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Jalaun News: मेडिकल कॉलेज... जूनियर डॉक्टरों ने बंद की ओपीडी
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फोटो - 26 चंद्रपाल।
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उरई। मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में बुधवार को स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। सुबह 9 बजे से बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर पर्चा काउंटर के सामने एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
डॉक्टरों के प्रदर्शन के चलते ओपीडी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई मरीज बिना इलाज कराए ही लौट गए। मेडिकल कॉलेज परिसर में पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर एकतरफा कार्रवाई है। उनका आरोप है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी ओर से दी गई तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से नामजद एफआईआर लिख दी गई, जो उनके साथ अन्याय है।
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डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि जब तक मुकदमा वापस नहीं लिया जाता या निष्पक्ष जांच का आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। डॉक्टर आराध्य के खिलाफ एफआईआर की जानकारी मिलते ही साथी डॉक्टरों ने ओपीडी बंद कर विरोध शुरू कर दिया। सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। डॉक्टरों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
डॉक्टर-तीमारदार विवाद मामले में जांच समिति गठित, एडीएम प्रेमचंद्र मौर्य बनाए गए अध्यक्ष
उरई। राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में चिकित्सकों एवं तीमारदारों के बीच हुए विवाद के मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने त्रिस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। यह समिति 18 मई 2026 की मध्यरात्रि मेडिकल कॉलेज में हुए घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं गहन जांच करेगी।
जारी आदेश के अनुसार अपर जिलाधिकारी प्रेमचंद्र मौर्य को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सह आचार्य एवं विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक मेडिसिन डॉ. पुनीत अवस्थी तथा अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी को समिति का सदस्य नामित किया गया है। जिलाधिकारी ने समिति को निर्देश दिए हैं कि पूरे घटनाक्रम के प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच की जाए। समिति विवाद के कारणों, संबंधित पक्षों की भूमिका, मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का परीक्षण कर जिम्मेदार व्यक्तियों एवं परिस्थितियों का चिन्हांकन करेगी।
डीएम ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य संस्थानों में अनुशासन, सुरक्षा एवं बेहतर कार्य वातावरण बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने समिति को शीघ्र जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इलाज न मिलने से भटके मरीज
यह बोले मरीज
फोटो - 26 चंद्रपाल।
ऐरी रमपुरा निवासी चंद्रपाल ने बताया कि उनकी किडनी में पथरी है। जांच रिपोर्ट लेकर पहुंचे, डॉक्टर तो बैठे मिले, लेकिन उन्होंने दूसरा पर्चा बनवाने को कहा। इस पर वह दूसरा पर्चा बनवाने के लिए परेशान होते रहे।
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फोटो - 27 वासुदेव।
इमिलिया बुजुर्ग निवासी वासुदेव ने बताया कि वह अपने दादा को दिखाने आए हैं। दादा को ब्लड प्रेशर की समस्या है, लेकिन डॉक्टर ही बैठे नहीं मिले। दादा के पैरों में सूजन है, पर इलाज नहीं मिल सका।
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फोटो - 28 सीताराम।
खसकीस निवासी सीताराम ने बताया कि उनके मुंह में छाले हैं। इलाज के लिए आए थे, पर डॉक्टर नहीं मिले। काफी देर इंतजार किया, पर बाद में निराश लौटना पड़ा।
डॉक्टरों के प्रदर्शन के चलते ओपीडी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई मरीज बिना इलाज कराए ही लौट गए। मेडिकल कॉलेज परिसर में पूरे दिन तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
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जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर एकतरफा कार्रवाई है। उनका आरोप है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। डॉक्टरों ने कहा कि उनकी ओर से दी गई तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से नामजद एफआईआर लिख दी गई, जो उनके साथ अन्याय है।
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डॉक्टर-तीमारदार विवाद मामले में जांच समिति गठित, एडीएम प्रेमचंद्र मौर्य बनाए गए अध्यक्ष
उरई। राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में चिकित्सकों एवं तीमारदारों के बीच हुए विवाद के मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने त्रिस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। यह समिति 18 मई 2026 की मध्यरात्रि मेडिकल कॉलेज में हुए घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं गहन जांच करेगी।
जारी आदेश के अनुसार अपर जिलाधिकारी प्रेमचंद्र मौर्य को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सह आचार्य एवं विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक मेडिसिन डॉ. पुनीत अवस्थी तथा अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी को समिति का सदस्य नामित किया गया है। जिलाधिकारी ने समिति को निर्देश दिए हैं कि पूरे घटनाक्रम के प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच की जाए। समिति विवाद के कारणों, संबंधित पक्षों की भूमिका, मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का परीक्षण कर जिम्मेदार व्यक्तियों एवं परिस्थितियों का चिन्हांकन करेगी।
डीएम ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य संस्थानों में अनुशासन, सुरक्षा एवं बेहतर कार्य वातावरण बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने समिति को शीघ्र जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इलाज न मिलने से भटके मरीज
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फोटो - 26 चंद्रपाल।
ऐरी रमपुरा निवासी चंद्रपाल ने बताया कि उनकी किडनी में पथरी है। जांच रिपोर्ट लेकर पहुंचे, डॉक्टर तो बैठे मिले, लेकिन उन्होंने दूसरा पर्चा बनवाने को कहा। इस पर वह दूसरा पर्चा बनवाने के लिए परेशान होते रहे।
फोटो - 27 वासुदेव।
इमिलिया बुजुर्ग निवासी वासुदेव ने बताया कि वह अपने दादा को दिखाने आए हैं। दादा को ब्लड प्रेशर की समस्या है, लेकिन डॉक्टर ही बैठे नहीं मिले। दादा के पैरों में सूजन है, पर इलाज नहीं मिल सका।
फोटो - 28 सीताराम।
खसकीस निवासी सीताराम ने बताया कि उनके मुंह में छाले हैं। इलाज के लिए आए थे, पर डॉक्टर नहीं मिले। काफी देर इंतजार किया, पर बाद में निराश लौटना पड़ा।

फोटो - 26 चंद्रपाल।

फोटो - 26 चंद्रपाल।