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Kannauj News: विशुनगढ़ स्टेट की रानी का मामला सीएम तक पहुंचा
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विशुनगढ़ (कन्नौज)। विशुनगढ़ स्टेट की रानी पुष्पा त्रिपाठी ने शनिवार को समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण से मुलाकात उन्हें समस्या से अवगत कराया। समस्या सुनने के बाद मंत्री ने फोन पर मुख्यमंत्री के ओएसडी से वार्ता कर रानी की समस्या बताई। तब मुख्यमंत्री ने रानी को नौ अप्रैल को लखनऊ बुलाया है।
रानी ने मंत्री को बताया कि विशुनगढ़ गांव सभा स्थित उनकी पैतृक संपत्ति पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है। यह भू-माफिया फर्जी बैनामा कर दूसरों को जमीन बेंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासनकाल में विशुनगढ़ स्टेट के अधीन चार किले थे। इनमें गंगधरापुर, गंगागंज गुरौली, हसेरन और विशुनगढ़ शामिल थे। इन किलो की सालाना मालगुजारी 3.56 लाख रुपये से अधिक थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री असीम अरुण ने तत्काल मुख्यमंत्री के ओएसडी को फोन कर स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद रानी पुष्पा त्रिपाठी को नौ अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास पर मिलने के लिए बुलाया गया है। मंत्री ने रानी को आश्वस्त किया कि उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करें और यदि कहीं अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाकर किले की संपत्ति को भूमाफियाओं से मुक्त कराया जाए।
आंबेडकर पार्क में चौपाल लगाकर सुनीं समस्याएं
समाज कल्याण मंत्री ने किला नगरिया स्थित अंबेडकर पार्क में चौपाल लगाकर क्षेत्रीय लोगों की समस्याएं सुनीं। मंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सामाजिक एकता पर जोर दिया और कहा कि समाज को जोड़कर ही विकास संभव है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के आंबेडकर पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। वहीं, अपने कोटे से 30 लाख रुपये तक की लागत से सड़क, नाली व स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं विकसित कराई जाएंगी।
जाति प्रमाण पत्र जारी न होने से खटीक समाज परेशान
ग्राम पंचायत विशुनगढ़ के खटीक समाज के अखिलेश, नेमकुमार, कुंवर सिंह, सुमित कुमार आदि ने समाज कल्याण मंत्री को बताया कि गांव में खटीक समाज के 50 परिवार, जिनकी आबादी 400 है, निवास करते हैं। पहले जाति प्रमाण पत्र जारी होते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से लेखपाल व तहसील प्रशासन द्वारा प्रमाण पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतें हो रही हैं। समाज के लोगों ने पूर्व की तरह खटीक जाति के प्रमाण पत्र जारी कराने की मांग की।
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रानी ने मंत्री को बताया कि विशुनगढ़ गांव सभा स्थित उनकी पैतृक संपत्ति पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है। यह भू-माफिया फर्जी बैनामा कर दूसरों को जमीन बेंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासनकाल में विशुनगढ़ स्टेट के अधीन चार किले थे। इनमें गंगधरापुर, गंगागंज गुरौली, हसेरन और विशुनगढ़ शामिल थे। इन किलो की सालाना मालगुजारी 3.56 लाख रुपये से अधिक थी।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री असीम अरुण ने तत्काल मुख्यमंत्री के ओएसडी को फोन कर स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद रानी पुष्पा त्रिपाठी को नौ अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास पर मिलने के लिए बुलाया गया है। मंत्री ने रानी को आश्वस्त किया कि उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करें और यदि कहीं अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाकर किले की संपत्ति को भूमाफियाओं से मुक्त कराया जाए।
आंबेडकर पार्क में चौपाल लगाकर सुनीं समस्याएं
समाज कल्याण मंत्री ने किला नगरिया स्थित अंबेडकर पार्क में चौपाल लगाकर क्षेत्रीय लोगों की समस्याएं सुनीं। मंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सामाजिक एकता पर जोर दिया और कहा कि समाज को जोड़कर ही विकास संभव है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के आंबेडकर पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। वहीं, अपने कोटे से 30 लाख रुपये तक की लागत से सड़क, नाली व स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं विकसित कराई जाएंगी।
जाति प्रमाण पत्र जारी न होने से खटीक समाज परेशान
ग्राम पंचायत विशुनगढ़ के खटीक समाज के अखिलेश, नेमकुमार, कुंवर सिंह, सुमित कुमार आदि ने समाज कल्याण मंत्री को बताया कि गांव में खटीक समाज के 50 परिवार, जिनकी आबादी 400 है, निवास करते हैं। पहले जाति प्रमाण पत्र जारी होते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से लेखपाल व तहसील प्रशासन द्वारा प्रमाण पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतें हो रही हैं। समाज के लोगों ने पूर्व की तरह खटीक जाति के प्रमाण पत्र जारी कराने की मांग की।