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Jhansi: मोबाइल पर रोक लगाने वाला झांसी का पहला सरकारी इंटर कॉलेज बना जीआईसी, डीआईओएस ने जारी किया था आदेश
Fri, 31 Jul 2026 06:26 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 31 Jul 2026 06:26 PM IST
सार
विद्यालय प्रशासन का दावा है कि इस निर्णय की सूचना अभिभावकों को दी गई है और उन्होंने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए स्वागत किया है।
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मोबाइल
- फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
झांसी का राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) विद्यार्थियों के मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला सरकारी इंटर कॉलेज बन गया है। करीब 1,700 विद्यार्थियों वाले इस कॉलेज में अब सघन जांच के बाद ही विद्यार्थियों को विद्यालय में प्रवेश मिलेगा। तर्क दिया गया है कि कम से कम जब तक विद्यार्थी कॉलेज में रहेंगे तब तक फोन से दूरी रहेगी। विद्यालय प्रशासन का दावा है कि इस निर्णय की सूचना अभिभावकों को दी गई है और उन्होंने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए स्वागत किया है।
जीआईसी के प्रधानाचार्य सतीश सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों की फोन पर सक्रियता बढ़ती जा रही है और वह अनजाने में जिंदगी का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भी चाहते हैं कि विद्यार्थियों में फोन की बढ़ती लत को दूर किया जाए। इसके मद्देनजर जीआईसी में फोन को प्रतिबंधित कर दिया है, जिसकी सूचना अभिभावकों को पहुंचा दी है।
जरूरत पड़ने पर क्लास टीचर कराएगा बात
प्रधानाचार्य सतीश कुमार ने बताया यदि किसी विद्यार्थी को घर पर बात करने की जरूरत होगी, तो वह क्लास टीचर के फोन से बात करेगा। यदि किसी विद्यार्थी का अपरिहार्य कारण से फोन लाना जरूरी होगा, तो वह क्लास टीचर के पास रखना होगा। जब विद्यार्थी को फोन की जरूरत होगी तब वह फोन लेकर बात करेगा।
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प्रतिबंध लगाने की जरूरत क्यों पड़ी
मोबाइल फोन के माध्यम से सोशल मीडिया पर घंटों बिताने की लत विद्यार्थियों में बढ़ती जा रही है। कोई फोन पर गेम्स खेलता रहता है तो कोई चैटिंग में। कोई सोशल मीडिया पर व्यूवर्स बढ़ाने के लिए रील्स बना अपलोड करने में व्यस्त रहता है। इस वजह से वे पठन-पाठन और सामाजिक संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। कोई कम व्यूवर्स होने की वजह से नित नये जतन करता है तो कोई मानसिक तनाव में रहता है। इसे तमाम विद्यार्थी मानसिक अवसाद की भी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल की मानसिक रोग की ओपीडी में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
विद्यालयों में यथासंभव कम हो फोन का प्रयोग
डीआईओएस रती वर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया पर सक्रियता की वजह से विद्यार्थी मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे हैं। इसके चलते सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों से कहा गया है कि विद्यालयों में फोन का प्रयोग कम कराया जाए।
बोले अभिभावक---
जीआईसी प्रधानाचार्य का फैसला बहुत सही है। फोन से बच्चों का समय बहुत बर्बाद होता है। बच्चों के पास फोन नहीं होगा तो वे पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देंगे। - रचना साहू, दतिया गेट बाहर
मोबाइल के माध्मय से बच्चों मन में तमाम विकृतियां पैदा होती है। वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। जीआईसी प्रधानाचार्य ने बच्चों के हित में फैसला लिया है। - पुष्पा देवी, खजूर बाग
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जीआईसी के प्रधानाचार्य सतीश सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों की फोन पर सक्रियता बढ़ती जा रही है और वह अनजाने में जिंदगी का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भी चाहते हैं कि विद्यार्थियों में फोन की बढ़ती लत को दूर किया जाए। इसके मद्देनजर जीआईसी में फोन को प्रतिबंधित कर दिया है, जिसकी सूचना अभिभावकों को पहुंचा दी है।
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जरूरत पड़ने पर क्लास टीचर कराएगा बात
प्रधानाचार्य सतीश कुमार ने बताया यदि किसी विद्यार्थी को घर पर बात करने की जरूरत होगी, तो वह क्लास टीचर के फोन से बात करेगा। यदि किसी विद्यार्थी का अपरिहार्य कारण से फोन लाना जरूरी होगा, तो वह क्लास टीचर के पास रखना होगा। जब विद्यार्थी को फोन की जरूरत होगी तब वह फोन लेकर बात करेगा।
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प्रतिबंध लगाने की जरूरत क्यों पड़ी
मोबाइल फोन के माध्यम से सोशल मीडिया पर घंटों बिताने की लत विद्यार्थियों में बढ़ती जा रही है। कोई फोन पर गेम्स खेलता रहता है तो कोई चैटिंग में। कोई सोशल मीडिया पर व्यूवर्स बढ़ाने के लिए रील्स बना अपलोड करने में व्यस्त रहता है। इस वजह से वे पठन-पाठन और सामाजिक संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। कोई कम व्यूवर्स होने की वजह से नित नये जतन करता है तो कोई मानसिक तनाव में रहता है। इसे तमाम विद्यार्थी मानसिक अवसाद की भी चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल की मानसिक रोग की ओपीडी में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
विद्यालयों में यथासंभव कम हो फोन का प्रयोग
डीआईओएस रती वर्मा का कहना है कि सोशल मीडिया पर सक्रियता की वजह से विद्यार्थी मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे हैं। इसके चलते सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों से कहा गया है कि विद्यालयों में फोन का प्रयोग कम कराया जाए।
बोले अभिभावक---
जीआईसी प्रधानाचार्य का फैसला बहुत सही है। फोन से बच्चों का समय बहुत बर्बाद होता है। बच्चों के पास फोन नहीं होगा तो वे पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देंगे। - रचना साहू, दतिया गेट बाहर
मोबाइल के माध्मय से बच्चों मन में तमाम विकृतियां पैदा होती है। वे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। जीआईसी प्रधानाचार्य ने बच्चों के हित में फैसला लिया है। - पुष्पा देवी, खजूर बाग