UP: 'मैं अब अपने जीवन से खुश नहीं, दिखावा करते-करते थक गया हूं', 11 लाइन का नोट लिखकर UPSC छात्र ने दी जान
यूपीएससी की तैयारी कर रहे बॉबी ने मरने से पहले अपने हाथ पर लाल पेन से लिखा था कि वह जीवन से खुश नहीं हैं और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से कमजोर महसूस कर रहे हैं।
विस्तार
हाथरस में अवसाद के चलते यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवक नागेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बॉबी (28) ने मंगलवार शाम फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले उसने अपने हाथ पर मैं अपने जीवन से खुश नहीं लिखा है।
आगरा रोड स्थित आशीर्वाद धाम कॉलोनी निवासी बॉबी सीआईएसएफ तैनात हरि सिंह के इकलौते बेटे थे और पिछले छह महीनों से घर पर रहकर गेट एक्जाम व यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, बॉबी ने एक कॉलेज से कंप्यूटर से बी-टेक किया था। इसके बाद दो साल टीसीएस कंपनी में नौकरी भी की। बाद में यूपीएससी की तैयारी के चलते उसने नौकरी छोड़ दी थी, फिलहाल वह घर पर रहकर ही तैयारी कर रहे थे।
मंगलवार को हरि सिंह व परिवार के अन्य लोग किसी काम से मथुरा गए थे। शाम को जब वे वापस आए तो बॉबी का शव फंदे पर लटका देखा। मौके पर पहुंची कोतवाली सदर पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई और शव को नीचे उतारा। शव देख परिवार में कोहराम मच गया। आस-पड़ोसियों ने बिलखते परिजनों को संभाला।
लाल पेन से हाथ पर लिखा 11 लाइन का सुसाइड नोट
पुलिस के अनुसार बॉबी काफी समय से डिप्रेशन में था। मथुरा जाने के लिए भी परिजनों ने उससे पूछा था, लेकिन उसने जाने से इन्कार कर दिया था। मरने से पहले नागेंद्र ने अंग्रेजी में हाथ पर लाल पेन से 11 लाइन का सुसाइड नोट लिखा था।
दिखावा करते-करते थक गया हूं
सुसाइड नोट में लिखा, यकीन मानिए, मैं अब अपने जीवन से खुश नहीं हूं। अब मैं दिखावा करते-करते थक गया हूं कि मैं ठीक हूं, जबकि असल में मैं ठीक नहीं हूं। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं ने मुझे बहुत कमजोर बना दिया है। इसलिए, मैं अपने होशोहवास में अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला ले रहा हूं, जो कि निर्णयात्मक है।
भाई से झगड़े के बाद बालिका ने फंदे पर लटककर जान दी
थाना क्षेत्र के एक गांव में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली बालिका (12) ने मंगलवार की देर शाम भाई से झगड़ा होने के बाद फंदे पर लटककर जान दे दी।
बालिका का पांचवीं में पढ़ने वाले भाई से कॉपी पर लेने पर विवाद हुआ था। इसी मामूली विवाद को बच्ची बर्दाश्त नहीं कर पाई। उसने बेड पर कुर्सी रखकर दुपट्टे का फंदा छत के कुंडे में बनाया और झूल गई।
कुछ देर बाद परिजनों उसे फंदे से लटके देखा तो उसे बचाने की कोशिश की और उसे फंदे से उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने पुलिस को घटना की नहीं दी है और अंतिम संस्कार कर दिया। गंगीरी इंस्पेक्टर रणजीत सिंह ने बताया कि मामले की कोई जानकारी नहीं मिली है।
हर आत्महत्या के पीछे छिपी होती है एक पीड़ा...
हताशा, अवसाद और सहनशीलता की कमी जिंदगी पर भारी पड़ रही है। मनोविज्ञानियों का कहना है कि उम्र, परिस्थिति और पृष्ठभूमि अलग होने के बावजूद दोनों घटनाएं समाज के सामने गंभीर सवाल खड़े करतीं हैं। हर आत्महत्या के पीछे एक मानसिक पीड़ा छिपी होती है। संवाद से ऐसे लोगों की पीड़ा को समझना चाहिए।
एएमयू के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. शाह आलम का कहना है कि आत्महत्या कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक लंबी मानसिक और भावनात्मक कहानी छिपी रहती है। सफलता न मिलना, सामाजिक दबाव, सम्मान की कमी, ताने-उलाहने और भविष्य को लेकर निराशा जैसे कारण व्यक्ति को भीतर से तोड़ देते हैं।
असफलताओं को असमर्थता न मानें
हाथरस की घटना में यूपीएससी की तैयारी कर रहा युवक लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटा था। संभव है कि लगातार असफलता, बेरोजगारी का दबाव, परिवार या मित्रों की अपेक्षाएं और समाज की तुलना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर रही हों। प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ में युवा अक्सर अपनी असफलताओं को खुद की असमर्थता मान लेते हैं, जबकि यह एक सामान्य प्रक्रिया होती है।
छोटी उम्र में अधिक होती है भावनात्मक संवेदनशीलता प्रो. शाह
आलम ने बताया कि गंगीरी में 12 वर्षीय बालिका की आत्महत्या ने और भी गहरी चिंता पैदा की है। इतनी कम उम्र में आत्मघाती कदम यह संकेत देता है कि बाल मन कितनी गहरी पीड़ा झेल सकता है। इस उम्र में स्वाभिमान और भावनात्मक संवेदनशीलता बहुत अधिक होती है। घर या समाज में उपेक्षा, लैंगिक भेदभाव, तुलना या डांट-फटकार भी बालिका के मन पर गहरा असर डाल सकती है।
संवाद बढ़ाएं परिवार, शिक्षक और समाज बच्चे और युवा अक्सर
अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। उन्हें सुने जाने, समझे जाने और स्वीकार किए जाने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। परिवार, शिक्षक और समाज को चाहिए कि वह बच्चों और युवाओं से संवाद बढ़ाएं, उनकी भावनाओं को गंभीरता से लें और मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही प्राथमिकता दें, जितनी शारीरिक स्वास्थ्य को देते हैं।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
