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Jalaun News: मेडिकल कॉलेज में तीन माह में हृदय के 25 मरीजों को मिली थ्रांबोलिसिस
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उरई। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 22 दिसंबर से 22 मार्च तक तीन माह के दौरान हृदय संबंधी आपात स्थितियों में बेहतर उपचार उपलब्ध कराया गया है। इस अवधि में हृदय वेदना से पीड़ित 1170 मरीजों का आपातकालीन स्तर पर इलाज किया गया। इनमें से 25 मरीजों में हृदय आघात (हार्ट अटैक) की पुष्टि होने पर उन्हें थ्रांबोलिसिस उपचार प्रदान किया गया। वहीं, पांच पक्षाघात (पैरालिसिस) से ग्रसित मरीजों को सेरेब्रल थ्रांबोलिसिस की सुविधा दी गई।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, इस उपचार में उपयोग होने वाली सभी आवश्यक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं और मरीजों को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय आघात के मरीजों को आमतौर पर छह घंटे के भीतर और पक्षाघात के मरीजों को 2 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचने पर यह उपचार प्रभावी रूप से दिया जा सकता है। उपचार से पहले सीटी स्कैन और अन्य जरूरी जांचें की जाती हैं, जिनके आधार पर चिकित्सक निर्णय लेते हैं।
प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि थ्रांबोलिसिस उपचार मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग और मेडिसिन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मरीज इस उपचार के पात्र नहीं होते, बल्कि चिकित्सकीय जांच के बाद ही इसका निर्णय लिया जाता है।
यह है थ्रांबोलिसिस
एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसे ''''क्लॉट बस्टर'''' थेरेपी भी कहते हैं। यह नसों में बने खतरनाक रक्त के थक्कों को दवाओं के माध्यम से घोलकर सामान्य रक्त प्रवाह को बहाल करती है। यह स्ट्रोक, हार्ट अटैक और पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में थक्का) जैसी जानलेवा स्थितियों में टिश्यू डैमेज को रोकने के लिए की जाती है।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, इस उपचार में उपयोग होने वाली सभी आवश्यक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं और मरीजों को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय आघात के मरीजों को आमतौर पर छह घंटे के भीतर और पक्षाघात के मरीजों को 2 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचने पर यह उपचार प्रभावी रूप से दिया जा सकता है। उपचार से पहले सीटी स्कैन और अन्य जरूरी जांचें की जाती हैं, जिनके आधार पर चिकित्सक निर्णय लेते हैं।
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प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि थ्रांबोलिसिस उपचार मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग और मेडिसिन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मरीज इस उपचार के पात्र नहीं होते, बल्कि चिकित्सकीय जांच के बाद ही इसका निर्णय लिया जाता है।
यह है थ्रांबोलिसिस
एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसे ''''क्लॉट बस्टर'''' थेरेपी भी कहते हैं। यह नसों में बने खतरनाक रक्त के थक्कों को दवाओं के माध्यम से घोलकर सामान्य रक्त प्रवाह को बहाल करती है। यह स्ट्रोक, हार्ट अटैक और पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में थक्का) जैसी जानलेवा स्थितियों में टिश्यू डैमेज को रोकने के लिए की जाती है।