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UP: पहले जमीन की लिखा-पढ़ी, फिर क्रिया-कर्म, भाई-बहन के बीच विवाद, 39 घंटे बाद हो पाया पिता का अंतिम संस्कार

Mon, 17 Aug 2026 12:10 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 17 Aug 2026 12:10 PM IST
सार

यूपी के झांसी जिले के समथर के गांव चिरगांवखुर्द से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। भाई-बहन के विवाद में पिता का अंतिम संस्कार 39 घंटे बाद हो पाया। पहले सब रजिस्ट्रार कार्यालय में जमीन की लिखा-पढ़ी हुई। इसके बाद क्रिया-कर्म किया गया।

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father last rites could only be performed after 39 hours due to dispute between his son and daughter In Jhansi
भाई-बहन के बीच विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

झांसी के समथर थाना इलाके के ग्राम चिरगांवखुर्द में भाई-बहन के बीच जमीन को लेकर हुए विवाद की वजह से पिता के शव का 39 घंटे बाद अंतिम संस्कार हो गया। बहन ने पहले सब रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचकर जमीन की लिखा-पढ़ी की। इसके बाद पिता के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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समथर थाना क्षेत्र के चिरगांव खुर्द निवासी ठाकुरदास कुशवाहा की बृहस्पतिवार सुबह करीब चार बजे मौत हो गई। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। पिता की मौत के बाद परिवार में मातम था, लेकिन कुछ ही देर में वर्षों से चला आ रहा जमीन का विवाद फिर सामने आ गया। 
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मृतक के बेटे विवेक के अनुसार, उनकी बहन अंगूरी ने पिता की पांच बीघा जमीन में से दो बीघा अपने नाम करा ली थी। इसी जमीन को लेकर भाई-बहन के बीच विवाद चल रहा था। पिता की मृत्यु के बाद दोनों बेटों ने साफ कह दिया कि जब तक जमीन का हिस्सा वापस नहीं किया जाता, वे पिता का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
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मामला बिगड़ने के बाद गांव के लोग दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने में जुट गए। लेकिन, तमाम कोशिशों के बीच बात नहीं बन पाई। ऐसे में शव घर पर ही रखा रहा। रात में भी रिश्तेदार और ग्रामीण परिवार को समझाने जुटे रहे।

पिता के शव को घर पर रखा, बहन-भाई मोंठ के सब रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे
इस दरम्यान सहमति बनी की शुक्रवार की सुबह बहन भाइयों के नाम दो बीघा जमीन की रजिस्ट्री करेगी, इसके बाद पिता का अंतिम संस्कार किया जाएगा। शुक्रवार को पिता के शव को घर पर रखा छोड़ बहन-भाई मोंठ के सब रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे।

 

यहां दिन भर जमीन की लिखा-पढ़ी की कार्यवाही की जाती रही। हालांकि, ओटीपी न आने की वजह से रजिस्ट्री नहीं हो पाई, लेकिन तय हुआ कि सोमवार को सब रजिस्ट्रार कार्यालय खुलने पर बाकी की कार्यवाही पूरी कर ली जाएगी। यहां से लौटकर बेटों ने 39 घंटे बाद शुक्रवार की शाम तकरीबन सात पिता का अंतिम संस्कार किया।

समथर में किया अंतिम संस्कार
चिरगांव खुर्द में मुक्तिधाम के लिए भूमि तो चिह्नित है, परंतु वहां शेड नहीं है। शुक्रवार की शाम बारिश हो रही थी। ऐसे में गांव में अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका। इस पर शव को समथर लाया गया और फिर यहां अंतिम संस्कार किया गया।
 

पुलिस ने नहीं निभाई अपनी भूमिका
इस चर्चित मामले में पुलिस ने अपनी भूमिका का निर्वहन नहीं किया था। थाना प्रभारी अतुल कुमार राजपूत ने इस मामले से यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया था कि पारिवारिक जमीन के विवाद के चलते शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। गांव के लोग दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि, अधिवक्ता संदीप यादव के अनुसार बीएनएस की धारा 301 के तहत आपसी झगड़े में अंतिम संस्कार न होने देने, उसमें बाधा डालने या शव के साथ अपमानजनक व्यवहार करने के दोषियों को एक साल की तक की सजा हो सकती है। 

 

संविधान का अनुच्छेद 21 मृतक के सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के अधिकार को संरक्षित करता है। ऐसे में पुलिस के पास अधिकार होता है कि शव को कब्जे में लेकर खुद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराए। लेकिन, इस मामले में समथर पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया। जबकि, पुलिस मौके पर भी पहुंच थी।
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