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Jhansi News: पिता के बरताव से तंग आकर घर से निकली किशोरी, सिम कुचलकर फेंका
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। देवास निवासी किशोरी अपने पिता के बरताव से इतनी तंग आ गई थी कि घर से निकल गई। अपने मोबाइल की सिम मुंह से चबाकर फेंक दी ताकि पिता या पुलिस उसे मोबाइल के जरिये तलाश न सकें। बाल कल्याण समिति के सामने काउंसिलिंग के दौरान उसने अपनी व्यथा सुनाई। हालांकि, पिता को फटकार लगाते हुए समिति ने उसे घर भेज दिया।
देवास की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी घर से भाग गई थी। वहीं, उसकी मुलाकात भैंस चरा रहीं दो बहनों से हो गई। देवास की किशोरी परेशान थी क्योंकि उसके पिता ने उसे रखने से इन्कार कर दिया था। वह 9 साल से अलग रह रही थी। वहीं, मूलरूप से अकबरपुर की रहने वाली दो अन्य बहनों ने उसके साथ महाराष्ट्र जाने की योजना बनाई। मुंबई जाने के लिए वे ट्रेन में बैठ गईं लेकिन वह ट्रेन झांसी जाने वाली थी। झांसी में आरपीएफ ने तीनों किशोरियों को देखा तो उन्हें रेलवे स्टेशन से लाकर चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर दिया।
बाल कल्याण समिति के सामने तीनों को पेश किया गया। समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा व सदस्यगण परवीन खान, कोमल सिंह, दीप्ति सक्सेना, हरीकृष्ण सक्सेना ने काउंसिलिंग की। इस दौरान देवास की किशोरी ने बताया कि 12 मार्च को तीनों भोगनीपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार हुई थीं। अगले दिन झांसी पहुंच गई थीं। समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने तीनों किशोरियों को समझाया कि आगे से वे ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी परेशानी फंस जाएं। तीनों को परिजनों के हवाले कर दिया गया।
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देवास की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी घर से भाग गई थी। वहीं, उसकी मुलाकात भैंस चरा रहीं दो बहनों से हो गई। देवास की किशोरी परेशान थी क्योंकि उसके पिता ने उसे रखने से इन्कार कर दिया था। वह 9 साल से अलग रह रही थी। वहीं, मूलरूप से अकबरपुर की रहने वाली दो अन्य बहनों ने उसके साथ महाराष्ट्र जाने की योजना बनाई। मुंबई जाने के लिए वे ट्रेन में बैठ गईं लेकिन वह ट्रेन झांसी जाने वाली थी। झांसी में आरपीएफ ने तीनों किशोरियों को देखा तो उन्हें रेलवे स्टेशन से लाकर चाइल्ड लाइन को सुपुर्द कर दिया।
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बाल कल्याण समिति के सामने तीनों को पेश किया गया। समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा व सदस्यगण परवीन खान, कोमल सिंह, दीप्ति सक्सेना, हरीकृष्ण सक्सेना ने काउंसिलिंग की। इस दौरान देवास की किशोरी ने बताया कि 12 मार्च को तीनों भोगनीपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार हुई थीं। अगले दिन झांसी पहुंच गई थीं। समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने तीनों किशोरियों को समझाया कि आगे से वे ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी परेशानी फंस जाएं। तीनों को परिजनों के हवाले कर दिया गया।