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Jhansi: टीकाकरण में लापरवाही उजागर, कई सीएचसी लक्ष्य से पीछे, एमओआईसी से जवाब तलब
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 20 Mar 2026 10:57 AM IST
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सार
कलक्ट्रेट सभागार में बृहस्पतिवार को हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह सामने आया कि फरवरी तक निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष कई वैक्सीन 11 से 18 प्रतिशत तक कम लगी हैं।
कलक्ट्रेट सभागार में होती जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में टीकाकरण की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। कलक्ट्रेट सभागार में बृहस्पतिवार को हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह सामने आया कि फरवरी तक निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष कई वैक्सीन 11 से 18 प्रतिशत तक कम लगी हैं। इस पर डीएम मृदुल चौधरी ने मऊरानीपुर और बामौर के एमओआईसी से जवाब तलब किया है।
जन्म से पांच वर्ष तक के बच्चों को निमोनिया, दस्त, खसरा, रूबेला, पोलियो, टीबी और टिटनेस जैसी बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाता है। एएनसी पंजीकरण के आधार पर टीकाकरण के लक्ष्य तय किए जाते हैं, लेकिन कई केंद्रों पर प्रगति अपेक्षित नहीं है।
टिटनेस व डिप्थीरिया-2 और बूस्टर डोज के मामले में बड़ागांव, बामौर और चिरगांव सीएचसी लक्ष्य से पीछे हैं। वहीं, एक वर्ष तक के बच्चों के बीसीजी टीकाकरण में भी बामौर, गुरसराय और मऊरानीपुर की स्थिति 90 प्रतिशत से कम है। इसके अलावा ओरल पोलियो वैक्सीन-3 और पेंटावेलेंट-3 डोज में भी महानगर क्षेत्र और बामौर में कई बच्चे छूट गए हैं। हालांकि, मीजल्स-रूबेला की पहली डोज की स्थिति संतोषजनक है और सभी केंद्रों पर 90 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण हुआ है। बबीना, बड़ागांव और मोंठ में तो लक्ष्य से अधिक टीके लगाए गए हैं, जिसका कारण अन्य जनपदों से आने वाली गर्भवतियों की यहां डिलीवरी होना बताया गया।
बीसीजी न लगाने पर होगी कार्रवाई
बैठक में डीएम ने निर्देश दिए कि जन्म के तुरंत बाद बच्चों को बीसीजी टीका अनिवार्य रूप से लगाया जाए। जिन अस्पतालों में यह नहीं हो रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही आभा आईडी बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। जिले में अब तक 12 लाख से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं और प्रदेश में झांसी 37वें स्थान पर है। बैठक में सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय, एसआईसी डॉ. पीके कटियार, महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजनारायण, मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. खुश्तर हैदर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े देखें तो टिटनेस व डिप्थीरिया-2 और बूस्टर डोज लगाने के मामले में तीन सीएचसी की स्थिति ठीक नहीं है। फरवरी के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ागांव में 4809 बच्चों में 4324, बामौर में 4059 की तुलना में 3414 और चिरगांव में 4128 के मुकाबले 3714 बच्चों को ही डोज लगी है।
वहीं, तीन सीएचसी में एक साल तक के बच्चों का बीसीजी टीकाकरण भी 90 फीसदी से कम है। इसमें बामौर में 3552 के सापेक्ष 2941, गुरसराय में 4017 के सापेक्ष 3548 और मऊरानीपुर में 5022 के सापेक्ष 4288 बच्चों को ही डोज लग सकी है। इसी तरह, ओरल पोलियो वैक्सीन-3 और पेंटावेलेंट-3 डोज महानगर में 10276 के सापेक्ष 8736 और बामौर में 3552 के सापेक्ष 3120 बच्चों को ही मिल सकी है।
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जन्म से पांच वर्ष तक के बच्चों को निमोनिया, दस्त, खसरा, रूबेला, पोलियो, टीबी और टिटनेस जैसी बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाता है। एएनसी पंजीकरण के आधार पर टीकाकरण के लक्ष्य तय किए जाते हैं, लेकिन कई केंद्रों पर प्रगति अपेक्षित नहीं है।
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टिटनेस व डिप्थीरिया-2 और बूस्टर डोज के मामले में बड़ागांव, बामौर और चिरगांव सीएचसी लक्ष्य से पीछे हैं। वहीं, एक वर्ष तक के बच्चों के बीसीजी टीकाकरण में भी बामौर, गुरसराय और मऊरानीपुर की स्थिति 90 प्रतिशत से कम है। इसके अलावा ओरल पोलियो वैक्सीन-3 और पेंटावेलेंट-3 डोज में भी महानगर क्षेत्र और बामौर में कई बच्चे छूट गए हैं। हालांकि, मीजल्स-रूबेला की पहली डोज की स्थिति संतोषजनक है और सभी केंद्रों पर 90 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण हुआ है। बबीना, बड़ागांव और मोंठ में तो लक्ष्य से अधिक टीके लगाए गए हैं, जिसका कारण अन्य जनपदों से आने वाली गर्भवतियों की यहां डिलीवरी होना बताया गया।
बीसीजी न लगाने पर होगी कार्रवाई
बैठक में डीएम ने निर्देश दिए कि जन्म के तुरंत बाद बच्चों को बीसीजी टीका अनिवार्य रूप से लगाया जाए। जिन अस्पतालों में यह नहीं हो रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही आभा आईडी बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। जिले में अब तक 12 लाख से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं और प्रदेश में झांसी 37वें स्थान पर है। बैठक में सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय, एसआईसी डॉ. पीके कटियार, महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजनारायण, मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. खुश्तर हैदर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े देखें तो टिटनेस व डिप्थीरिया-2 और बूस्टर डोज लगाने के मामले में तीन सीएचसी की स्थिति ठीक नहीं है। फरवरी के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ागांव में 4809 बच्चों में 4324, बामौर में 4059 की तुलना में 3414 और चिरगांव में 4128 के मुकाबले 3714 बच्चों को ही डोज लगी है।
वहीं, तीन सीएचसी में एक साल तक के बच्चों का बीसीजी टीकाकरण भी 90 फीसदी से कम है। इसमें बामौर में 3552 के सापेक्ष 2941, गुरसराय में 4017 के सापेक्ष 3548 और मऊरानीपुर में 5022 के सापेक्ष 4288 बच्चों को ही डोज लग सकी है। इसी तरह, ओरल पोलियो वैक्सीन-3 और पेंटावेलेंट-3 डोज महानगर में 10276 के सापेक्ष 8736 और बामौर में 3552 के सापेक्ष 3120 बच्चों को ही मिल सकी है।