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Kannauj News: गंगा ने बढ़ाई धड़कनें... चेतावनी रेखा की ओर बढ़ रही धारा
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कन्नौज। महादेवी घाट पर बुधवार दोपहर गंगा का जलस्तर 124.770 मीटर दर्ज किया गया। चेतावनी बिंदु 124.970 मीटर है। यानी गंगा चेतावनी रेखा से महज 20 सेंटीमीटर दूर है। आंकड़ों में यह दूरी भले छोटी लग रही लेकिन बीते सालों में कटान झेल चुके तटवर्ती परिवारों के लिए यह चिंता की बड़ी वजह बन गई है। उनकी रातों की नींद उड़ गई हैं।
सदर तहसील के कासिमपुर, कटरी क्षेत्र और गंगा किनारे बसे परिवारों की नजरें अब हर घंटे बढ़ते जलस्तर पर टिकी हैं। ऐस लोग जिन्होंने पहले खेत, पेड़ और आशियाने गंगा में समाते देखे हैं, उनके लिए बढ़ता पानी किसी अलार्म से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ बाद में आती है, पहले गंगा का कटान घरों तक पहुंचता है। इसी बढ़ती चिंता के बीच शाम को डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और एसपी विनोद कुमार ने एएसपी अजय कुमार, सदर एसडीएम वैभव गुप्ता, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी जय लक्ष्मी पांडेय व अन्य अफसरों के साथ कासिमपुर और महादेवी घाट का निरीक्षण किया
। अधिकारियों ने गांव पहुंचकर लोगों से बातचीत की और राहत-बचाव तैयारियों की हकीकत परखी। डीएम ने गंगा किनारे रह रहे 30 से 40 परिवारों का सर्वे करने को खंड विकास अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि कितने परिवारों के पास स्थायी आवास उपलब्ध है इसकी जानकारी करें। उन्होंने तहसीलदार को निर्देश दिए कि संबंधित भूमि की श्रेणी का परीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें तथा पात्र परिवारों को नियमानुसार आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। महादेवी घाट पर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सख्ती दिखाई। अधिकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर स्नान पर रोक लगाने, गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती बढ़ाने तथा राहत शिविरों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए।
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कटान का डर, इसलिए बढ़ा तनाव
तटवर्ती गांवों के लोगों को सिर्फ बाढ़ का डर नहीं सता रहा बल्कि कटान की चिंता ज्यादा है। कासिमपुर क्षेत्र में कई परिवार बीते सालों में पहले ही अपने मकान गंवा चुके हैं। हर साल गंगा का रुख बदलने के साथ नदी किनारे रहने वालों की चिंता भी बढ़ जाती है। चेतावनी बिंदु के पास पहुंचा जलस्तर अब उन्हीं पुराने जख्मों को फिर ताजा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जल उतर जाता है, लेकिन कटान से उजड़े घर दोबारा बसाने में वर्षों लग जाते हैं।
हर घंटे रखी जा रही नजर
बुधवार दोपहर दो बजे मेहंदी घाट पर गंगा का जलस्तर 124.770 मीटर दर्ज किया गया। चेतावनी बिंदु 124.970 मीटर और खतरा बिंदु 125.970 मीटर है। चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज से 1,11,969 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जलस्तर फिलहाल स्थिर है लेकिन प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
वर्जन
गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। राहत शिविर, पेयजल, चिकित्सा, पशु आश्रय और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्थिति में जनहानि न हो, यह हमारी प्राथमिकता है।
-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, डीएम
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सदर तहसील के कासिमपुर, कटरी क्षेत्र और गंगा किनारे बसे परिवारों की नजरें अब हर घंटे बढ़ते जलस्तर पर टिकी हैं। ऐस लोग जिन्होंने पहले खेत, पेड़ और आशियाने गंगा में समाते देखे हैं, उनके लिए बढ़ता पानी किसी अलार्म से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ बाद में आती है, पहले गंगा का कटान घरों तक पहुंचता है। इसी बढ़ती चिंता के बीच शाम को डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और एसपी विनोद कुमार ने एएसपी अजय कुमार, सदर एसडीएम वैभव गुप्ता, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी जय लक्ष्मी पांडेय व अन्य अफसरों के साथ कासिमपुर और महादेवी घाट का निरीक्षण किया
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। अधिकारियों ने गांव पहुंचकर लोगों से बातचीत की और राहत-बचाव तैयारियों की हकीकत परखी। डीएम ने गंगा किनारे रह रहे 30 से 40 परिवारों का सर्वे करने को खंड विकास अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि कितने परिवारों के पास स्थायी आवास उपलब्ध है इसकी जानकारी करें। उन्होंने तहसीलदार को निर्देश दिए कि संबंधित भूमि की श्रेणी का परीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें तथा पात्र परिवारों को नियमानुसार आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। महादेवी घाट पर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सख्ती दिखाई। अधिकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर स्नान पर रोक लगाने, गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती बढ़ाने तथा राहत शिविरों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए।
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कटान का डर, इसलिए बढ़ा तनाव
तटवर्ती गांवों के लोगों को सिर्फ बाढ़ का डर नहीं सता रहा बल्कि कटान की चिंता ज्यादा है। कासिमपुर क्षेत्र में कई परिवार बीते सालों में पहले ही अपने मकान गंवा चुके हैं। हर साल गंगा का रुख बदलने के साथ नदी किनारे रहने वालों की चिंता भी बढ़ जाती है। चेतावनी बिंदु के पास पहुंचा जलस्तर अब उन्हीं पुराने जख्मों को फिर ताजा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जल उतर जाता है, लेकिन कटान से उजड़े घर दोबारा बसाने में वर्षों लग जाते हैं।
हर घंटे रखी जा रही नजर
बुधवार दोपहर दो बजे मेहंदी घाट पर गंगा का जलस्तर 124.770 मीटर दर्ज किया गया। चेतावनी बिंदु 124.970 मीटर और खतरा बिंदु 125.970 मीटर है। चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज से 1,11,969 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जलस्तर फिलहाल स्थिर है लेकिन प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
वर्जन
गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। राहत शिविर, पेयजल, चिकित्सा, पशु आश्रय और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्थिति में जनहानि न हो, यह हमारी प्राथमिकता है।
-आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, डीएम