाई रवि बतौर सहायक उनके साथ रहता था। चार महीने पहले मार्च में दोनों घर लौटे थे, तभी कुत्ते ने सोनू को काट लिया था। इंजेक्शन लगवाकर वे काम पर लौट गए। बीते दिनों ट्रक लेकर दोनों भाई बनारस गए थे। वहीं पर बीती 21 जुलाई को सोनू के पेट में तेज दर्द उठा, साथ ही पैरों में जलन होने लगी। रवि ने सोनू को वाराणसी के सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। जानकारी मिलने पर छोटा भाई रणवीर गुतहरा से वाराणसी पहुंचा तथा भाई को वहां से आगरा ले आया। आगरा के चौहान अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां कुछ आराम मिलने पर सोनू को आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। यहां आराम नहीं मिलने पर शाम को फीरोजाबाद के ट्रामा सेंटर ले जाया गया।
फीरोजाबाद में ही खाना खिलाने के बाद जैसे ही उसे पानी दिया, वह डरने लगे। उसकी हरकतें देख परिजनों के होश उड़ गए। रेबीज ने उसके दिमाग पर असर कर दिया था। रेबीज का असर बताकर चिकित्सकों ने भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद परिजन सोनू को 25 जुलाई को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। तब तक सोनू पर बीमारी का काफी असर हो चुका था, उसे स्ट्रेचर पर बेल्ट से बांधा गया था। मेडिकल कॉलेज में भी इलाज के लिए मना होने पर देर रात एंबुलेंस से सोनू को वापस घर लाया जा रहा था। रास्ते में ही रात 11 बजे उसने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। उस समय भी वह स्ट्रेचर से बंधा हुआ था।
रात भर रोते-राेते पत्नी और बच्चे हुए बेहोश
सहपऊ। शनिवार देर रात गांव में शव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी राधा पछाड़ खाकर जमीन पर गिर पड़ीं। पति की मौत की पता चलने के बाद से उनका रोना बंद नहीं है। रविवार को शव उठने के दौरान भी वे बदहवास हो गईं और जमीन पर लेटकर दहाड़ मार-मार कर रोने लगीं। पिता के जाने के बाद मां की हालत बिगड़ती देख बच्चों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। बिलखती मां, पत्नी व बच्चों को देख वहां मौजूद लोग अपने आंसू नहीं रोक सके। गुतहरा सहित आसपास के गांव के लोग इस घटना से सन्न है, गांव में मातम छाया है।
मृतक सोनू अपने पीछे चार बच्चे विहान उर्फ गिन्नू (8), कनक (6), दिव्या (4) और आरव (2) को रोते-बिलखते छोड़ गया है। सोनू का सबसे बड़ा भाई रंजीत दिल्ली में नारियल की ढकेल लगाता है। सबसे छोटा रणवीर गांव में रहकर पढ़ाई कर रहा है। इनके पिता रामवीर की तीन साल पहले मृत्यु हो चुकी है। बड़े बेटे गिन्नू ने पिता को मुखाग्नि दी।