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Jhansi: नाले पर कब्जा मिलने पर कॉलोनी की एनओसी निरस्त, नगर निगम ने जांच के बाद की कार्रवाई
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 18 Jun 2026 05:53 PM IST
सार
नगर निगम की जांच में उक्त भूमि नाले के रूप में दर्ज मिली, जिस पर कब्जा करके नाले के स्वरूप में परिवर्तन करने की बात सामने आई।
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नगर निगम, झांसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हंसारी में नाले पर कब्जा मिलने पर नगर निगम ने एक कॉलोनी की एनओसी निरस्त कर दी है। शिकायत के बाद जांच में पुष्टि होने के बाद कॉलोनी निदेशक को भेजे नोटिसों के बाद जवाब न मिलने पर ये कार्रवाई की गई है।
वार्ड नौ की पार्षद राखी सिंह परिहार ने नगर निगम में प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि हंसारीगिर्द स्थित भूमि संख्या 1216 रकबा 0.101 हेक्टेयर राजस्व अभिलेख में नाले के रूप में दर्ज है, जो सरकारी भूमि है। इस नाले को एक कॉलोनी ने पूर्ण रूप से घेरकर निर्माण कर लिया है। इस कारण जलभराव की समस्या हो जाती है। पार्षद ने भूमि कब्जामुक्त कराने की मांग की थी। इसके बाद नगर निगम की ओर से टीम भेजकर पैमाइश करवाई गई। संपत्ति अधिकारी के मुताबिक टीम की आख्या में उक्त भूमि नाले के रूप में दर्ज मिली, जिस पर कब्जा करके नाले के स्वरूप में परिवर्तन करने की बात सामने आई। कार्यालय अभिलेख के अनुसार आठ जुलाई 2021 को निर्माणकर्ता की ओर से कुछ मिलजुमला नंबरों पर अनापत्ति ली गई थी। आवेदन के दौरान आवेदक ने 1216 रकबा 0.101 हेक्टेयर नाले की भूमि है। एनओसी जारी करते समय इस शर्त का उल्लेख किया गया था कि इस तलपट चित्र में नाला आता है, उसको खुला छोड़ना जरूरी होगी।
इसके बावजूद आवेदक ने नगर निगम की भूमि को अपनी कॉलोनी की प्लॉटिंग में शामिल कर लिया। इस कारण नाले का अस्तित्व समाप्त होने की स्थिति में है। एनओसी की शर्त का उल्लंघन करने पर कॉलोनी के निदेशक को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। कोई जवाब न आने पर फिर से नोटिस दिया गया। अंतिम नोटिस के बाद भी कोई जवाब न आने पर जुलाई 2021 में जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र को उल्लेखित शर्तों का उल्लंघन करने के कारण निरस्त कर दिया गया है। जेडीए को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया है। नगर आयुक्त आकांक्षा राणा का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
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वार्ड नौ की पार्षद राखी सिंह परिहार ने नगर निगम में प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि हंसारीगिर्द स्थित भूमि संख्या 1216 रकबा 0.101 हेक्टेयर राजस्व अभिलेख में नाले के रूप में दर्ज है, जो सरकारी भूमि है। इस नाले को एक कॉलोनी ने पूर्ण रूप से घेरकर निर्माण कर लिया है। इस कारण जलभराव की समस्या हो जाती है। पार्षद ने भूमि कब्जामुक्त कराने की मांग की थी। इसके बाद नगर निगम की ओर से टीम भेजकर पैमाइश करवाई गई। संपत्ति अधिकारी के मुताबिक टीम की आख्या में उक्त भूमि नाले के रूप में दर्ज मिली, जिस पर कब्जा करके नाले के स्वरूप में परिवर्तन करने की बात सामने आई। कार्यालय अभिलेख के अनुसार आठ जुलाई 2021 को निर्माणकर्ता की ओर से कुछ मिलजुमला नंबरों पर अनापत्ति ली गई थी। आवेदन के दौरान आवेदक ने 1216 रकबा 0.101 हेक्टेयर नाले की भूमि है। एनओसी जारी करते समय इस शर्त का उल्लेख किया गया था कि इस तलपट चित्र में नाला आता है, उसको खुला छोड़ना जरूरी होगी।
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इसके बावजूद आवेदक ने नगर निगम की भूमि को अपनी कॉलोनी की प्लॉटिंग में शामिल कर लिया। इस कारण नाले का अस्तित्व समाप्त होने की स्थिति में है। एनओसी की शर्त का उल्लंघन करने पर कॉलोनी के निदेशक को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। कोई जवाब न आने पर फिर से नोटिस दिया गया। अंतिम नोटिस के बाद भी कोई जवाब न आने पर जुलाई 2021 में जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र को उल्लेखित शर्तों का उल्लंघन करने के कारण निरस्त कर दिया गया है। जेडीए को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया है। नगर आयुक्त आकांक्षा राणा का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
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