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उच्च शिक्षा युवाओं को राष्ट्र निर्माण की शक्ति में बदलने का माध्यम : प्रो. मुनेश
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उरई। डीवी कॉलेज में शनिवार को शिक्षक शिक्षा विभाग व आईक्यूएसी की ओर से समकालीन सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में उच्च शिक्षा की प्रासंगिकता विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर मुनेश कुमार ने उच्च शिक्षा को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समानता, कौशल विकास और आर्थिक प्रगति का आधार बताया।
उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह देश के लिए महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय लाभांश है। उन्होंने युवाओं में इच्छाशक्ति, आलोचनात्मक चिंतन, नवाचार, रोजगारपरक कौशल और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को प्रॉब्लम-प्वाइंटिंग से प्रॉब्लम-सॉल्विंग की दिशा में सक्षम बनाना होना चाहिए।
प्रो. कुमार ने नई शिक्षा नीति-2020, अनुसंधान, उच्च शिक्षा में निवेश, सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) तथा सामाजिक एवं लैंगिक समानता जैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला। बीएनबी कॉलेज राठ के डॉ. एसएन शुक्ला ने भी उच्च शिक्षा की बदलती भूमिका और चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। प्राचार्य प्रो. राजेश चंद्र पांडेय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, कौशल आधारित और समावेशी उच्च शिक्षा ही भारत की युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की प्रभावी शक्ति में परिवर्तित कर सकती है। संचालन डॉ. आशुतोष गुप्ता ने किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजेश पालीवाल ने आभार जताया। इस दौरान डॉ. हर्ष गर्ग, डॉ. आलोक पाठक, डॉ. नीति कुशवाहा, डॉ. शरत श्रीवास्तव, डॉ. उदय भान, डॉ. ज्ञानेंद्र मोहन बसेड़िया, डॉ. विजय चौधरी आदि रहे।
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उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह देश के लिए महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय लाभांश है। उन्होंने युवाओं में इच्छाशक्ति, आलोचनात्मक चिंतन, नवाचार, रोजगारपरक कौशल और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को प्रॉब्लम-प्वाइंटिंग से प्रॉब्लम-सॉल्विंग की दिशा में सक्षम बनाना होना चाहिए।
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प्रो. कुमार ने नई शिक्षा नीति-2020, अनुसंधान, उच्च शिक्षा में निवेश, सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) तथा सामाजिक एवं लैंगिक समानता जैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला। बीएनबी कॉलेज राठ के डॉ. एसएन शुक्ला ने भी उच्च शिक्षा की बदलती भूमिका और चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए। प्राचार्य प्रो. राजेश चंद्र पांडेय ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, कौशल आधारित और समावेशी उच्च शिक्षा ही भारत की युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की प्रभावी शक्ति में परिवर्तित कर सकती है। संचालन डॉ. आशुतोष गुप्ता ने किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजेश पालीवाल ने आभार जताया। इस दौरान डॉ. हर्ष गर्ग, डॉ. आलोक पाठक, डॉ. नीति कुशवाहा, डॉ. शरत श्रीवास्तव, डॉ. उदय भान, डॉ. ज्ञानेंद्र मोहन बसेड़िया, डॉ. विजय चौधरी आदि रहे।
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