{"_id":"6a0a0d180185be9c3803ab64","slug":"high-court-cancels-gangster-court-order-jail-transfer-valid-kannauj-news-c-214-1-knj1007-149200-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: हाईकोर्ट ने किया गैंगस्टर कोर्ट का आदेश रद्द किया, जेल स्थानांतरण वैध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: हाईकोर्ट ने किया गैंगस्टर कोर्ट का आदेश रद्द किया, जेल स्थानांतरण वैध
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कन्नौज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कन्नौज के विशेष गैंगस्टर कोर्ट के एक आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश में पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव और उसके भाई नीलू यादव के जेल स्थानांतरण को अवैध घोषित किया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन के पास बंदी को प्रशासनिक आधार पर एक जिले से दूसरी जिला जेल में स्थानांतरित करने का पूरा अधिकार है। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर आया है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की एकल पीठ ने राज्य सरकार की अर्जी स्वीकार की। पीठ ने कन्नौज गैंगस्टर कोर्ट के 19 मई 2025 के आदेश को खारिज कर दिया। स्थानीय कोर्ट ने 19 मई 2025 को जेल प्रशासन के स्थानांतरण आदेश को शून्य घोषित किया था। यह मामला यूपी गैंगस्टर एंड एंटी सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी नवाब सिंह यादव और साक्ष्य प्रभावित के आरोपी नीलू यादव को 21 मार्च 2025 को स्थानांतरित किया गया था। उन्हें कन्नौज जिला जेल से बांदा और कौशांबी की जिला जेलों में भेजा गया था। बंदियों ने इस फैसले के खिलाफ स्थानीय कोर्ट का रुख किया था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत याचिका दायर हुई थी। राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार चंद ने दलील दी। उन्होंने बताया कि जेल नियमावली के पैराग्राफ 137, 138 और 409-ए के तहत अधिकारियों को स्थानांतरण की शक्तियां हैं। विपक्षी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अमित डागा ने भी इस कानूनी स्थिति पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन के पास बंदी को स्थानांतरित करने का पूरा अधिकार है। यह अधिकार विचाराधीन या सजायाफ्ता दोनों तरह के बंदियों पर लागू होता है। स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर एक जिले से दूसरी जिला जेल में किया जा सकता है। पीठ ने पुराने न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) ऐसे स्थानांतरण के आड़े नहीं आती है। यह निर्णय जेलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों को अधिकार देता है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की एकल पीठ ने राज्य सरकार की अर्जी स्वीकार की। पीठ ने कन्नौज गैंगस्टर कोर्ट के 19 मई 2025 के आदेश को खारिज कर दिया। स्थानीय कोर्ट ने 19 मई 2025 को जेल प्रशासन के स्थानांतरण आदेश को शून्य घोषित किया था। यह मामला यूपी गैंगस्टर एंड एंटी सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी नवाब सिंह यादव और साक्ष्य प्रभावित के आरोपी नीलू यादव को 21 मार्च 2025 को स्थानांतरित किया गया था। उन्हें कन्नौज जिला जेल से बांदा और कौशांबी की जिला जेलों में भेजा गया था। बंदियों ने इस फैसले के खिलाफ स्थानीय कोर्ट का रुख किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत याचिका दायर हुई थी। राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार चंद ने दलील दी। उन्होंने बताया कि जेल नियमावली के पैराग्राफ 137, 138 और 409-ए के तहत अधिकारियों को स्थानांतरण की शक्तियां हैं। विपक्षी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अमित डागा ने भी इस कानूनी स्थिति पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन के पास बंदी को स्थानांतरित करने का पूरा अधिकार है। यह अधिकार विचाराधीन या सजायाफ्ता दोनों तरह के बंदियों पर लागू होता है। स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर एक जिले से दूसरी जिला जेल में किया जा सकता है। पीठ ने पुराने न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) ऐसे स्थानांतरण के आड़े नहीं आती है। यह निर्णय जेलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों को अधिकार देता है।