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Jhansi: पुलिस अफसर बनकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार, पीड़ित परिवार को फोन कर वसूलते थे रकम

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Thu, 22 Jan 2026 07:03 AM IST
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सार

झांसी के दूर-दराज के इलाके में बैठकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कौशांबी एवं झांसी पुलिस ने साझी कार्रवाई करते हुए कटेरा इलाके में दबिश देकर तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है।

Jhansi: Gang involved in fraud by posing as police officers busted, three arrested
पुलिस - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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झांसी के दूर-दराज के इलाके में बैठकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जालसाज पुलिस अफसर बनकर ठगी करते थे। शिकायत मिलने के बाद कौशांबी एवं झांसी पुलिस ने साझी कार्रवाई करते हुए कटेरा इलाके में दबिश देकर तीन जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से पांच मोबाइल, एक आईफोन, तीन डेबिट कार्ड, 11 आधार कार्ड एवं आठ सिमकार्ड बरामद किए हैं।
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क्षेत्राधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि कौशांबी के सैनी थाना के बनपुरवा मजरा निवासी सुनील कुमार से गुमशुदा किशोरी को बरामद करने के एवज में पचास हजार रुपये की मांग की गई थी। जालसाजों ने खुद को थाने का एसओ बताते हुए पीड़ित परिवार से फोन पर किशोरी को जल्द बरामद कराने का भरोसा दिलाया। सुनील ने जालसाजों के बताए खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया। गुमशुदा की बरामदगी न होने पर पीड़ित परिवार जब थाने पहुंचा तब जालसाजी का पता लगा। सुनील की तहरीर पर सैनी पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी। जालसाजों के कटेरा इलाके में मौजूद होने की सूचना मिली। मंगलवार को सैनी पुलिस झांसी आ पहुंची। दबिश देकर पुलिस ने कटेरा बस स्टैंड के पास से दीपेंद्र यादव, प्रदीप कुमार निवासी खोरियाना का खिरक एवं अजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से पुलिस ने कई डिवाइस बरामद किए हैं। तीनों के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर ऑनलाइन फ्रॉड के तमाम मामले दर्ज हैं। कटेरा थाना प्रभारी अमिराम सिंह के मुताबिक जालसाजों के अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है।
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यूपीकॉप की मदद से करते थे ठगी
तीनों जालसाज बेहद शातिर हैं। पूछताछ के दौरान जालसाजों ने बताया कि वे लोग यूपी कॉप एप से गुमशुदगी के मामले तलाशते थे। उसके बाद उनका नंबर तलाश कर पुलिस अधिकारी बनकर फोन करते थे। उन्होंने बताया कि वे लोग अधिकांश ग्रामीण इलाकों के लोगों को फोन करते थे। पुलिस के नाम पर वे लोग जल्दी भरोसा कर लेते हैं। फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर भी धमकाते थे। उनको गुमराह करके खर्च के नाम पर ऑनलाइन रुपये मंगवाते थे। कई खातों को उन्होंने किराये पर लिया हुआ था, इसमें ही वे पैसे मंगवाते थे। पैसा आने पर मूल खाताधारक को दस फीसदी धनराशि देते थे। पुलिस ने कई बैंकों की पासबुक भी बरामद की है। इसके जरिये उनका हिसाब-किताब रखते थे।


बैकग्राउंड में बजता था पुलिस सायरन
पीड़ित परिवार को अपने प्रभाव में लेने के लिए जालसाज जब फोन करते थे, तब उसके पीछे पुलिस सायरन की आवाज बजती थी। जालसाजों ने बताया कि जिस मोबाइल नंबर से फोन करते थे, उसकी प्रोफाइल पिक्चर में यूपी पुलिस को लोगो लगा रखा था। फोन करने पर ट्रू कॉलर के जरिये भी प्रोफाइल पर यूपी पुलिस का ही लोगो सामने आता था। यह देख लोग उन पर आसानी से यकीन कर लेते थे। आरोपी जब किसी परिवार को झांसे में लेने के लिए फोन करते थे तो बात करते समय पुलिस सायरन व अन्य जरूरी आवाज से विभागीय माहौल बनाते थे। जिससे लोगों को पुलिस विभाग में होने का आभास हो और उनके झांसे में आ सके। एसपी ने बताया कि इन लोगों ने अपनी डीपी में जो तस्वीर लगाई थी वह भी पुलिस की वर्दी वाली होती थी।
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