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Kannauj News: दो साल तक मौत से जंग लड़ने के बाद अभय सैन्य सम्मान के साथ विदा
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फोटो:25: दिवंगत अभय कुमार सिंह (फाइल फोटो)। स्रोत: परिजन।
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सिकंदरपुर। जब तक सूरज चांद रहेगा, अभय तेरा नाम रहेगा और भारत माता की जय के गगनभेदी नारों के बीच रविवार को भगवानपुर के लाल अभय कुमार सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। अजमेर में बटालियन के साथ कैपिंग के दौरान घायल हुए अभय ने सैन्य अस्पतालों में दो साल तक मौत के साथ संघर्ष किया। शनिवार को इलाज के दौरान वह जिंदगी की जंग हार गए।
कोतवाली क्षेत्र के भगवानपुर निवासी अभय कुमार सिंह (40) ने साल 2001 में भोपाल से सेना में अपनी सेवा शुरू की थी। उनके जीवन में दुखद मोड़ वर्ष 2023 में आया, जब वे अजमेर के नसीराबाद में सैन्य कैंपिंग के दौरान ड्यूटी पर थे। जंगल में काम करते समय एक लकड़ी उनके सिर में गहरे तक धंस गई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तभी से उनका जीवन बचाने के लिए सेना के डॉक्टरों का संघर्ष जारी था। करीब दो वर्षों तक दिल्ली स्थित आरआर हॉस्पिटल में उनका इलाज चला, जिसके बाद पिछले तीन माह से उन्हें फतेहगढ़ के मिलिट्री हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया था।
शनिवार रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। अभय अपने पीछे पत्नी किरण देवी और दो मासूम बेटों, देव (14) और आर्यन (9) को बिलखता छोड़ गए हैं। रविवार को सेना की टुकड़ी उनके पार्थिव शरीर को लेकर गांव पहुंची। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का करुण क्रंदन देखकर उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उनकी शादी वर्ष 2012 में याकूतगंज (फर्रुखाबाद) के पास बलीपुर में हुई थी।
इनसेट
सिखलाई रेजीमेंट ने दी अंतिम सलामी
शहीद जवान को अंतिम विदाई देने के लिए सिखलाई रेजीमेंट के कप्तान बलविंदर सिंह की अगुवाई में सूबेदार राकेश सिंह भगत, राहुल चौहान और अरुण बी सहित 501 नजीराबाद अजमेर रेजिमेंट की टुकड़ी पहुंची। सैन्य परंपरा के अनुसार जवानों ने शस्त्र झुकाकर अपने साथी को सलामी दी। गांव के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां भारी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने नम आंखों से वीर सपूत को विदा किया।
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कोतवाली क्षेत्र के भगवानपुर निवासी अभय कुमार सिंह (40) ने साल 2001 में भोपाल से सेना में अपनी सेवा शुरू की थी। उनके जीवन में दुखद मोड़ वर्ष 2023 में आया, जब वे अजमेर के नसीराबाद में सैन्य कैंपिंग के दौरान ड्यूटी पर थे। जंगल में काम करते समय एक लकड़ी उनके सिर में गहरे तक धंस गई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तभी से उनका जीवन बचाने के लिए सेना के डॉक्टरों का संघर्ष जारी था। करीब दो वर्षों तक दिल्ली स्थित आरआर हॉस्पिटल में उनका इलाज चला, जिसके बाद पिछले तीन माह से उन्हें फतेहगढ़ के मिलिट्री हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया था।
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शनिवार रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। अभय अपने पीछे पत्नी किरण देवी और दो मासूम बेटों, देव (14) और आर्यन (9) को बिलखता छोड़ गए हैं। रविवार को सेना की टुकड़ी उनके पार्थिव शरीर को लेकर गांव पहुंची। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का करुण क्रंदन देखकर उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। उनकी शादी वर्ष 2012 में याकूतगंज (फर्रुखाबाद) के पास बलीपुर में हुई थी।
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सिखलाई रेजीमेंट ने दी अंतिम सलामी
शहीद जवान को अंतिम विदाई देने के लिए सिखलाई रेजीमेंट के कप्तान बलविंदर सिंह की अगुवाई में सूबेदार राकेश सिंह भगत, राहुल चौहान और अरुण बी सहित 501 नजीराबाद अजमेर रेजिमेंट की टुकड़ी पहुंची। सैन्य परंपरा के अनुसार जवानों ने शस्त्र झुकाकर अपने साथी को सलामी दी। गांव के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां भारी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने नम आंखों से वीर सपूत को विदा किया।

फोटो:25: दिवंगत अभय कुमार सिंह (फाइल फोटो)। स्रोत: परिजन।

फोटो:25: दिवंगत अभय कुमार सिंह (फाइल फोटो)। स्रोत: परिजन।

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