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Jhansi News: सफाईकर्मियों की संख्या पर गोलमोल जवाब, सवा करोड़ खर्च फिर भी अतिक्रमण जस का तस
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कार्यकारिणी की बैठक में नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की संख्या पर एक नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग के दोनों चिकित्सक गोलमोल जवाब देते रहे। इस पर पूरा हॉल जहां ठहाकों से गूंज उठा, वहीं मेयर ने फटकार लगाई। इसके अलावा हर साल सवा करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी महानगर में अतिक्रमण की स्थिति जस का तस रहने पर पार्षदों ने सवाल खड़े किए।
मेयर बिहारी लाल आर्य ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धीरेंद्र गुप्ता से पूछा कि नगर निगम में कितने सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जरूरत है। गोलमोल जवाब सुनकर मेयर खफा हो गए और एनएसए को डांटकर बैठा दिया। फिर उन्होंने वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनीत कुमार से यही सवाल पूछा। उन्होंने 100 कर्मचारियों की कमी बताई। फिर बोले कि 2011 की जनगणना के अनुसार सफाई कर्मचारियों की संख्या पूरी है। इस बीच एक जोनल अधिकारी कुछ बोलने लगे तो उन्हें भी डांट पड़ गई। मेयर ने कहा कि पिछली बैठकों में तो बोलते रहे हो कि 400 से 500 कर्मचारी की कमी है। इसके बाद डॉ. धीरेंद्र बोले कि नगर निगम में 2100 कर्मचारी होने चाहिए। अभी 1680 तैनात हैं। मेयर ने लिखित में प्रस्ताव मांगा। ये भी कहा कि पार्क में माली और गार्ड भी नहीं हैं। इनकी भर्ती की जाएगी।
पार्षद महेश गौतम ने कहा कि एक से सवा करोड़ रुपये हर साल अतिक्रमण दस्ते पर नगर निगम खर्च कर रहा है। इसके बाद भी रिजल्ट शून्य है। जो अतिक्रमण किए हैं, उन पर जुर्माना लगाना चाहिए। दोबारा अतिक्रमण मिले तो दुकानदार पर दोगुना जुर्माना लगाया जाए। बीकेडी पर दुकानदार ने फुटपाथ पर सामान रखा है। पार्षद प्रवीण लखेरा ने कहा कि उनके वार्ड आठ में नई बस्ती में करीब 250 मीटर सड़क का टेंडर छह महीने पहले स्वीकृत हो चुका है। आठ लाख का काम था। अब तक वर्कऑर्डर जारी नहीं हुआ। कार्यकारिणी की बैठक में जानकारी दे रहे हैं कि दूसरे काम का टेंडर स्वीकृत हो चुका है। वह बैठक छोड़कर जाने लगे और बोले कि फाइल स्वीकृत नहीं हुई तो धरना दे दूंगा। बाद में नगर आयुक्त आकांक्षा राणा के आश्वासन पर वह माने।
दिनेश प्रताप सिंह ने अपने वार्ड में सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला उठाया। नगर आयुक्त ने पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिया। नरेंद्र किशोर नीलू समेत कुछ पार्षदों ने कहा कि सदन की स्वीकृति के बाद भी अनुपालन नहीं हो रहा है। 10-10 लाख की निधि तय कर दी थी, फिर बंद क्यों कर दी गई। नगर आयुक्त ने कहा कि जरूरत के अनुसार काम हो रहे हैं। मेयर ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष खत्म होने में छह दिन बचे हैं। ऐसे में पार्षदों के जरूरी काम करवाए जाएं।
लखन कुशवाहा ने कहा कि भू-माफिया के खिलाफ सिर्फ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए था। पार्षदों ने पोर्टाकेबिन भी सड़क से नहीं हटवाने का मामला उठाया। बैठक में 490 करोड़ के बजट पर भी मुहर लगी। इस दौरान अपर नगर आयुक्त रोली गुप्ता, मुख्य अभियंता राजवीर सिंह, पशु कल्याण अधिकारी डॉ. राघवेंद्र सिंह, सहायक नगर आयुक्त सीपी पांडेय आदि मौजूद रहे।
ये भी बोले पार्षद
- पार्षद नरेंद्र किशोर ने कहा कि वार्ड 26 में ठाकुरबाबा मंदिर के पास नाले के दोनों ओर अतिक्रमण हो रहा है। ऐसे में नाला सफाई नहीं हो पाएगी और वार्ड में जलभराव होगा। यहां लगे नगर निगम के बोर्ड भी लोगों ने उखाड़ दिए हैं। तत्काल कार्रवाई की जाए।
- उपसभापति आशीष तिवारी ने कहा कि राज्य वित्त से सालभर में उनके वार्ड में दो ही काम हुए। मुकेश सोनी ने कहा कि उनके वार्ड में नौ लाख के काम का बजट घटाकर दो लाख रुपये कर दिया गया। ये भी आरोप लगाया कि नगर निगम के रसीद के कट्टे अलग से छपवा लिए गए हैं और वसूली जाने वाली जुर्माना राशि निगम के खाते में जमा नहीं होती।
- पार्षद मोनिका गुप्ता ने कहा कि उनके वार्ड में पांच महीने पहले सड़क का टेंडर हो चुका है। अब तक वर्कऑर्डर जारी नहीं किया गया है। मेयर ने अफसरों से पूछा कि ऐसी स्थिति क्यों है। टेंडर स्वीकृत होने के एक हफ्ते के अंदर वर्कऑर्डर जारी होना चाहिए।
- पार्षद विकास खत्री ने निर्माण विभाग में जेई की संख्या बढ़ाने की मांग रखी। मेयर ने निर्माण विभाग के जेई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनका काम ठीक नहीं है। वह खुद न जाकर काम के मूल्यांकन के लिए अपने लोग भेजते हैं, जो गलत एस्टीमेट बना देते हैं।
- प्रवीण लखेरा ने कहा कि निजी कॉलोनी में रोड डाली गई है। नगर आयुक्त ने कहा कि कॉलोनी हैंडओवर की जा चुकी है और सड़क के लिए भी उन्हीं ने बजट दिया है। महेश गौतम ने कहा कि कॉलोनी हैंडओवर होती है तो जेडीए से एनओसी लेनी पड़ती है कि सारे काम पूरे हैं। अगर काम आधे-अधूरे थे तो हैंडओवर कैसे ले लिया।
- पार्षद बालस्वरूप साहू ने कहा कि हर वार्ड में स्वागत द्वार बने। आर्यकन्या चौराहा पर शौचालय बनवाने की भी मांग की। दिनेश प्रताप सिंह ने भी अपने वार्ड में मेजर ध्यानचंद के नाम से 29 अगस्त से पहले द्वार बनाने की मांग की।
मेयर ने पूछा- पार्किंग के मामले में क्या कार्रवाई हुई
मेयर ने पूछा कि पार्किंग के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। नगर आयुक्त ने इस मुद्दे पर जवाब दिया। कहा कि जनवरी में रिपोर्ट आई। फर्म को जवाब देने के लिए तीन महीने का नोटिस दिया गया है। एक हफ्ते पहले जवाब आया है। उसे मानक अनुसार काम करने के लिए एक महीने का फिर समय दिया जाएगा। अगर फिर भी व्यवस्था नहीं सुधरी तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। पार्षद दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि फर्म ने वित्तीय अनियमितता की है। उसके खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। नगर आयुक्त ने कहा कि बकाया जमा न करने पर कार्रवाई होगी।
पार्षद मुकेश सोनी ने पंचकुइयां की पार्किंग का मुद्दा उठाया। कहा कि यहां नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। सिर्फ 18 हजार रुपये की आय के लिए यहां नौ दिन की पार्किंग का ठेका दे दिया गया। अपर नगर आयुक्त राहुल यादव ने कहा कि लोगों को वाहन खड़ा करने में परेशानी न हो और आवागमन सुचारु रहे, इसलिए ठेका दिया गया है। पार्षद ने कहा कि ठेका देने से पहले उनसे बात करना जरूरी तक नहीं समझा गया। मेयर ने कहा कि बिना पार्षद की सहमति लिए उनके वार्ड के इस तरह के निर्णय अफसर सीधे न लें।
झांसी। कार्यकारिणी की बैठक में नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की संख्या पर एक नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग के दोनों चिकित्सक गोलमोल जवाब देते रहे। इस पर पूरा हॉल जहां ठहाकों से गूंज उठा, वहीं मेयर ने फटकार लगाई। इसके अलावा हर साल सवा करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी महानगर में अतिक्रमण की स्थिति जस का तस रहने पर पार्षदों ने सवाल खड़े किए।
मेयर बिहारी लाल आर्य ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धीरेंद्र गुप्ता से पूछा कि नगर निगम में कितने सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जरूरत है। गोलमोल जवाब सुनकर मेयर खफा हो गए और एनएसए को डांटकर बैठा दिया। फिर उन्होंने वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनीत कुमार से यही सवाल पूछा। उन्होंने 100 कर्मचारियों की कमी बताई। फिर बोले कि 2011 की जनगणना के अनुसार सफाई कर्मचारियों की संख्या पूरी है। इस बीच एक जोनल अधिकारी कुछ बोलने लगे तो उन्हें भी डांट पड़ गई। मेयर ने कहा कि पिछली बैठकों में तो बोलते रहे हो कि 400 से 500 कर्मचारी की कमी है। इसके बाद डॉ. धीरेंद्र बोले कि नगर निगम में 2100 कर्मचारी होने चाहिए। अभी 1680 तैनात हैं। मेयर ने लिखित में प्रस्ताव मांगा। ये भी कहा कि पार्क में माली और गार्ड भी नहीं हैं। इनकी भर्ती की जाएगी।
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पार्षद महेश गौतम ने कहा कि एक से सवा करोड़ रुपये हर साल अतिक्रमण दस्ते पर नगर निगम खर्च कर रहा है। इसके बाद भी रिजल्ट शून्य है। जो अतिक्रमण किए हैं, उन पर जुर्माना लगाना चाहिए। दोबारा अतिक्रमण मिले तो दुकानदार पर दोगुना जुर्माना लगाया जाए। बीकेडी पर दुकानदार ने फुटपाथ पर सामान रखा है। पार्षद प्रवीण लखेरा ने कहा कि उनके वार्ड आठ में नई बस्ती में करीब 250 मीटर सड़क का टेंडर छह महीने पहले स्वीकृत हो चुका है। आठ लाख का काम था। अब तक वर्कऑर्डर जारी नहीं हुआ। कार्यकारिणी की बैठक में जानकारी दे रहे हैं कि दूसरे काम का टेंडर स्वीकृत हो चुका है। वह बैठक छोड़कर जाने लगे और बोले कि फाइल स्वीकृत नहीं हुई तो धरना दे दूंगा। बाद में नगर आयुक्त आकांक्षा राणा के आश्वासन पर वह माने।
दिनेश प्रताप सिंह ने अपने वार्ड में सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला उठाया। नगर आयुक्त ने पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिया। नरेंद्र किशोर नीलू समेत कुछ पार्षदों ने कहा कि सदन की स्वीकृति के बाद भी अनुपालन नहीं हो रहा है। 10-10 लाख की निधि तय कर दी थी, फिर बंद क्यों कर दी गई। नगर आयुक्त ने कहा कि जरूरत के अनुसार काम हो रहे हैं। मेयर ने कहा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष खत्म होने में छह दिन बचे हैं। ऐसे में पार्षदों के जरूरी काम करवाए जाएं।
लखन कुशवाहा ने कहा कि भू-माफिया के खिलाफ सिर्फ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होना चाहिए था। पार्षदों ने पोर्टाकेबिन भी सड़क से नहीं हटवाने का मामला उठाया। बैठक में 490 करोड़ के बजट पर भी मुहर लगी। इस दौरान अपर नगर आयुक्त रोली गुप्ता, मुख्य अभियंता राजवीर सिंह, पशु कल्याण अधिकारी डॉ. राघवेंद्र सिंह, सहायक नगर आयुक्त सीपी पांडेय आदि मौजूद रहे।
ये भी बोले पार्षद
- पार्षद नरेंद्र किशोर ने कहा कि वार्ड 26 में ठाकुरबाबा मंदिर के पास नाले के दोनों ओर अतिक्रमण हो रहा है। ऐसे में नाला सफाई नहीं हो पाएगी और वार्ड में जलभराव होगा। यहां लगे नगर निगम के बोर्ड भी लोगों ने उखाड़ दिए हैं। तत्काल कार्रवाई की जाए।
- उपसभापति आशीष तिवारी ने कहा कि राज्य वित्त से सालभर में उनके वार्ड में दो ही काम हुए। मुकेश सोनी ने कहा कि उनके वार्ड में नौ लाख के काम का बजट घटाकर दो लाख रुपये कर दिया गया। ये भी आरोप लगाया कि नगर निगम के रसीद के कट्टे अलग से छपवा लिए गए हैं और वसूली जाने वाली जुर्माना राशि निगम के खाते में जमा नहीं होती।
- पार्षद मोनिका गुप्ता ने कहा कि उनके वार्ड में पांच महीने पहले सड़क का टेंडर हो चुका है। अब तक वर्कऑर्डर जारी नहीं किया गया है। मेयर ने अफसरों से पूछा कि ऐसी स्थिति क्यों है। टेंडर स्वीकृत होने के एक हफ्ते के अंदर वर्कऑर्डर जारी होना चाहिए।
- पार्षद विकास खत्री ने निर्माण विभाग में जेई की संख्या बढ़ाने की मांग रखी। मेयर ने निर्माण विभाग के जेई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनका काम ठीक नहीं है। वह खुद न जाकर काम के मूल्यांकन के लिए अपने लोग भेजते हैं, जो गलत एस्टीमेट बना देते हैं।
- प्रवीण लखेरा ने कहा कि निजी कॉलोनी में रोड डाली गई है। नगर आयुक्त ने कहा कि कॉलोनी हैंडओवर की जा चुकी है और सड़क के लिए भी उन्हीं ने बजट दिया है। महेश गौतम ने कहा कि कॉलोनी हैंडओवर होती है तो जेडीए से एनओसी लेनी पड़ती है कि सारे काम पूरे हैं। अगर काम आधे-अधूरे थे तो हैंडओवर कैसे ले लिया।
- पार्षद बालस्वरूप साहू ने कहा कि हर वार्ड में स्वागत द्वार बने। आर्यकन्या चौराहा पर शौचालय बनवाने की भी मांग की। दिनेश प्रताप सिंह ने भी अपने वार्ड में मेजर ध्यानचंद के नाम से 29 अगस्त से पहले द्वार बनाने की मांग की।
मेयर ने पूछा- पार्किंग के मामले में क्या कार्रवाई हुई
मेयर ने पूछा कि पार्किंग के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। नगर आयुक्त ने इस मुद्दे पर जवाब दिया। कहा कि जनवरी में रिपोर्ट आई। फर्म को जवाब देने के लिए तीन महीने का नोटिस दिया गया है। एक हफ्ते पहले जवाब आया है। उसे मानक अनुसार काम करने के लिए एक महीने का फिर समय दिया जाएगा। अगर फिर भी व्यवस्था नहीं सुधरी तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। पार्षद दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि फर्म ने वित्तीय अनियमितता की है। उसके खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। नगर आयुक्त ने कहा कि बकाया जमा न करने पर कार्रवाई होगी।
पार्षद मुकेश सोनी ने पंचकुइयां की पार्किंग का मुद्दा उठाया। कहा कि यहां नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। सिर्फ 18 हजार रुपये की आय के लिए यहां नौ दिन की पार्किंग का ठेका दे दिया गया। अपर नगर आयुक्त राहुल यादव ने कहा कि लोगों को वाहन खड़ा करने में परेशानी न हो और आवागमन सुचारु रहे, इसलिए ठेका दिया गया है। पार्षद ने कहा कि ठेका देने से पहले उनसे बात करना जरूरी तक नहीं समझा गया। मेयर ने कहा कि बिना पार्षद की सहमति लिए उनके वार्ड के इस तरह के निर्णय अफसर सीधे न लें।