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Jalaun News: पालिका का घाटे वाला बजट पास, आय 96 करोड़ और खर्च होंगे 137 करोड़
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फोटो - 25 पालिका की बोर्ड बैठक में मौजूद पालिकाध्यक्ष व अन्य। संवाद
- फोटो : Archive
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उरई। नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट सर्वसम्मति से पास तो हो गया, लेकिन आय और व्यय के बीच भारी अंतर ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। प्रस्तुत बजट के मुताबिक पालिका की कुल संभावित आय 96.13 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि व्यय 137.22 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। इस तरह करीब 41 करोड़ रुपये का अंतर सीधे तौर पर घाटे की स्थिति को दर्शाता है, पर पालिका अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान नए आय के स्रोत तैयार होंगे, जिससे इसकी भरपाई कर ली जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील व पालिकाध्यक्ष गिरजा चौधरी ने की। इसमें पालिका के बजट में आय बढ़ाने के दावे जरूर किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आय का बड़ा हिस्सा अभी भी सरकारी अनुदानों पर निर्भर है। राज्य वित्त आयोग से 45 करोड़ रुपये और 15वें वित्त आयोग से 17 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अलावा मुख्यमंत्री वैश्विक नगर योजना के तहत 8.41 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। स्थानीय स्तर पर भवन कर से 2.20 करोड़ रुपये और दुकान किराया से 30 लाख रुपये आय का लक्ष्य रखा गया है, जो कुल बजट के मुकाबले काफी कम है।
खर्च में विकास कार्यों को प्राथमिकता, लेकिन संतुलन पर सवाल
व्यय पक्ष में नगर के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सड़क, नाली और नाला निर्माण व मरम्मत के लिए 26 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। भवन निर्माण व मरम्मत के लिए छह करोड़ रुपये, स्वच्छ भारत मिशन के तहत चार करोड़ रुपये और अन्य मदों में भी बजट बढ़ाया गया है। इसके अलावा सफाई व्यवस्था, कार्यालय संचालन और भवनों के रखरखाव पर भी खर्च में वृद्धि की गई है। हालांकि विकास कार्यों पर जोर को सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन आय के मुकाबले अत्यधिक व्यय प्रस्तावित होने से बजट के संतुलन पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय के स्रोत मजबूत नहीं किए गए तो पालिका को भविष्य में वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
सभासदों ने नहीं उठाए मुद्दे, बाद में होगी बैठक
बोर्ड बैठक के दौरान हंगामे के आसार थे, पर ऐसा हुआ नहीं। सभासदों को बाद में बैठक कर मुद्दे उठाने को कहा गया, जिस पर सहमति बन गई और सभासदों ने सर्वसम्मति से बजट पास कर दिया। सभासदों का कहना था कि शहर की सफाई व्यवस्था, जल निकासी और अधूरे पड़े विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराना प्राथमिकता है, इसलिए बजट पास करा दिया गया।
नए स्रोतों से होगी घाटे की भरपाई
सबसे बड़ा सवाल यह बना रहा कि करीब 41 करोड़ रुपये के अंतर की भरपाई कैसे की जाएगी। इस संबंध में बताया गया कि इस दौरान कई नए आय के स्रोत बनेंगे, जिनसे इसकी भरपाई हो जाएगी। इसके अलावा सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता भी भरपाई में अहम भूमिका निभाएगी।
कहीं अटक न जाएं विकास कार्य
जिन विकास कार्यों के लिए व्यय प्रस्तावित किया गया है, उनकी भरपाई सरकारी मदद व नए आय के स्रोतों के भरोसे है। सवाल यह भी है कि अगर यह भरपाई नहीं हो सकी तो कई विकास कार्य अटक भी सकते हैं। हालांकि पालिका अधिकारी आश्वस्त हैं कि वे संतुलन बना लेंगे।
ये सभासद रहे उपस्थित
बैठक में जितेंद्र कुमार, शकुंतला देवी, दीपक, उपेंद्र सिंह, अभिलाषा देवी, मंजू, माता प्रसाद, विमला देवी, आरती, माया, ज्योति, राजेश कुमार, सुनीता देवी आदि सभासदों समेत चेयरमैन प्रतिनिधि विजय चौधरी उपस्थित रहे।
सभासद पुत्र के निधन पर हुई शोकसभा
बोर्ड बैठक के बाद वार्ड नंबर 29 से सभासद पुष्पा साहू के पुत्र के निधन पर शोकसभा हुई। इसमें सभी ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद बोर्ड बैठक का समापन हो गया।
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बैठक की अध्यक्षता अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील व पालिकाध्यक्ष गिरजा चौधरी ने की। इसमें पालिका के बजट में आय बढ़ाने के दावे जरूर किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आय का बड़ा हिस्सा अभी भी सरकारी अनुदानों पर निर्भर है। राज्य वित्त आयोग से 45 करोड़ रुपये और 15वें वित्त आयोग से 17 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अलावा मुख्यमंत्री वैश्विक नगर योजना के तहत 8.41 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। स्थानीय स्तर पर भवन कर से 2.20 करोड़ रुपये और दुकान किराया से 30 लाख रुपये आय का लक्ष्य रखा गया है, जो कुल बजट के मुकाबले काफी कम है।
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खर्च में विकास कार्यों को प्राथमिकता, लेकिन संतुलन पर सवाल
व्यय पक्ष में नगर के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सड़क, नाली और नाला निर्माण व मरम्मत के लिए 26 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। भवन निर्माण व मरम्मत के लिए छह करोड़ रुपये, स्वच्छ भारत मिशन के तहत चार करोड़ रुपये और अन्य मदों में भी बजट बढ़ाया गया है। इसके अलावा सफाई व्यवस्था, कार्यालय संचालन और भवनों के रखरखाव पर भी खर्च में वृद्धि की गई है। हालांकि विकास कार्यों पर जोर को सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन आय के मुकाबले अत्यधिक व्यय प्रस्तावित होने से बजट के संतुलन पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय के स्रोत मजबूत नहीं किए गए तो पालिका को भविष्य में वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
सभासदों ने नहीं उठाए मुद्दे, बाद में होगी बैठक
बोर्ड बैठक के दौरान हंगामे के आसार थे, पर ऐसा हुआ नहीं। सभासदों को बाद में बैठक कर मुद्दे उठाने को कहा गया, जिस पर सहमति बन गई और सभासदों ने सर्वसम्मति से बजट पास कर दिया। सभासदों का कहना था कि शहर की सफाई व्यवस्था, जल निकासी और अधूरे पड़े विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराना प्राथमिकता है, इसलिए बजट पास करा दिया गया।
नए स्रोतों से होगी घाटे की भरपाई
सबसे बड़ा सवाल यह बना रहा कि करीब 41 करोड़ रुपये के अंतर की भरपाई कैसे की जाएगी। इस संबंध में बताया गया कि इस दौरान कई नए आय के स्रोत बनेंगे, जिनसे इसकी भरपाई हो जाएगी। इसके अलावा सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता भी भरपाई में अहम भूमिका निभाएगी।
कहीं अटक न जाएं विकास कार्य
जिन विकास कार्यों के लिए व्यय प्रस्तावित किया गया है, उनकी भरपाई सरकारी मदद व नए आय के स्रोतों के भरोसे है। सवाल यह भी है कि अगर यह भरपाई नहीं हो सकी तो कई विकास कार्य अटक भी सकते हैं। हालांकि पालिका अधिकारी आश्वस्त हैं कि वे संतुलन बना लेंगे।
ये सभासद रहे उपस्थित
बैठक में जितेंद्र कुमार, शकुंतला देवी, दीपक, उपेंद्र सिंह, अभिलाषा देवी, मंजू, माता प्रसाद, विमला देवी, आरती, माया, ज्योति, राजेश कुमार, सुनीता देवी आदि सभासदों समेत चेयरमैन प्रतिनिधि विजय चौधरी उपस्थित रहे।
सभासद पुत्र के निधन पर हुई शोकसभा
बोर्ड बैठक के बाद वार्ड नंबर 29 से सभासद पुष्पा साहू के पुत्र के निधन पर शोकसभा हुई। इसमें सभी ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद बोर्ड बैठक का समापन हो गया।
