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Jhansi: साहब, मैं जिंदा हूं… कागजों में ‘मृत’ दिखा दो साल से बंद कर दी वृद्धावस्था पेंशन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 24 Apr 2026 01:35 AM IST
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सार
वृद्धा की करीब दो साल पहले से पेंशन बंद हो गई। जब वह जानकारी लेने विकास भवन पहुंचीं तो पता चला कि सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।
वृद्धा को मृत घोषित कर बंद कर दी वृद्धावस्था पेंशन।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
“साहब, मैं अभी जिंदा हूं… लेकिन कागजों में मुझे मृत दिखाकर मेरी पेंशन बंद कर दी गई।” यह कहते-कहते श्याम कुंवर प्रजापति की आवाज भर्रा गई। दो साल से दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थकी इस वृद्धा की पीड़ा सुनते ही जिलाधिकारी गौरांग राठी ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए।
मऊरानीपुर क्षेत्र के अक्सेव गांव निवासी श्याम कुंवर प्रजापति, पत्नी मातादीन प्रजापति, बृहस्पतिवार को जनता दर्शन में अपनी फरियाद लेकर डीएम कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि वह बेहद गरीब हैं। पहले मिट्टी के बर्तन बनाकर किसी तरह जीवनयापन करती थीं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ काम छूट गया। ऐसे में वृद्धावस्था पेंशन ही उनके लिए सहारा थी, जिससे घर का राशन चलता था।
दाे साल से बंद है पेंशन
परिवार में एक बेटा है, जो मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च उठाता है। इसी बीच करीब दो साल पहले उनकी पेंशन अचानक बंद हो गई। जब वह जानकारी लेने विकास भवन पहुंचीं तो पता चला कि सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।
डीएम ने जांच कर दिए रिपोर्ट देने के आदेश
“मैं जिंदा हूं, इसका सबूत भी कई बार दे चुकी हूं… लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई,”—श्याम कुंवर ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा। उन्होंने बताया कि कई बार दफ्तरों के चक्कर लगाए, जरूरी दस्तावेज भी जमा किए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार किसान नेता अविनाश भार्गव के साथ वह कलेक्ट्रेट पहुंचीं और डीएम के सामने अपनी बात रखी। मामला सुनते ही डीएम गौरांग राठी ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित विभाग को तत्काल जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
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मऊरानीपुर क्षेत्र के अक्सेव गांव निवासी श्याम कुंवर प्रजापति, पत्नी मातादीन प्रजापति, बृहस्पतिवार को जनता दर्शन में अपनी फरियाद लेकर डीएम कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि वह बेहद गरीब हैं। पहले मिट्टी के बर्तन बनाकर किसी तरह जीवनयापन करती थीं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ काम छूट गया। ऐसे में वृद्धावस्था पेंशन ही उनके लिए सहारा थी, जिससे घर का राशन चलता था।
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दाे साल से बंद है पेंशन
परिवार में एक बेटा है, जो मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च उठाता है। इसी बीच करीब दो साल पहले उनकी पेंशन अचानक बंद हो गई। जब वह जानकारी लेने विकास भवन पहुंचीं तो पता चला कि सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।
डीएम ने जांच कर दिए रिपोर्ट देने के आदेश
“मैं जिंदा हूं, इसका सबूत भी कई बार दे चुकी हूं… लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई,”—श्याम कुंवर ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा। उन्होंने बताया कि कई बार दफ्तरों के चक्कर लगाए, जरूरी दस्तावेज भी जमा किए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार किसान नेता अविनाश भार्गव के साथ वह कलेक्ट्रेट पहुंचीं और डीएम के सामने अपनी बात रखी। मामला सुनते ही डीएम गौरांग राठी ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित विभाग को तत्काल जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

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