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Kannauj News: जरूरत 15 की, मिल रहीं किसानों को पांच बोरी खाद
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कन्नौज। जिले में खाद संकट गहरा गया है। इस कारण किसान परेशान हैं। सहकारी समितियों में 4402 मीट्रिक टन खाद होने के बावजूद किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। 61,329 से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री अधूरी होने से स्थिति और बिगड़ गई है।
कृषि विभाग 4,402 मीट्रिक टन से अधिक खाद उपलब्ध होने का दावा करता है। हालांकि, खरीफ सीजन में धान की नर्सरी के लिए किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। नई सत्यापन प्रक्रिया और फार्मर रजिस्ट्री की बाध्यता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। जिले में 37,770 हेक्टेयर में धान की नर्सरी की बोआई होनी है। इसके लिए यूरिया और डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता है। 48 समितियों में 3,215 मीट्रिक टन यूरिया, 463 मीट्रिक टन डीएपी और 724 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। किसान मानसिंह कुशवाहा और अविनाथ सिंह ने बताया कि उन्हें पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है। विनय कटियार को 15 बोरी डीएपी की जगह केवल पांच बोरी मिल रही है। वहीं जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने पर्याप्त उर्वरक स्टॉक का दावा किया है। उन्होंने किसानों को हेल्पलाइन नंबर 8287472660 पर संपर्क करने को कहा। उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री न होने पर किसान खतौनी या आकार पत्र 23 से खाद ले सकते हैं।
अभिलेख जले होने का दंश झेल रहे किसान
जिले में 61,329 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का काम अधूरा है। विभागीय सुस्ती और पोर्टल की दिक्कतों से यह कार्य धीमा है। 34 ग्राम पंचायतों के राजस्व अभिलेख जले हुए हैं। इन गांवों के किसानों को खाद और किसान सम्मान निधि नहीं मिल पा रही है। कई किसानों के पास आकार पत्र 23 भी नहीं है, जिससे उन्हें खाद नहीं मिल रही है।
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जिले में खाद की उपलब्धता
खाद कीमत प्रति बोरी उपलब्धता (मीट्रिक टन में)
यूरिया 266.50 रुपये 15,814
डीएपी 1350 रुपये 5,985.74
एनपीके 1900-2450 रुपये 13,853
(इसमें दुकानदार भी शामिल हैं)
वर्जन
उर्वरक की किल्लत नहीं है। समितियों पर लगातार खाद का आवंटन किया जा रहा है। कहा कि किसान किसी भी अफवाह में न आएं। किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक लें, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है।
- मुनीश कुमार गौड़, जिला सहायक निबंधक (सहकारिता)
कृषि विभाग 4,402 मीट्रिक टन से अधिक खाद उपलब्ध होने का दावा करता है। हालांकि, खरीफ सीजन में धान की नर्सरी के लिए किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। नई सत्यापन प्रक्रिया और फार्मर रजिस्ट्री की बाध्यता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। जिले में 37,770 हेक्टेयर में धान की नर्सरी की बोआई होनी है। इसके लिए यूरिया और डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता है। 48 समितियों में 3,215 मीट्रिक टन यूरिया, 463 मीट्रिक टन डीएपी और 724 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। किसान मानसिंह कुशवाहा और अविनाथ सिंह ने बताया कि उन्हें पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है। विनय कटियार को 15 बोरी डीएपी की जगह केवल पांच बोरी मिल रही है। वहीं जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने पर्याप्त उर्वरक स्टॉक का दावा किया है। उन्होंने किसानों को हेल्पलाइन नंबर 8287472660 पर संपर्क करने को कहा। उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री न होने पर किसान खतौनी या आकार पत्र 23 से खाद ले सकते हैं।
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अभिलेख जले होने का दंश झेल रहे किसान
जिले में 61,329 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का काम अधूरा है। विभागीय सुस्ती और पोर्टल की दिक्कतों से यह कार्य धीमा है। 34 ग्राम पंचायतों के राजस्व अभिलेख जले हुए हैं। इन गांवों के किसानों को खाद और किसान सम्मान निधि नहीं मिल पा रही है। कई किसानों के पास आकार पत्र 23 भी नहीं है, जिससे उन्हें खाद नहीं मिल रही है।
जिले में खाद की उपलब्धता
खाद कीमत प्रति बोरी उपलब्धता (मीट्रिक टन में)
यूरिया 266.50 रुपये 15,814
डीएपी 1350 रुपये 5,985.74
एनपीके 1900-2450 रुपये 13,853
(इसमें दुकानदार भी शामिल हैं)
वर्जन
उर्वरक की किल्लत नहीं है। समितियों पर लगातार खाद का आवंटन किया जा रहा है। कहा कि किसान किसी भी अफवाह में न आएं। किसान अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक लें, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है।
- मुनीश कुमार गौड़, जिला सहायक निबंधक (सहकारिता)