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Jaunpur News: बूंदाबांदी से बढ़ी गलन, बारिश की संभावना
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ठंड के कारण लोहिया पार्क में दिखे गिने लोग। संवाद
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-दिनभर सूर्यदेव के नहीं हुए दर्शन, दुकानों में नहीं दिखे ग्राहक
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। मौसम ने अचानक करवट बदल ली। शनिवार को बूंदाबांदी ने गलन बढ़ा दी, मौसम के जानकारों ने बताया कि तीन दिनों में बारिश की संभावना है। पूरे दिन बादल छाए रहे। भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हुए।
एक दिन पहले अच्छी धूप के बाद शनिवार मौसम बदल गया। शनिवार भोर से बूूंदाबांदी शुरू हो गई। साथ ही पछुआ हवा के चलते गलन बढ़ गई, इसके कारण कमरे में बैठने पर ठंड लग रही थी। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा प्रथम के अध्यक्ष सुरेश कन्नौजिया ने बताया कि आने वाले तीन दिन में बारिश होने की संभावना है।
शनिवार को अधिकतम तापमान 19 और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बूंदाबांदी से ठंड और गलन काफी बढ़ गई है, इससे दिन में भी सूरज के दर्शन नहीं हुए। जनजीवन प्रभावित हुआ। बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी हुई। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि यह स्थिति सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बनी है। मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं चल रही हैं। गलन बढ़ने से चौराहों-तिराहों पर राहगीर ठिठुरते नजर आए। बूंदाबांदी बंद हुई तो लगा कि मौसम खुल जाएगा और धूप होगी। तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते तीन-चार दिनों तक बादल छाए रहने की संभावना है। बरसात नहीं हुई लेकिन लगातार बादल गहराए रहने से लोगों की कंपकंपी छूट रही है। सर्दी के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। आसमान में छाए काले बादलों के बीच दिनभर सूर्यदेव दिखाई नहीं दिए।
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जिला अस्पताल में 477 मरीज ओपीडी में पहुंचे
ठंड के चलते शनिवार को जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी कम रही। अवकाश के चलते दोपहर 12 बजे तक चली ओपीडी में इलाज के लिए 477 मरीज पहुंचे। इसमें ज्यादातर सर्दी, खांसी, सांस के मरीज अधिक रहे। आम दिनों की अपेक्षा 60 फीसदी ओपीडी कम रही। आम दिनों में जहां 1200 से 1400 मरीज ओपीडी में आते थे, वहीं शनिवार को महज 477 मरीज ही इलाज के लिए पहुंचे। दोपहर 12 बजे अस्पताल में सन्नाटा पसर गया। मरीज नहीं रहने के कारण डॉक्टर भी ओपीडी के बाद घर चले गए। जरूरी होने पर ही मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
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पार्कों में भी घूमने वालों की संख्या रही काफी कम
नगर के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित लोहिया पार्क में रोज की अपेक्षा शनिवार को घूमने वाले लोगों की संख्या काफी कम रही। आम दिन में शाम को जहां करीब एक हजार से अधिक लोग घूमने के लिए आते थे, वहीं शनिवार को 200 से करीब लोग घूमने पहुंचे। ठंड और गलन के चलते पांच बजे ही लोग घर के लिए लौट गए। बाहर लगने वाली झूले, चाट और चाय की दुकानें भी जल्द बंद हो गईं। दिन में भी घूमने वालों की संख्या काफी कम रही है। सामान्य दिनों में लोहिया पार्क देर शाम तक गुलजार रहता है।
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लता वाली फसलों के लिए खराब समय
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा प्रथम के अध्यक्ष सुरेश कन्नौजिया ने बताया कि आद्रता 40 के नीचे और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे हो तो बैक्टिरियां आक्रमण ज्यादा करती हैं। इसके लिए किसान प्राकृतिक तरीका अपना रहे हैं तो फसल में धुआं और हल्की सिंचाई कर सकते हैं। सल्फर के साथ ही यूरिया का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि लता वाली सब्जियों मौसम के लिए ठीक नहीं हैं। इसके बजाय के लिए किसान डाइथैएम 45 या अन्य पंजीसाइड का छिड़काव एक-एक सप्ताह के अतंराल पर दो से तीन बार जरूर करें, ताकि फसल को बचाया सके। साथ ही जो किसान इस समय फसल की सिंचाई करने वाले हैं वह तीन दिन रुक जाएं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। मौसम ने अचानक करवट बदल ली। शनिवार को बूंदाबांदी ने गलन बढ़ा दी, मौसम के जानकारों ने बताया कि तीन दिनों में बारिश की संभावना है। पूरे दिन बादल छाए रहे। भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हुए।
एक दिन पहले अच्छी धूप के बाद शनिवार मौसम बदल गया। शनिवार भोर से बूूंदाबांदी शुरू हो गई। साथ ही पछुआ हवा के चलते गलन बढ़ गई, इसके कारण कमरे में बैठने पर ठंड लग रही थी। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा प्रथम के अध्यक्ष सुरेश कन्नौजिया ने बताया कि आने वाले तीन दिन में बारिश होने की संभावना है।
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शनिवार को अधिकतम तापमान 19 और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बूंदाबांदी से ठंड और गलन काफी बढ़ गई है, इससे दिन में भी सूरज के दर्शन नहीं हुए। जनजीवन प्रभावित हुआ। बुजुर्गों और बच्चों को परेशानी हुई। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि यह स्थिति सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बनी है। मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं चल रही हैं। गलन बढ़ने से चौराहों-तिराहों पर राहगीर ठिठुरते नजर आए। बूंदाबांदी बंद हुई तो लगा कि मौसम खुल जाएगा और धूप होगी। तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते तीन-चार दिनों तक बादल छाए रहने की संभावना है। बरसात नहीं हुई लेकिन लगातार बादल गहराए रहने से लोगों की कंपकंपी छूट रही है। सर्दी के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। आसमान में छाए काले बादलों के बीच दिनभर सूर्यदेव दिखाई नहीं दिए।
जिला अस्पताल में 477 मरीज ओपीडी में पहुंचे
ठंड के चलते शनिवार को जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी कम रही। अवकाश के चलते दोपहर 12 बजे तक चली ओपीडी में इलाज के लिए 477 मरीज पहुंचे। इसमें ज्यादातर सर्दी, खांसी, सांस के मरीज अधिक रहे। आम दिनों की अपेक्षा 60 फीसदी ओपीडी कम रही। आम दिनों में जहां 1200 से 1400 मरीज ओपीडी में आते थे, वहीं शनिवार को महज 477 मरीज ही इलाज के लिए पहुंचे। दोपहर 12 बजे अस्पताल में सन्नाटा पसर गया। मरीज नहीं रहने के कारण डॉक्टर भी ओपीडी के बाद घर चले गए। जरूरी होने पर ही मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
पार्कों में भी घूमने वालों की संख्या रही काफी कम
नगर के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित लोहिया पार्क में रोज की अपेक्षा शनिवार को घूमने वाले लोगों की संख्या काफी कम रही। आम दिन में शाम को जहां करीब एक हजार से अधिक लोग घूमने के लिए आते थे, वहीं शनिवार को 200 से करीब लोग घूमने पहुंचे। ठंड और गलन के चलते पांच बजे ही लोग घर के लिए लौट गए। बाहर लगने वाली झूले, चाट और चाय की दुकानें भी जल्द बंद हो गईं। दिन में भी घूमने वालों की संख्या काफी कम रही है। सामान्य दिनों में लोहिया पार्क देर शाम तक गुलजार रहता है।
लता वाली फसलों के लिए खराब समय
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा प्रथम के अध्यक्ष सुरेश कन्नौजिया ने बताया कि आद्रता 40 के नीचे और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे हो तो बैक्टिरियां आक्रमण ज्यादा करती हैं। इसके लिए किसान प्राकृतिक तरीका अपना रहे हैं तो फसल में धुआं और हल्की सिंचाई कर सकते हैं। सल्फर के साथ ही यूरिया का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि लता वाली सब्जियों मौसम के लिए ठीक नहीं हैं। इसके बजाय के लिए किसान डाइथैएम 45 या अन्य पंजीसाइड का छिड़काव एक-एक सप्ताह के अतंराल पर दो से तीन बार जरूर करें, ताकि फसल को बचाया सके। साथ ही जो किसान इस समय फसल की सिंचाई करने वाले हैं वह तीन दिन रुक जाएं।
