सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Parents cannot be forced to buy books from a single shop.

Jalaun News: अभिभावक को एक ही दुकान से किताब खरीद के लिए नहीं कर सकते बाध्य

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:10 AM IST
विज्ञापन
Parents cannot be forced to buy books from a single shop.
विज्ञापन
उरई। नवीन शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही निजी व कॉन्वेंट स्कूलों में किताबों की खरीद को लेकर मिल रहीं शिकायतों पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक निर्धारित दुकान से पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
Trending Videos


डीएम ने कहा कि कुछ बुक स्टोर द्वारा पुस्तकों के मुद्रित मूल्य (एमआरपी) से अधिक वसूली की शिकायतें मिली हैं जो पूरी तरह अनुचित हैं। ऐसे मामलों की जांच कर संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए तहसील स्तर पर संयुक्त समितियों का गठन किया गया है। इनमें एसडीएम, सीओ व बीईओ शामिल रहेंगे। डीआईओएस व बीएसए को निर्देशित किया गया है कि सभी विद्यालय अभिभावकों को एनसीईआरटी व अनुमोदित पुस्तकों की सूची उपलब्ध कराएं, ताकि वे सुविधा अनुसार कहीं से भी पुस्तकें खरीद सकें। संयुक्त निरीक्षण नियमित रूप से होंगे और उनकी साप्ताहिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी।




निजी स्कूल फीस पर सख्ती, मनमानी वसूली पर लगेगी रोक

संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। जिले में निजी विद्यालयों की फीस व्यवस्था को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश शुल्क विनियमन अधिनियम-2018 व संशोधन-2020 के तहत लागू की जा रही है।

निर्देशों के अनुसार बेसिक, माध्यमिक, सीबीएसई या आईसीएसई से संचालित होने वाले सभी विद्यालयों को नए सत्र से पहले फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी। प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले फीस का पूरा विवरण स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।

फीस अब मासिक, तिमाही या छमाही किस्तों में ही ली जा सकेगी, वार्षिक शुल्क एकमुश्त लेने की अनुमति नहीं होगी। सत्र के बीच फीस बढ़ाने पर रोक रहेगी और हर भुगतान पर रसीद देना अनिवार्य होगा।

डीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यूनिफॉर्म में बदलाव भी पांच वर्ष से पहले नहीं किया जाएगा। जब तक समिति से अनुमति न मिल जाए। फीस वृद्धि के लिए विद्यालयों को तीन माह पहले जिला शुल्क नियामक समिति के समक्ष प्रस्ताव देना होगा। नियमों के उल्लंघन पर पहली बार अधिक वसूली गई फीस वापस कराने के साथ पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा उल्लंघन पर फिर से धन वापसी के साथ एक लाख रुपये तक का दंड निर्धारित है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालयों में इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed