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Jhansi: पत्थर के नीचे फंसा था वेदांश का शव, कल्लू ने निकाला, पिता की मौत के बाद अकेले मां कर रही थी लालन-पालन

अमर उजाला नेटवर्क Published by: दीपक महाजन Updated Wed, 08 Apr 2026 05:58 AM IST
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सार

एसडीआरएफ टीम पिछले चौबीस घंटों से उसे तलाश रही थी। मंगलवार सुबह स्थानीय केवट कल्लू को साथ में लेकर टीम डैम में उतरी। इस हादसे में दो छात्रों की जान बचाने वाले कल्लू के कांटे में ही फंसकर वेदांश के शव को निकाला जा सका।

Jhansi: Vedansh's body was trapped under a rock, Kallu along with SDRF rescued it.
छात्र वेदांश की फाइल फोटो। - फोटो : संवाद
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विस्तार

दोस्तों के साथ रेलवे डैम में पिकनिक मनाने के दौरान डूबे वेदांश (18) का शव भी मंगलवार दोपहर डैम के अंदर से बरामद हो गया। एसडीआरएफ टीम पिछले चौबीस घंटों से उसे तलाश रही थी। मंगलवार सुबह स्थानीय केवट कल्लू को साथ में लेकर टीम डैम में उतरी। इस हादसे में दो छात्रों की जान बचाने वाले कल्लू के कांटे में ही फंसकर वेदांश के शव को निकाला जा सका। जहां नाव डूबी थी, उससे करीब 20 मीटर दूर उसका शव एक पत्थर में फंसा था। इस वजह से उसका पता नहीं चल रहा था। वेदांश का शव निकलते ही परिवार के लोगों में रोना-पिटना मच गया।
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माउंट लिटरा जी स्कूल में 11वीं में पढ़ने वाले श्रवण तिवारी, शौर्य, वेदांश एवं आतिफ मंसूरी रविवार शाम करीब पांच बजे पिकनिक मनाने पहाड़ी डैम पहुंचे थे। चारों दोस्त वहां पड़ी नाव लेकर डैम के बीचों-बीच चले गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रील बनाने के दौरान नाव असंतुलित होकर पलट गई थी। उनका शोर शराबा सुनकर वहां मौजूद कल्लू केवट अपनी नाव लेकर पहुंच गया। उसकी मदद से श्रवण और शौर्य की जान किसी तरह बच गई जबकि वेदांश एवं आतिफ डैम के गहरे पानी में समा गए। सोमवार सुबह करीब आठ बजे स्थानीय गोताखोरों के कांटा डालने से आतिफ का शव बरामद हो गया था लेकिन वेदांश का कुछ पता नहीं चल पा रहा था। जालौन से आई एसडीआरएफ टीम भी तलाशने में जुटी थी। मंगलवार सुबह टीम कल्लू केवट के साथ डैम में पहुंची। डैम के बीचों-बीच कांटा डाला। दोपहर करीब एक बजे कल्लू केवट के कांटा में उसका शव फंस गया। सीओ (सदर) रामवीर सिंह के मुताबिक दोनों लापता छात्रों के शव बरामद कर लिए गए हैं। उनके शव का पोस्टमार्टम भी कराया जा रहा है।
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वेदांश के सहारे अकेले जिंदगी बिता रही मां पर टूट पड़ा गमों का पहाड़
आतिफ की तरह वेदांश भी परिवार का इकलौता बेटा था। परिजनों का कहना है कि जब वह गर्भ में था, तभी हादसे में उसके पिता विश्वजीत की मौत हो गई थी। तब से मां रजनी अकेले ही उसका लालन-पालन करती रहीं। परिवार ने रजनी पर दूसरी शादी का दबाव बनाया लेकिन, उसने बेटे वेदांश के सहारे ही जीवन बिताने की बात कहते हुए शादी करने से इन्कार कर दिया। तब से अकेले ही बेटे का लालन-पालन कर रही थीं। बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना देखा था। नामी स्कूल में उसका एडमिशन भी कराया था लेकिन, इस दर्दनाक हादसे से उन पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। जिसके सहारे पूरी जिंदगी बिताने को सोचा था, उसने उनको अकेला छोड़ दिया।

मां बार-बार बेटे को पुकार कर हो जाती बेहोश
वेदांश के लापता होने के बाद पिछले दो दिनों से रजनी बदहवास सी हैं। रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। परिवार में रजनी के सिर्फ बुजुर्ग पिता हैं। वह भी अपने नाती की मौत से बुरी तरह टूट चुके हैं। रजनी का हाल देखकर उसको ढांढस बंधाने की कोशिश करते रहे लेकिन, रजनी को जैसे ही होश आता वह वेदांश को पुकारने लगती। मां रजनी का हाल देखकर मोहल्ले के लोगों की भी आंखें नम हो आईं।
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