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लर्निंग बाई डूइंग: बच्चों ने तैयार की हाइड्रोपोनिक तकनीक से पौध उगाने की संरचना
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फोटो-15-लर्निंग बाई डूइंड में हाइड्रोपोनिक तकनीक से पौध उगाने का संरचना तैयार करते विद्यार्थी।
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फोटो-15-लर्निंग बाई डूइंड में हाइड्रोपोनिक तकनीक से पौध उगाने का संरचना तैयार करते विद्यार्थी। स्रोत-विद्यालय
जालौन। पीएम श्री कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय औरेखी में लर्निंग बाई डूइंग (एलबीडी) कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों ने हाइड्रोपोनिक तकनीक से पौध उगाने की संरचना तैयार की। विद्यार्थियों ने पीवीसी पाइपों की माप, कटिंग, उनमें छिद्र तैयार करने और पाइपों को जोड़कर हाइड्रोपोनिक सिस्टम बनाने का कार्य स्वयं किया।
एलबीडी कार्यक्रम के अध्यापक अनिल सिंह ने विद्यार्थियों को हाइड्रोपोनिक तकनीक की उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम स्थान और सीमित संसाधनों में पौध उगाने की यह तकनीक आधुनिक कृषि के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता अमित कुमार ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नवाचार और रचनात्मक सोच के महत्व के बारे में बताया। गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी कौशल, टीमवर्क, रचनात्मकता और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित हुए। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए करके सीखने की अवधारणा को व्यवहार में अनुभव किया। संवाद
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जालौन। पीएम श्री कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय औरेखी में लर्निंग बाई डूइंग (एलबीडी) कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों ने हाइड्रोपोनिक तकनीक से पौध उगाने की संरचना तैयार की। विद्यार्थियों ने पीवीसी पाइपों की माप, कटिंग, उनमें छिद्र तैयार करने और पाइपों को जोड़कर हाइड्रोपोनिक सिस्टम बनाने का कार्य स्वयं किया।
एलबीडी कार्यक्रम के अध्यापक अनिल सिंह ने विद्यार्थियों को हाइड्रोपोनिक तकनीक की उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम स्थान और सीमित संसाधनों में पौध उगाने की यह तकनीक आधुनिक कृषि के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता अमित कुमार ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को नवाचार और रचनात्मक सोच के महत्व के बारे में बताया। गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी कौशल, टीमवर्क, रचनात्मकता और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित हुए। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए करके सीखने की अवधारणा को व्यवहार में अनुभव किया। संवाद
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