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Jalaun News: डॉक्टर और स्टाफ की कमी से सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जांच में बाधा
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फोटो-7-डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को ज्ञापन देते सहकारी संघ कैथेरी के सभापति ज्ञानेंद्र तिवारी। स्
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उरई। सहकारी संघ कैथेरी के सभापति ज्ञानेंद्र तिवारी ने उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात कर जालौन जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों, कर्मचारियों व विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इस वजह से मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच भी नहीं हो पा रही हैं।
सभापति द्वारा सौंपे गए तीन सूत्री ज्ञापन में बताया गया कि मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के कुल 256 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 115 ही कार्यरत हैं। नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की देखरेख और उपचार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में बताया कि मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने के कारण अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
इससे मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। इसी प्रकार कार्डियोलॉजिस्ट के अभाव में हृदय रोगियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ईको जैसी आवश्यक जांच न हो पाने के कारण मरीजों को बाहर रेफर किया जाता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
उन्होंने बताया कि जिले का यह राजकीय मेडिकल कॉलेज न केवल जिले के मरीजों को बल्कि हमीरपुर, महोबा, औरैया एवं कानपुर देहात जैसे पड़ोसी जिलों के मरीजों को भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। ऐसे में सुविधाओं की कमी का असर बड़ी आबादी पर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि मेडिकल कॉलेज में शीघ्र ही आवश्यक स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति कराई जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
सभापति के अनुसार डिप्टी सीएम ने समस्याओं को गंभीरता से सुना और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है।
इनसेट
समय पर मिला उपचार, मरीज को राहत
शहर के मोहल्ला रामनगर निवासी बाबू सिंह (72) को गुरुवार की शाम करीब छह बजे सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। मरीज की हालत गंभीर देखते हुए इमरजेंसी में तैनात डॉ. दीपांशु जोशी ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया।
जांच के दौरान मरीज का ईसीजी कराया गया, जिसमें उन्हें हार्ट अटैक होने की पुष्टि हुई। इसकी सूचना तुरंत कंसलटेंट डॉ. कुलदीप एवं सीनियर रेजीडेंट डॉ. नेहा को दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह के मार्गदर्शन में मरीज को तुरंत उपचार प्रदान करने का निर्णय लिया गया। डॉक्टरों की टीम ने रात 8 बजकर 40 मिनट पर थ्रोम्बोलिसिस प्रक्रिया शुरू की गई। जिसमें इंजेक्टेबल थेरेपी का प्रयोग किया गया।
इंजेक्शन लगाए जाने के दस मिनट बाद ही मरीज के सीने के दर्द में स्पष्ट रूप से राहत मिली, जिससे परिजनों ने भी राहत की सांस ली। समय पर किए गए इलाज और टीम वर्क के चलते मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।
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सभापति द्वारा सौंपे गए तीन सूत्री ज्ञापन में बताया गया कि मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स के कुल 256 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 115 ही कार्यरत हैं। नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण मरीजों की देखरेख और उपचार व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में बताया कि मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति न होने के कारण अल्ट्रासाउंड एवं सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
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इससे मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। इसी प्रकार कार्डियोलॉजिस्ट के अभाव में हृदय रोगियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ईको जैसी आवश्यक जांच न हो पाने के कारण मरीजों को बाहर रेफर किया जाता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
उन्होंने बताया कि जिले का यह राजकीय मेडिकल कॉलेज न केवल जिले के मरीजों को बल्कि हमीरपुर, महोबा, औरैया एवं कानपुर देहात जैसे पड़ोसी जिलों के मरीजों को भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। ऐसे में सुविधाओं की कमी का असर बड़ी आबादी पर पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि मेडिकल कॉलेज में शीघ्र ही आवश्यक स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति कराई जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
सभापति के अनुसार डिप्टी सीएम ने समस्याओं को गंभीरता से सुना और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है।
इनसेट
समय पर मिला उपचार, मरीज को राहत
शहर के मोहल्ला रामनगर निवासी बाबू सिंह (72) को गुरुवार की शाम करीब छह बजे सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। मरीज की हालत गंभीर देखते हुए इमरजेंसी में तैनात डॉ. दीपांशु जोशी ने तत्काल प्राथमिक उपचार शुरू किया।
जांच के दौरान मरीज का ईसीजी कराया गया, जिसमें उन्हें हार्ट अटैक होने की पुष्टि हुई। इसकी सूचना तुरंत कंसलटेंट डॉ. कुलदीप एवं सीनियर रेजीडेंट डॉ. नेहा को दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह के मार्गदर्शन में मरीज को तुरंत उपचार प्रदान करने का निर्णय लिया गया। डॉक्टरों की टीम ने रात 8 बजकर 40 मिनट पर थ्रोम्बोलिसिस प्रक्रिया शुरू की गई। जिसमें इंजेक्टेबल थेरेपी का प्रयोग किया गया।
इंजेक्शन लगाए जाने के दस मिनट बाद ही मरीज के सीने के दर्द में स्पष्ट रूप से राहत मिली, जिससे परिजनों ने भी राहत की सांस ली। समय पर किए गए इलाज और टीम वर्क के चलते मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।
